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बिरसा मुंडा
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बिरसा मुंडाBirsa Munda 220px धरती आबा ग्राम-सिंजुड़ी टोला-बाहम्बा खुटकटी गांव-उलिहातु , राँची जिला, बंगाल प्रेसिडेंसी (अब खूँटी जिला, झारखंड) राँची, बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) सुगना मुंडा (पिता)करमी मुंडा (माता) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (मुंडा विद्रोह) भारतीय 15 नवम्बर 1875 से 9 जून 1900
बिरसा मुंडा (15 नवंबर 1875 - 9 जून 1900) एक भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और मुंडा जनजाति के लोक नायक थे। उन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान 19वीं शताब्दी के अंत में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में हुए एक आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए। भारत के आदिवासी उन्हें भगवान मानते हैं और धरती आबा नाम से भी जाना जाता है।https://www.bhaskar.com/news/mp-news-the-mausoleum-of-birsa-munda-in-ranchi-there-is-also-a-plane-area-in-his-name-vaskale-083042-5967235.html राँची में बिरसा मुंडा की समाधि,उनके नाम से विमान क्षेत्र भी है-वास्कले 2019-11-18 Dainik Bhaskar hi 2020-06-09news title without description
आरंभिक जीवन
thumb|Birsa Munda's song in Kurukh
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 के दशक में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम सुगना पुर्ती (मुंडा) और माता का नाम करमी पुर्ती (मुंडा) था। साल्गा गाँव में प्रारंभिक पढ़ाई के बाद वे चाईबासा (गोस्नर इवेंजेलिकल लुथरन चर्च) विद्यालय में पढ़ाई करने चले गए।
https://www.jagran.com/jharkhand/ranchi-jharkhand-remember-birsa-munda-on-his-death-anniversary-today-20369699.html Birsa Munda: आज भगवान बिरसा मुंडा को याद कर रहा झारखंड, समाधि स्थल पर लोगों ने दी श्रद्धांजलि Dainik Jagran hi 2020-06-09लिंक पर ब्योरा नही मिला।
आदिवासी विद्रोह के नायक बिरसा मुंडा
19वीं शताब्दी के अंत में अंग्रेजों ने कुटिल नीति अपनाकर आदिवासियों को लगातार जल-जंगल-जमीन और उनके प्राकृतिक संसाधनों से बेदखल करने लगे। हालाँकि आदिवासी विद्रोह करते थे, लेकिन संख्या बल में कम होने एवं आधुनिक हथियारों की अनुपलब्धता के कारण उनके विद्रोह को कुछ ही दिनों में दबा दिया जाता था। यह सब देखकर बिरसा मुंडा विचलित हो गए, और अंततः 1895 में अंग्रेजों की लागू की गई जमींदारी प्रथा और राजस्व-व्यवस्था के ख़िलाफ़ लड़ाई के साथ-साथ जंगल-जमीन की लड़ाई छेड़ दी। यह मात्र विद्रोह नहीं था। यह आदिवासी अस्मिता, स्वायतत्ता और संस्कृति को बचाने के लिए संग्राम था। पिछले सभी विद्रोह से सीखते हुए, बिरसा मुंडा ने पहले सभी आदिवासियों को संगठित किया फिर छेड़ दिया अंग्रेजों के ख़िलाफ़ महाविद्रोह 'उलगुलान'।
● आदिवासी पुनरुत्थान के जनक बिरसा मुंडा
धीरे-धीरे बिरसा मुंडा का ध्यान मुंडा समुदाय की गरीबी की ओर गया। आदिवासियों का जीवन अभावों से भरा हुआ था। और इस स्थिति का फायदा मिशनरी उठाने लगे थे और आदिवासियों को ईसाइयत का पाठ पढ़ाते थे। कुछ इतिहासकार कहते हैं कि गरीब आदिवासियों को यह कहकर बरगलाया जाता था कि तुम्हारे ऊपर जो गरीबी का प्रकोप है वो ईश्वर का है। हमारे साथ आओ हमें तुम्हें भात देंगे कपड़े भी देंगे।
उस समय बीमारी को भी ईश्वरी प्रकोप से जोड़ा जाता था।
20 वर्ष के होते होते बिरसा मुंडा वैष्णव धर्म की ओर मुड़ गए जो आदिवासी किसी महामारी को दैवीय प्रकोप मानते थे उनको वे महामारी से बचने के उपाय समझाते और लोग बड़े ध्यान से उन्हें सुनते और उनकी बात मानते थें। आदिवासी हैजा, चेचक, साँप के काटने बाघ के खाए जाने को ईश्वर की मर्जी मानते, लेकिन बिरसा उन्हें सिखाते कि चेचक-हैजा से कैसे लड़ा जाता है। वो आदिवासियों को धर्म एवं संस्कृति से जुड़े रहने के लिए कहते और साथ ही साथ मिशनरियों के कुचक्र से बचने की सलाह भी देते। धीरे धीरे लोग बिरसा मुंडा की कही बातों पर विश्वास करने लगे और मिशनरी की बातों को नकारने लगे। बिरसा मुंडा आदिवासियों के भगवान हो गए और उन्हें 'धरती आबा' कहा जाने लगा। लेकिन आदिवासी पुनरुत्थान के नायक बिरसा मुंडा, अंग्रेजों के साथ साथ अब मिशनरियों की आँखों में भी खटकने लगे थे। अंग्रेजों एवं मिशनरियों को अपने मकसद में बिरसा मुंडा सबसे बड़े बाधक लगने लगे।
https://satyagrah.scroll.in/article/107466/birsa-munda-ulgulan-story बिरसा मुंडा : जिनके उलगुलान और बलिदान ने उन्हें 'भगवान' बना दिया भारद्वाज अनुराग Satyagrah hi-IN 2020-06-09 https://web.archive.org/web/20190629021330/https://satyagrah.scroll.in/article/107466/birsa-munda-ulgulan-story 29 जून 2019 dead
भगवान बिरसा मुंडा की वीरता और संघर्ष से काफी प्रभावित होकर धरती आबा पर फिल्म बनाने की पूरी तैयारी पूरी कर ली गयी है। साल 2024 के मार्च महीने में भगवान बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू से फिल्म की शूटिंग शुरू करने की बात कही गई है।https://www.prabhatkhabar.com/state/jharkhand/bokaro/film-on-birsa-munda-shooting-will-in-ulihatu-khunti-from-march-2023-jbj भगवान बिरसा मुंडा पर बनेगी फिल्म, उलिहातू में होगी शूटिंग प्रभात खबर २२ मई २०२४
thumb|मुंडा विद्रोह
विद्रोह में भागीदारी और अंत
thumb|right|200px|बिरसा मुंडा की राँची में स्थित मूर्ति
● अंग्रेजो के षड्यंत्र के तहत पकड़ कर जहर दे दिया गया
मिशनरीओ ने छोटा नागपुर पठार के क्षेत्र में आदिवासी धर्मांतरण का जो सपना 19 वीं सदी में देखा था, उसमें बिरसा मुंडा सबसे बड़े बाधक बने। षड्यंत्र कर 3 मार्च को बिरसा मुंडा को पकड़ लिया गया। इसमें उनके किसी अपने ने ही 500 रुपये के लालच में उनके गुप्त ठिकाने के बारे में प्रसाशन को सबकुछ बता दिया। उनके साथ पकड़े गए लगभग 400 लोगों को कई धारा के अंतर्गत दोषी बनाया गया।https://www.bhaskar.com/bihar/patna/news/god-birsa-munda-remembered-on-death-anniversary-091006-4738093.html पुण्यतिथि पर याद किए गए भगवान बिरसा मुंडा 2019-06-10 Dainik Bhaskar hi 2020-06-09 https://web.archive.org/web/20190612002559/https://www.bhaskar.com/bihar/patna/news/god-birsa-munda-remembered-on-death-anniversary-091006-4738093.html 12 जून 2019 live
बिरसा पकड़े गए किंतु मई मास के अंतिम सप्ताह तक बिरसा और अन्य मुंडा वीरों के विरुद्ध केस तैयार नहीं हुआ था। क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की बहुत सी धाराओं में मुंडा पकड़े गया थे, लेकिन बिरसा जानते थे कि उन्हें सजा नहीं होगी। 9 जून की सुबह सुबह उन्हें उल्टियाँ होने लगी, कुछ ही क्षण में वो बंदीगृह में अचेत हो गए। डॉक्टर को बुलाया गया उसने बिरसा मुंडा की नाड़ी देखी, वो बंद हो चुकी थी।
इतिहासकार कहते हैं कि अंग्रेज जानते थे कि बिरसा मुंडा कुछ ही दिनों में छूट जाएंगे, क्यों कि उनपर लगाई गई धाराओं के अंतर्गत उनके ऊपर दोष साबित नहीं किया जा सकता। वो ये भी जानते थे कि बिरसा मुंडा छूटने के बाद विद्रोह को वृहद रूप देंगे और तब यह अंग्रेजों के लिए और घातक होगा। इसलिए उन्होंने उनके दातुन/पानी मे विषैला पदार्थ मिला दिया।
आज भी बिहार, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ और पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों में बिरसा मुंडा को भगवान की तरह पूजा जाता है।
thumb|बिरसा मुंडा को पकड़कर राँची कारागार ले जाया गया
बिरसा मुंडा की समाधि राँची में कोकर के निकट डिस्टिलरी पुल के पास स्थित है। वहीं उनका स्टेच्यू भी लगा है। उनकी स्मृति में राँची में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार तथा बिरसा मुंडा अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र भी है।https://www.jagran.com/jharkhand/ranchi-jel-aane-ke-do-maah-baad-hi-ho-gayi-thi-birsha-munda-ki-mrityu-20368772.html जेल में आने के दो माह बाद ही जेल में उन्हे खाना के बहना जहर खाकर बिरसा मुंडा की मृत्यु हो गया जागरण 10 नवंबर 2021 को भारत सरकार ने 15 नवंबर यानी बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की।https://www.thehindu.com/news/national/cabinet-okays-declaration-of-birsa-mundas-birth-anniversary-on-nov-15-as-janjatiya-gaurav-divas/article37418256.ece Cabinet okays declaration of Birsa Munda's birth anniversary on Nov 15 as Janjatiya Gaurav Divas Correspondent Special 2021-11-10 The Hindu 2022-11-14 en-IN 0971-751X
जनजातीय गौरव दिवस
भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 10 नवंबर 2021 को आयोजित बैठक में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करने के लिए बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को "जनजातीय गौरव दिवस" के रूप में घोषित किया है।इस दिन को भारत के एक वीर स्वतंत्रता सेनानी को याद किया जाता है। https://www.jagran.com/news/national-birsa-munda-birth-anniversary-will-be-celebrated-as-janjatiya-gaurav-diwas-22193851.html अब 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाई जाएगी बिरसा मुंडा की जयंती, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी Dainik Jagran hi 2023-02-13https://pib.gov.in/pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1772251 India celebrates Janjatiya Gaurav Divas pib.gov.in 2023-02-13 आज के मुंडा समुदाय के लोग जब भी कोई काम प्रारंभ करते हैं तो वह बिरसा मुंडा प्रारंभ करते हैं तो वह बिरसा मुंडा को याद और उनके बताए गए उपदेशों का पालन करते हैं जिससे उन्हें बहुत सहायता मिलती है आज बिरसा मुंडा का नाम पूरे भारत में प्रसिद्ध है
बिरसा मुंडा अमर हो गए।
1900ई को बिरसा मुंडा को गिरफ्तार कर लिया गया और रांची जेल में बिरसा की मृत्यु हैजे से हो गयी 'बिरसा मरे नहीं, अपितु अमर हो गए।
जब जब आदिवासी विद्रोह के बारे में हम बात करेंगे, बिरसा मुंडा का नाम प्रथम पंक्ति में लिया जाएगा।https://www.officiallylyra.com/2023/11/Birsa-munda-biography-in-hindi.html आज का इतिहास: आदिवासियों के भगवान बिरसा मुंडा की 148वीं जयंती अंग्रेजो ने स्लो पॉइजन देकर मार डाला जानें पूरा जीवन परिचय 15 नवंबर Officiallylyra.com hi 2023-11-15
संदर्भ
इन्हें भी देखें
मुंडा विद्रोह
मुंडा जनजाति
बिरसा मुंडा आदिवासी विश्वविद्यालय
बाहरी कड़ियाँ
बिरसा एक क्रांतिकारी थे, जिन्हें लोग पूजा करते हैं (प्रभासाक्षी)
अब भी अधूरी है शहीद बिरसा मुंडा का सपना
झारखण्ड के उलिहातू के बालक की बिरसा मुंडा (“धरती आबा”) बनने की कहानी
श्रेणी:आदिवासी
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श्रेणी:झारखंड
श्रेणी:१८७५ जन्म
श्रेणी:१९०० में निधन