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गोविंददास
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चैतन्य महाप्रभु के परवर्ती कवियों में गोविन्ददास कविराज सर्वश्रेष्ठ कवि हुए हैं। इन्होने केवल "ब्रजबुलि" में पर रचना की है। समस्त पद राधा-कृष्ण-लीला संबंधी है। इन पदों में समस्त काव्यगुण बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। छंद में अत्यंत सुंदर गति शब्दों के चयन द्वारा प्रस्तुत की गई है। अनुप्रासों की छटा भी अनुपम है। तत्सम एवं अर्धतत्सम शब्दों के प्रयोग से काव्य अत्यंत सुन्दर हो उठा है। प्रकृतिचित्रण, नख-शिख-वर्णन अत्यंत मनोमुग्धकारी है। कहा जाता है, कवि ने अपने पदों का संग्रह गीतामृत नाम से स्वयं किया था।
इनका जन्म 1530 ई. और मृत्यु 1613 ई. लगभग हुई। गोविंददास का उल्लेख प्रमुख वैष्णव जीवनीग्रंथ जैसे भक्तमाल, भक्तिरत्नाकर और प्रेमविलास में विस्तृत रूप से है। इन सबके अनुसार गोविंददास का जन्म श्रीखंड में हुआ था। इनका ग्राम "तेलियाबुधरी" था। इनके पिता का नाम चिरंजीव सेन एवं माता का नाम सुनंदा था। इनके नाना ने, जिनका नाम दामोदर सेन था अनाथ हो जाने पर इनको और इनके भाई रामचंद्र को पाला था। गोविंददास पहले शाक्त थे फिर वैष्णव हो गए। श्रीनिवास आचार्य इनके गुरु थे। इनके प्राप्त पदों की संख्या 450 से ऊपर है।
इन्हें भी देखें
बंगाली वैष्णव साहित्य में गोविंददास नाम के दो अन्य विख्यात कवि हुए हैं:
गोविन्ददास चक्रवर्ती,
गोविन्ददास आचार्य।
श्रेणी:भक्त कवि
श्रेणी:बांग्ला साहित्य
श्रेणी:1530 में जन्मे लोग
श्रेणी:१६१३ मृत्यु