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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

वल्कनीकरण

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right|thumb|250px|वल्कनीकरण की प्रक्रिया से प्राप्त रबर की गेंद वल्कनीकरण (Vulcanization या vulcanisation) एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें गंधक या इसी प्रकार का कोई दूसरा पदार्थ मिला देने से रबर या संबंधित बहुलकों को अपेक्षाकृत अधिक टिकाऊ पदार्थ में बदल दिया जाता है। इन पदार्थों के मिलाने से रबर में मौजूद बहुलक शृंखलाएं परस्पर 'क्रॉसलिंकित' (क्रॉसलिंक्ड) हो जाती हैं। वल्कित पदार्थ कम चिपचिपा होता है एवं इसके यांत्रिक गुण अधिक श्रेष्ठ होते हैं। टायर, जूतों के 'सोल', होज पाइप, हॉकी पक एवं अनेकों सामान वल्कित रबर के ही बनते हैं। 'वल्कन' नाम रोम के 'आग के देवता' का नाम है। रबर का वल्कनीकरण महत्व का प्रक्रम है। इससे शुद्ध रबर के अनेक दोषों का निराकरण हो जाता है, जिससे रबर को उपयोगिता बढ़ जाती है। वल्कनीकरण के लिए कच्चे रबर को गंधक के साथ लगभग १४०° सें. पर तीन से चार घंटे तक गरम करते हैं। गंधक के साथ त्वरक को मिला देने से वल्कनीकरण शीघ्र संपन्न हो जाता और रबर में कुछ अधिक उपयोगी गुण भी आ जाते हैं। त्वरक की अत्यंत अल्प मात्रा लगती है। कुछ त्वरकों से तो सामान्य ताप पर ही वल्कनीकरण हो जाता है। वल्कनीकरण से भौतिक गुणों के साथ साथ रबर के रासायनिक गुणों में भी परिवर्तन हो जाता है। वल्कनीकरण में ०.१५ प्रतिशत से ३२ प्रतिशत गंधक इस्तेमाल हो सकता है। वल्कनीकृत रबर का गुण वल्कनीकरण के ढंग पर बहुत कुछ निर्भर करता है। वल्कनीकृत रबर पर पानी का कोई असर नहीं होता। यह चिपचिपा नहीं होता। वितानक्षमता और दैर्ध्य बढ़ जाता है। विलायकों, ऊष्मा, विदरण और अपघर्षण के प्रति प्रतिरोध बढ़ जाता है। वैद्युत गुण बहुत कुछ बदल जाता है। वल्कनीकरण प्रेस में, या भाप की उपस्थिति में, या शुष्क ताप पर संपन्न हाता है। वल्कनीकरण में गंधक, रबर के साथ रसायनत: संयुक्त होता है। इतिहास उन्नीसवीं सदी के शुरुआती दौर में अनेक वैज्ञानिक ऐसी रबर तैयार करने की कोशिश में लगे थे, जिसे लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सके और जो मौसम या तापमान से ज्यादा प्रभावित न हो। अमेरिकी विज्ञानी चार्ल्स गुडइयर भी इन्हीं वैज्ञानिकों में से एक थे, जो सालों से इस दिशा में प्रयोग कर रहे थे। वर्ष 1839 में रबर व सल्फर के मिश्रण के साथ ऐसे ही एक प्रयोग के दौरान उनका यह मिश्रण गर्म स्टोव पर गिर गया, लेकिन यह देखकर उनके आश्चर्य का कोई ठिकाना न रहा कि स्टोव की गर्मी से पिघलने के बजाय मिश्रण चमड़े जैसा सख्त हो गया और इसका लचीलापन भी बरकरार था। बाद के प्रयोगों से साबित हो गया कि रबर के इस नए पॉलीमर को भीषण ठंड में रखा जाए, तब भी इसका लचीलापन नहीं जाता। इस तरह यह वल्कित रबर (वल्कनाइज्ड रबर) अस्तित्व में आई, जिसका टायर-ट्यूब, रबर बैंड, वाटरप्रूफ कोट व फुटवियर तथा गुब्बारे इत्यादि बनाने में व्यापक इस्तेमाल होता है। right|thumb|300px|वल्कनीकरण वर्कशॉप center|600px|thumb|तात्विक गंधक के मिश्रण से रबर को वल्कित करने का आदर्शीकृत अभिक्रिया योजना श्रेणी:रासायनिक प्रक्रिया श्रेणी:रबर