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राजा बीरबल
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अगस्त 2015
Birbal.jpg बीरबल बीरबल महेश दास भट्ट 1528 सीधी मध्यप्रदेश, भारत 16 फरवरी 1586 (उम्र 57-58) स्वात घाटी, आज पाकिस्तान हिन्दू धर्म
(ब्राह्मण वर्ण) अकबर के साम्राज्य में दरबारी और सलाहकार उर्वशी देवी सौदामणि दूबे (पुत्री)
महेश दास, (1528 — 16 फरवरी 1586) जो बीरबल के नाम से अधिक प्रसिद्ध हैं, इनका जन्म सीधी जिले के घोघरा नामक स्थान पर हुआ था, मुगल बादशाह अकबर के दरबार में प्रमुख वज़ीर और अकबर के परिषद के नौ सलाहकारों (नवरत्नों) में से एक थे। उनका जन्म कायस्थ परिवार में हुआ था वह बचपन से ही तीव्र बुद्धि के थे। उनका नाम महेश दास था। उनकी बुद्धिमानी के हजारों किस्से हैं जो बच्चों को सुनाए जाते हैं। माना जाता है कि 16 फरवरी 1586 को अफगानिस्तान के युद्ध में एक बड़ी सैन्य मंडली के नेतृत्व के दौरान बीरबल की मृत्यु हो गयी।
बचपन
इनके बचपन का नाम महेश दास था और ये जाति से भट्ट ब्राह्मण थे। बचपन से ही वो बहुत ही चतुर एवं बुद्धिमान थे। उनके जन्म के विषय मे मतभिन्नता है। कुछ विद्वान उन्हें आगरा के निवासी, कोई कानपुर के घाटमपुर तहसील के, कोई दिल्ली के निवासी और कोई मध्य प्रदेश के सीधी जिले का निवासी बताते हैं पर ज्यादातर विद्वान मध्य प्रदेश के सीधी जिले के घोघरा गाँव को ही बीरबल का जन्मस्थान स्वीकार करते हैं।अप्रैल 2020
अकबर से मिलन
अकबर से मिलन संबंधी अनेक कथाएं प्रचलित है। सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार बादशाह अकबर ने अपने एक पान का बीड़ा लगाने वाले नौकर को एक "पाओभर" (आज का लगभग 250 ग्राम) चूना लेकर आने को कहा। नौकर किले के बाहर दुकान करने वाले पनवाड़ी से पाओभर चूना लेने गया। इतना सारा चूना ले जाते देख पनवाड़ी को कुछ शक होता है। इसलिए बीरबल नौकर से पूरा घटनाक्रम जानता है, और कहता है कि बादशाह यह चूना तुझको ही खिलवायेगा। तेरे पान में लगे ज्यादा चूने से बादशाह की जीभ कट गई है, इसलिए यह सब चूना तुझे ही खाना पड़ेगा। इसलिए इतना ही घी भी ले जा, जब बादशाह चूना खाने को कहे तो चूना खाने के बाद घी पी लेना।
नौकर दरबार मे चूना लेकर जाता है, और बादशाह नौकर को वह सारा पाओभर (250 ग्राम) चूना खाने का आदेश देता है। नौकर वह सारा चूना खा लेता है, लेकिन उस पनवाड़ी बीरबल की सलाह के अनुसार घी भी पी लेता है। अगले दिन जब बादशाह का वह नौकर पुनः जब राज दरबार पहुचता है, तो अकबर उसे जीवित देख आश्चर्य से उसके जीवित बचने का कारण जानता है। नौकर सारी बात बादशाह को बताता है, कि कैसे किले के बाहर के पनवाड़ी की समझ-बूझ से वह बच सका। बादशाह उस पनवाड़ी की बुद्धिमत्ता से प्रभावित हो उसे दरबार मे बुलवाते है। इस प्रकार बादशाह अकबर और बीरबल का पहली बार आमना सामना होता है। और अकबर ऐसे बुद्धिमान व्यक्ति को अपने दरबार मे स्थान देते हैं।
अकबर के दरबार में
अकबर के दरबार में अकबर ने इन्हें "बीरबल" का खिताब दिया, चलते चलते वह बीरबल होगया।अप्रैल 2020
राजा बीरबल को कई बार बादशाह अकबर दरबार में ऐसे सवाल पूछ लिया करते थे जिनका जवाब देना बहुत कठिन हो जाता था परंतु राजा बीरबल अपनी बुद्धिमानी से प्रसिद्ध थे इस कारण वह सभी प्रश्नों का उत्तर आसानी से दे देते थे।
अकबर के दरबार में बीरबल का ज्यादातर कार्य सैन्य और प्रशासनिक थे तथा वह सम्राट का एक बहुत ही करीबी दोस्त भी था, सम्राट अक्सर बुद्धि और ज्ञान के लिए बीरबल की सराहना करते थे। ये कई अन्य कहानियो, लोककथाओं और कथाओ की एक समृद्ध परंपरा का हिस्सा बन गए हैं।S.R. Sharma https://books.google.com/books?id=4j_VLlGqVSoC&pg=PA787 Mughal Empire in India: A Systematic Study Including Source Material 1 January 1999 Atlantic Publishers & Dist 978-81-7156-819-2 787 29 June 2013 https://web.archive.org/web/20131009013947/http://books.google.com/books?id=4j_VLlGqVSoC&pg=PA787 9 अक्तूबर 2013 live G. George Bruce Malleson https://books.google.com/books?id=GwSF6l59x88C&pg=PA131 Akbar and the Rise of the Mughal Empire Cosmo Publications 2001 978-81-7755-178-5 131, 160, 161 29 June 2013 https://web.archive.org/web/20131009014012/http://books.google.com/books?id=GwSF6l59x88C&pg=PA131 9 अक्तूबर 2013 live
इन्हें भी देखें
तेनाली रामा - कृष्णापंडित श्री राम आचार्य शर्मा
सन्दर्भ
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