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जय हो भ्रष्टाचार की
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जय हो भ्रष्टाचार की गाफिल स्वामी भारत हिंदी काव्य, भ्रष्टाचार निरुपमा प्रकाशन २०१२ प्रिंट (पेपरबैक) १२४ 978-93-81050-09-5
जय हो भ्रष्टाचार की निरुपमा प्रकाशन, मेरठ द्वारा प्रकाशित सुप्रसिद्ध कवि गाफिल स्वामी का काव्य संग्रह है। यह पुस्तक भ्रष्टाचार पर केन्द्रित है। काव्य कृति (जय हो भ्रष्टाचार की) किताब के लेखक कवि गाफिल स्वामी ने इस किताब के माध्यम से देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर समाज को नई दिशा की ओर मोड़ने का काम किया है। उनको इस कृति की रचना करने पर शब्द प्रवाह साहित्य मंच उज्जैन, मध्य प्रदेश द्वारा शब्द भूषण की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।http://www.jagran.com/uttar-pradesh/aligarh-city-10260243.html गाफिल स्वामी को मिली शब्द भूषण की उपाधि ३१ मार्च २०१३ दैनिक जागरण hi 21 नवंबर 2014 https://web.archive.org/web/20150119084110/http://www.jagran.com/uttar-pradesh/aligarh-city-10260243.html 19 जनवरी 2015 live
वर्तमान परिवेश में भ्रष्टाचार एक ऐसा मुद्दा है जो ढलान पर अनियंत्रित वाहन की तरह गति पकड चुका है। विषय विशेष पर इतना अधिक लिखना विरले लोग ही कर पाते हैं। इस पुस्तक के प्रकाशन से कवि ने सदियों तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। किसी कविता में कुछ अलग हटकर लिखा हो तो उस विशेष कविता की चर्चा अनिवार्य हो जाती है। लेकिन इस पुस्तक में प्रत्येक कविता विशेष होने के कारण किसी खण्डकाव्य का अर्क प्रतीत होती है। भ्रष्टाचार पर अंकुश असंभव सा लगता है।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
गाफिल स्वामी की कुण्डलिया
जय हो भ्रष्टाचार की-पुस्तक समीक्षा
ISBN 9789381050095
श्रेणी:काव्य
श्रेणी:हिन्दी साहित्य
श्रेणी:पुस्तकें