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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

हाइपरनोवा

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जुलाई 2026thumb हाइपरनोवा (Hypernova), जिसे वैज्ञानिक भाषा में अति-ऊर्जावान सुपरनोवा भी कहा जाता है, ब्रह्मांड में होने वाला एक अत्यंत ही प्रचंड और शक्तिशाली तारकीय विस्फोट है। यह मूल रूप से एक सामान्य सुपरनोवा का ही एक अत्यधिक विनाशकारी और विशाल रूप है, लेकिन इसकी संचित ऊर्जा एक सामान्य सुपरनोवा विस्फोट से 10 से 100 गुना अधिक होती है। हाइपरनोवा विस्फोट तब होता है जब एक अत्यधिक विशाल तारा (जिसका द्रव्यमान हमारे सूर्य के द्रव्यमान से कम से कम 30 गुना या उससे अधिक हो) अपने जीवन के अंतिम चरण में पहुँचकर पूरी तरह से ढह जाता है। इस तरह के विस्फोट अंतरिक्ष में सबसे शक्तिशाली विद्युत चुंबकीय घटनाओं, यानी गामा-किरण विस्फोटों के प्राथमिक स्रोत माने जाते हैं।Garrido Rafael The Supernova-Hypernova Connection World Scientific 2003 978-9812384072 12-16"Explosion Mechanisms of Core-Collapse Supernovae"अगस्त 2026 InternetArchiveBot कार्यप्रणाली और 'कोलैप्सार मॉडल' हाइपरनोवा विस्फोट की चरम प्रकृति को समझाने के लिए खगोल भौतिकीविदों के बीच सबसे स्वीकृत सिद्धांत कोलैप्सार मॉडल है। जब एक विशाल वोल्फ-रेयेट तारा अपने कोर के परमाणु ईंधन को पूरी तरह समाप्त कर लेता है, तो कोर के भीतर दबाव कम हो जाता है और वह अपने ही गुरुत्वाकर्षण के कारण अत्यधिक तेज़ी से अंदर की ओर ढहने लगता है। चूंकि तारे का द्रव्यमान बहुत अधिक होता है, इसलिए यह ढहने वाला कोर न्यूट्रॉन तारा बनने के बजाय सीधे एक ब्लैक होल में बदल जाता है। ब्लैक होल बनने के तुरंत बाद, तारे के बाहरी आवरण का अवशिष्ट पदार्थ बहुत तेज़ी से घूमते हुए उस नवजात ब्लैक होल के अंदर गिरने लगता है, जिससे एक अत्यधिक गर्म 'एक्रीशन डिस्क' का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया में तीव्र चुंबकीय बलों और अत्यधिक घर्षण के कारण ब्लैक होल के दोनों ध्रुवों से प्रकाश की गति के करीब की गति वाले भारी ऊर्जा के प्रवाह निकलते हैं, जिन्हें सापेक्षकीय जेट कहा जाता है। ये जेट जब तारे के बाहरी गैसीय आवरण को चीरते हुए अंतरिक्ष में बाहर निकलते हैं, तो एक अकल्पनीय तीव्रता का हाइपरनोवा विस्फोट होता है।Woosley S. E. The Collapsar Model for Gamma-Ray Bursts https://archive.org/details/sim_astrophysical-journal_1993-03-01_405_1/page/273 The Astrophysical Journal 405 1993 273-282 10.1086/172437 गामा-किरण विस्फोट से संबंध हाइपरनोवा की खोज ने खगोल विज्ञान के एक सबसे बड़े रहस्य, यानी 'लंबे समय वाले गामा-किरण विस्फोटों' की गुत्थी को सुलझाने में मदद की। 1998 में, खगोलविदों ने एक ऐतिहासिक घटना देखी जिसे SN 1998bw नाम दिया गया। यह एक अत्यंत शक्तिशाली और चमकदार हाइपरनोवा विस्फोट था जो ठीक उसी समय और उसी स्थान पर हुआ जहाँ से एक तीव्र गामा-किरण विस्फोट दर्ज किया गया था। इस महत्वपूर्ण खोज ने पहली बार प्रत्यक्ष रूप से यह सिद्ध किया कि लंबे समय वाले GRBs वास्तव में ब्रह्मांड के सबसे बड़े तारों की मृत्यु यानी हाइपरनोवा विस्फोटों के कारण ही उत्पन्न होते हैं। जब ये सापेक्षकीय जेट सीधे पृथ्वी की दिशा में संरेखित होते हैं, तो हमारे अंतरिक्ष उपग्रह इन्हें तीव्र गामा-किरणों की बौछार के रूप में रिकॉर्ड करते हैं।Galama T. J. Vreeswijk P. M. An unusual supernova in the error box of the $\gamma$-ray burst of 25 April 1998 https://archive.org/details/sim_nature-uk_1998-10-15_395_6703/page/670 Nature 395 6703 1998 670-672 10.1038/27150 ब्रह्मांडीय महत्व और रासायनिक विकास सुपरनोवा की तरह ही, हाइपरनोवा भी ब्रह्मांड के रासायनिक विकास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके चरम तापमान और ऊर्जा के कारण, विस्फोट के दौरान नाभिकीय संश्लेषण की प्रक्रिया होती है, जिससे सोने, प्लैटिनम, यूरेनियम और लोहे जैसे भारी तत्वों का निर्माण होता है।"Multiwavelength observations of the extraordinary accretion event AT2021lwx" चूँकि हाइपरनोवा विस्फोट सामान्य सुपरनोवा से कहीं अधिक शक्तिशाली होते हैं, इसलिए वे इन भारी तत्वों को अंतरिक्ष में बहुत अधिक दूरी तक और बहुत बड़ी मात्रा में फैलाते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि प्रारंभिक ब्रह्मांड में बने सबसे पहली पीढ़ी के तारों की मृत्यु इसी तरह के हाइपरनोवा विस्फोटों के रूप में हुई थी, जिससे आने वाली पीढ़ियों के तारों और ग्रहों (जैसे हमारी पृथ्वी) के निर्माण के लिए आवश्यक रासायनिक तत्व उपलब्ध हो सके।Nomoto K. Maeda K. Hypernovae and Other Energetic Core-Collapse Supernovae Annual Review of Astronomy and Astrophysics 44 2006 507-566 10.1146/annurev.astro.44.051905.092337Explosions: Supernovae, Hypernovae, Magnetars, and Other Unusual Cosmic Blasts पृथ्वी के लिए संभावित खतरा यदि हमारी आकाशगंगा (मिल्की वे) के भीतर पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब (लगभग 6,500 प्रकाश-वर्ष के दायरे में) कोई हाइपरनोवा विस्फोट होता है और उसका गामा-किरण जेट सीधे पृथ्वी की ओर लक्षित होता है, तो यह पृथ्वी के वातावरण के लिए विनाशकारी हो सकता है। यह तीव्र विकिरण हमारी पृथ्वी की ओज़ोन परत को पूरी तरह से नष्ट कर सकता है, जिससे सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणें सीधे सतह तक पहुँच जाएँगी और पृथ्वी पर जीवन का सामूहिक विनाश हो सकता है। हालांकि, खगोलविदों के अनुसार वर्तमान में हमारे सौर मंडल के निकट ऐसा कोई तारा मौजूद नहीं है जो निकट भविष्य में हाइपरनोवा बनने की क्षमता रखता हो।Plait Philip Death from the Skies!: These Are the Ways the World Will End https://archive.org/details/deathfromskiesth0000plai Viking Penguin 2008 978-0670019977 85-92 सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ नासा (NASA) - उच्च-ऊर्जा खगोल विज्ञान और तारकीय विस्फोट श्रेणी:खगोल विज्ञान