411 REFERENCE · Wikipedia
अखिल भारतीय हिन्दू महासभा
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
अंगूठाकार|१९५१/५२ के भारत के प्रथम लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने अखिल भारतीय हिन्दू महासभा को 'राष्ट्रीय दल' के रूप में मान्यता दी थी। इसे 'घोड़ा और घुड़सवार' चुनाव-चिह्न प्रदान किया गया था।
अंगूठाकार|अखिल भारत हिन्दू महासभा का ध्वज
अखिल भारत हिन्दू महासभा भारत का एक राजनीतिक दल था। इसकी स्थापना सन १९१५ में हुई थी और तब इसका नाम 'सर्वदेशक हिन्दू सभा' था। मदन मोहन मालवीय, लाला लाजपत राय और विनायक दामोदर सावरकर आदि प्रसिद्ध भारतीय स्वतन्त्रता सेनानी इसके अध्यक्ष रहे। केशव बलराम हेडगेवार इसके उपसभापति रहे। बालकृष्ण शिवराम मुंजे हिन्दू महासभा के सदस्य थे। वे सन १९२७-२८ में अखिल भारत हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रहे। स्वयंसेवक संघ को बनवाने में इनका बहुत योगदान था। संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के वे राजनितिक गुरु थे। भारत के स्वतन्त्रता के उपरान्त जब महात्मा गांधी की हत्या हुई तब इसके बहुत से कार्यकर्ता इसे छोड़कर भारतीय जनसंघ में भर्ती हो गये।डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा अखिल भारत हिन्दू महासभा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
स्थापना
भारत धर्म महामंडल भी देखें।
१९०५ से १९१५ तक
१९०५ के बंग भंग एवं १९०६ में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना के कारण हिन्दुओं का एक संगठन बनाने की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी। १९०९ में लाल चन्द और यूएन मुखर्जी ने पंजाब हिन्दू सभा की स्थापना की। अगले कुछ वर्षों में पंजाब के बाहर संयुक्त प्रान्त, बिहार, बंगाल, मध्य प्रान्त, बम्बई प्रेसिडेन्सी आदि में अनेक अन्य हिन्दू सभाएँ स्थापित कीं गयीं।
१९१० में कांग्रेस के इलाहाबाद अधिवेशन में इन सभी प्रान्तीय सभाओं के साथ एक राष्ट्रीय सभा बनाने की बात उठी। लाला बैज नाथ की अध्यक्षता में इसका संविधान बनाने के लिए एक समिति का गठन किया गया था, लेकिन इसमें कोई खास प्रगति नहीं हुई। इलाहाबाद में ही हिंदू नेताओं के एक अन्य सम्मेलन में भी 1910 में अखिल भारतीय हिंदू सभा की स्थापना की दिशा में प्रारंभिक कदम उठाया गया था, लेकिन गुटबाजी के कारण यह संगठन सक्रिय नहीं हो सका। 8 दिसंबर 1913 को पंजाब हिंदू सभा ने अपने अंबाला अधिवेशन में अखिल भारतीय हिंदू सभा बनाने का प्रस्ताव पारित किया। सम्मेलन में 1915 में हरिद्वार में कुंभ मेले के दौरान पूरे भारत के हिंदू नेताओं का एक आम सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया।हिन्दू महासभा का प्रारम्भिक इतिहास
हरिद्वार कुम्भ मेला (१९१५)
सन् 1915 में मदनमोहन मालवीय के नेतृत्व में हिंदू महासभा (सर्वदेशक हिन्दू समाज) की स्थापना की गई। सन् 1916 में अंबिकाचरण मजूमदार की अध्यक्षता में लखनऊ में कांग्रेस अधिवेशन हुआ। लखनऊ कांग्रेस ने मुस्लिम लीग से समझौता किया जिसके कारण सभी प्रान्तों में मुसलमानों को विशेष अधिकार और संरक्षण प्राप्त हुए। हिंदू महासभा ने सन् 1915 में हरिद्वार में कासिम बाजार के महाराजा मणीन्द्र चन्द्र नंदी की अध्यक्षता में अपना अधिवेशन करके कांग्रेस-मुस्लिम लीग समझौते तथा चेम्सफोर्ड योजना का तीव्र विरोध किया।
अंग्रेजों ने स्वाधीनता आंदोलन का दमन करने के लिए रौलट ऐक्ट बनाकर क्रांतिकारियों को कुचलने के लिए पुलिस और फौजी अदालतों को व्यापक अधिकार दिए। कांग्रेस की तरह हिंदू महासभा ने भी इसके विरुद्ध आंदोलन चलाया। उसी समय गांधी ने तुर्की के खलीफा को अंग्रेजों द्वारा हटाए जाने के विरुद्ध तुर्की के खिलाफत आंदोलन के समर्थन में भारत में भी खिलाफत आंदोलन चलाया।
सन् 1925 में कलकत्ता नगरी में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में हिंदू महासभा का अधिवेशन हुआ जिसमें प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता मुकुंदराव आनंदराव जयकर भी सम्मिलित हुए। सन् 1926 में देश में प्रथम निर्वाचन होने जा रहा था। अंग्रेजों ने असंबलियों में मुसलमानों के लिए स्थान सुरक्षित कर दिए। हिंदूमहासभा ने पृथक् निर्वाचन के सिद्धांत और मुसलमानों के लिए सीटें सुरक्षित करने की विरोध किया।
जब अंग्रेजों का साइमन कमीशन, रिफार्म ऐक्ट में सुधार के लिए भारत आया, तो हिंदू महासभा ने भी कांग्रेस के कहने पर इसका बहिष्कार किया। लाहौर में हिंदू महासभा के अध्यक्ष लाला लाजपत राय स्वयंसेवकों के साथ कमीशन के बहिष्कार के लिए एकत्र हुए। पुलिस ने लाठी प्रहार किया, जिसमें लाला को चोट आई और उनकी मृत्यु हो गई। ब्रिटिश सरकार ने लंदन में गोलमेज सम्मेलन आयोजित करके हिंदू, मुसलमान, सिक्ख आदि सभी के प्रतिनिधियों को बुलाया। हिंदू महासभा की ओर से डॉ॰ धर्मवीर, मुंजे, बैरिस्टर जयकर आदि सम्मिलित हुए। हिंदू महासभा ने सिंध प्रांत को बंबई से अलग करने का भी विरोध किया।
सावरकर का आगमन
सन् 1937 में जब हिन्दू महासभा काफी शिथिल पड़ गई थी और गांधी लोकप्रिय हो रहे थे, तब वीर सावरकर रत्नागिरि की नजरबंदी से मुक्त होकर आए। वीर सावरकर ने सन् 1937 में अपने प्रथम अध्यक्षीय भाषण में कहा कि हिंदू ही इस देश के राष्ट्रीय हैं और आज भी अंग्रेजों को भगाकर अपने देश की स्वतंत्रता उसी प्रकार प्राप्त कर सकते हैं, जिस प्रकार भूतकाल में उनके पूर्वजों ने शकों, ग्रीकों, हूणों, मुगलों, तुर्कों और पठानों को परास्त करके की थी। उन्होंने घोषणा की कि हिमालय से कन्याकुमारी और अटक से क़टक तक रहनेवाले वह सभी धर्म, संप्रदाय, प्रांत एवं क्षेत्र के लोग जो भारत भूमि को पुण्यभूमि तथा पितृभूमि मानते हैं, खानपान, मतमतांतर, रीतिरिवाज और भाषाओं की भिन्नता के बाद भी एक ही राष्ट्र के अंग हैं क्योंकि उनकी संस्कृति, परंपरा, इतिहास और मित्र और शत्रु भी एक हैं - उनमें कोई विदेशीयता की भावना नहीं है।
center|thumb|550px|यह समूह-फोटो १९४४ का है जब शिमोगा में विनायक दामोदर सावरकर राज्यस्तरीय हिन्दू महासभा सम्मेलन को उद्बोधित करने आये थे। इसमें सावरकर दूसरी पंक्ति में दाँये से चौथे स्थान पर बैठे हैं। हिन्दू महासभा के राज्य अध्यक्ष श्री भूपालम् चन्द्रशेखरैया सावरकर के बाँए बैठे हैं।
हिन्दू महासभा और पूर्ण स्वराज्य
हिंदू महासभा की कार्य समिति ने 19 नवंबर 1939 को बंबई में एक संकल्प परित किया । इस का संकल्प संख्या 2 इस प्रकार था:-
हिंदू महासभा की कार्यकारी समिति की यह बैठक डोमिनियन स्टेटस को अंतिम लक्ष्य के रूप में देखने से इनकार करती है, जैसा कि महामहिम वायसराय ने अपने वक्तव्य में आश्वासन दिया है। इसके बजाय, हम इस बात पर जोर देते हैं कि पूर्ण स्वराज्य के अंतिम लक्ष्य की ओर तत्काल कदम उठाया जाना चाहिए और युद्ध की समाप्ति के बाद, हर हाल में, भारत को डोमिनियन स्टेटस पर आधारित संविधान प्रदान किया जाना चाहिए। अभी भी सुधार का समय है। इस संबंध में एक स्पष्ट घोषणा ही भारत की ओर से जिम्मेदार और स्वेच्छापूर्ण सहयोग को प्रेरित कर सकती है।The All India Hindu Maha Sabha – Its Aims and Present Policy
कांग्रेस के साथ सम्बन्ध
1922 से हिंदू महासभा के अधिवेशन अधिकतर कांग्रेस के अधिवेशनों के साथ ही आयोजित होते थे। नरसिंह चिंतामण केलकर की अध्यक्षता में 1928 में हुआ जबलपुर अधिवेशन एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस अधिवेशन में सिन्ध को बॉम्बे प्रेसिडेन्सी से अलग करने के विचार के विरुद्ध भारी बहुमत से मतदान हुआ, जबकि मदन मोहन मालवीय ने सलाह दी थी कि महासभा को सीधे तौर पर इनकार करके समझौते को असंभव बनाने का कलंक अपने ऊपर नहीं लेना चाहिए, बल्कि "मद्रास कांग्रेस द्वारा नियुक्त उप-समिति की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।"
तब तक हिन्दू महासभा के नेता कांग्रेस द्वारा चलाई जा रही 'भारतीय' राजनीति में भाग लेते रहे थे। लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि वे वहाँ भी संसदीय और संवैधानिक गतिविधियों के पक्षधर तथा असहयोग नीति और गांधीवाद के विरुद्ध एक समूह के रूप में थे। कांग्रेस से हिन्दू महासभा का पहला अलगाव तब शुरू हुआ जब हिन्दू महासभा के नेताओं और अनुयायियों ने भारत के राजनीतिक संविधान के संबंध में कांग्रेस की "तुष्टीकरण नीति" को अस्वीकार कर दिया। यह मतभेद तब और स्पष्ट हो गया जब कांग्रेस ने सांप्रदायिक अधिनिर्णय (Communal Award) के प्रति तटस्थता का रुख अपनाया। यही मतभेद तब भी दिखाई दिया जब विधानसभाओं में नीति के संबंध में हिन्दू महासभा ने कांग्रेस के प्रत्याशियों के सामने महासभा के टिकट पर उम्मीदवार खड़े करने की आवश्यकता महसूस की। कई प्रांतों ,और विशेष रूप से संयुक्त प्रान्त में कांग्रेस सरकारों के कामकाज के वास्तविक अनुभव के बाद, संसदीय कार्यक्रम में कांग्रेस से पूर्ण अलगाव हो गया।
कांग्रेस द्वारा मंत्रालयों का त्याग करने, सैन्यीकरण विरोधी नीति अपनाने और अहिंसा के सिद्धांत के लिए सत्याग्रह करने के साथ ही हिंदू महासभा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मतभेद लगभग पूर्ण हो गया।
अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष
स्वतंत्रता से पहले
मणीन्द्र चन्द्र नन्दी (१३ अप्रैल, १९१५ (वैशाखी), प्रथम अध्यक्ष, हरिद्वार कुम्भ मेला)
मदन मोहन मालवीय (दिसम्बर, १९१५, बम्बई , विशेष अधिवेशन)
राजा रामपाल सिंह (१९१८, दिल्ली अधिवेशन)History of the Hindu Mahasabha
कासिमबाजार के महाराजा बहादुर (अप्रैल १९२१, हरिद्वार)
मदन मोहन मालवीय (१९२३, बनारस)
लाला लाजपत राय (१९२५ कोलकाता अधिवेशन)
राजा नरेन्द्र नाथ (१९२६, दिल्ली)
बाळकृष्ण शिवराम मुंजे (१९२७, पटना अधिवेशन)
नरसिंह चिंतामण केलकर (१९२८ जबलपुर अधिवेशन)
रामानन्द चट्टोपाध्याय (मार्च-अप्रैल, १९२९, सूरत)
चक्रवर्ती विजयराघवाचार्य (१९३१, अकोला)
नरसिंह चिंतामण केलकर (सितम्बर, १९३२ दिल्ली अधिवेशन)
भाई परमानन्द (अक्टूबर, १९३३ में, अजमेर अधिवेशन में )
भिक्षु उत्तम (अप्रैल, १९३५, कानपुर)
जगद्गुरु शंकराचार्य (अक्टूबर, १९३६, लाहौर)
विनायक दामोदर सावरकर (दिसम्बर, १९३७ ; अहमदाबाद से १९४२ तक)
श्यामाप्रसाद मुखर्जी (१९४३ – १९४६)
लक्ष्मण बलवन्त भोपटकर (१९४६ - १९४९)
स्वतंत्रता के बाद
डॉ० नारायण भास्कर खरे (१९४९ - १९५१ )
निर्मलचन्द्र चट्टोपाध्याय (१९५२ - ५५)
विष्णु घनश्याम देशपांडे (१९५६ - १९६०)
महन्त दिग्विजयनाथ (१९६१ - ६२)
नित्य नारायण बनर्जी (१९६३ - ६५)
वी जी हरदास (१९६६ - ६७)
विक्रम नारायण सावरकर (१९७० – ८६)
बालाराव सावरकर (१९८७ – ९१)
शिव सरन (१९९२ – ९४)
डीसी त्यागी (१९९५ – २००६)
चन्द्रप्रकाश कौशिक (२००६-२०२०)
डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा (२०२१ से अब तक)
अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के महत्वपूर्ण प्रस्ताव
हिन्दू महासभा के वार्षिक अधिवेशनों में पारित प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज का संगठन, हिन्दू समाज में आन्तरिक द्वन्द्व को कम करना, अन्धविश्वासों और कुरीतियों का अन्त करना, शुद्धि (हिन्दू धर्म में प्रत्यावर्तन) और हिन्दुओं राजनीतिक अधिकारों की सुरक्षा करना था।
शुद्धि और सामाजिक सुधार (1923–1925)
बनारस अधिवेशन (1923): इस अधिवेशन में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 'शुद्धि' आंदोलन को महासभा का मुख्य अंग बनाया गया। इसमें अस्पृश्यता के निवारण के लिए मसौदा प्रस्ताव तैयार किए गए और हिन्दू समाज के नियमों में संशोधन किया गया।
भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा (1923): आगरा में स्वामी श्रद्धानन्द के नेतृत्व में मलकाना राजपूतों की घर-वापसी का प्रस्ताव पारित किया गया, जिसे हिन्दू पुनर्जागरण का प्रमुख मोड़ माना जाता है।
साम्प्रदायिक अधिनिर्णय का विरोध (1932–1933)
अजमेर अधिवेशन (1933): भाई परमानन्द की अध्यक्षता में हिन्दू महासभा ने ब्रिटिश सरकार के 'सांप्रदायिक अधिनिर्णय' (Communal Award) का कड़ा विरोध किया। इस प्रस्ताव में इसे राष्ट्र-विरोधी और 'हिन्दुओं के हितों के विरुद्ध' बताया गया। महासभा ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'लीग ऑफ नेशंस' तक ले जाने का संकल्प लिया।
अस्पृश्यता निवारण और समानता (1935)
पूना अधिवेशन (दिसंबर 1935): मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में एक क्रांतिकारी प्रस्ताव पारित किया गया:
अस्पृश्यता का अंत: यह घोषित किया गया कि अस्पृश्यता हिन्दू धर्म या सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं है।
समान अधिकार: जन्म या जाति के आधार पर सभी भेदभावों को समाप्त करने और सार्वजनिक स्थानों (कुएं, स्कूल, मंदिर) पर सभी हिन्दुओं के समान अधिकार की अनुशंसा की गई।
हिन्दू राष्ट्र और राजनीतिक आत्मनिर्भरता (1937)
अहमदाबाद अधिवेशन (1937): वीर सावरकर के अध्यक्ष बनने के साथ महासभा ने 'हिन्दू राष्ट्र' की स्पष्ट परिभाषा का प्रस्ताव पारित किया। इसमें कांग्रेस की नीतियों को 'मुस्लिम-परस्त' बताते हुए हिन्दुओं के लिए एक स्वतंत्र राजनीतिक मार्ग और सैन्यीकरण (Militarisation) पर बल दिया गया।
संस्कृत, हिन्दी और देवनागरी का समर्थन
हिन्दू महासभा ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार एवं उसे भारत की राष्ट्रभाषा बनाने के लिये अनेक प्रस्ताव पारित किये। साथ ही संस्कृत और देवनागरी के प्रचार-प्रसार और अध्ययन-अध्यापन के लिये प्रयास करने का आह्वान किया।History of the Hindu Mahasabha
दिसंबर 1918 को दिल्ली के ५वें अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें ब्रिटिश सरकार से यह आग्रह किया गया कि वे जर्मनी के कब्जे से उन सभी संस्कृत पांडुलिपियों और प्राचीन भारतीय उपकरणों को वापस लाए और उन्हें भारत को सौंप दे, जो युद्ध के दौरान या उससे पहले वहां ले जाई गईं थीं।
मार्च १९२६ में दिल्ली में हुआ ९वाँ अधिवेशन में हिन्दी भाषा और देवनागरी लिपि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। इसमें अधिवेशन में महासभा ने सभी प्रांतों और उपनिवेशों के हिंदुओं से हिन्दी भाषा और देवनागरी लिपि सीखने का आग्रह किया। इसमें देवनागरी को इसलिए प्राथमिकता दी गई और कहा गया कि देवनागरी में ही अधिकांश हिन्दू शास्त्र लिखे गए हैं। हिन्दी को भारत की संपर्क भाषा (Lingua Franca) के रूप में प्रचारित किया गया। जहाँ हिन्दी मातृभाषा नहीं है, उन प्रांतों के हिंदुओं को निर्देश दिया गया कि वे अपना व्यापार और हिसाब-किताब हिन्दी और नागरी लिपि में ही रखें। प्रांतीय हिन्दू सभाओं से कहा गया कि वे अपने क्षेत्रों के प्राथमिक विद्यालयों में हिन्दू छात्र-छात्राओं को हिन्दी सिखाने के लिए पर्याप्त प्रबंध करें। लेखकों और प्रकाशकों से अनुरोध किया गया कि वे संस्कृत की पुस्तकों को प्रांतीय लिपियों के स्थान पर देवनागरी अक्षरों में ही प्रकाशित करें।
अक्टूबर 1936 के लाहौर अधिवेशन में श्री शंकराचार्य (डॉ. कुर्तकोटि) ने अपने संबोधन में भाषा की शुद्धता और राष्ट्रीयता पर बल दिया। उन्होंने जोर दिया कि भारत को हिन्दी को देश की 'लिंगुआ-इंडिका' (भारतभाषा) बनाने पर अडिग रहना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि हिन्दी में शामिल होने वाला हर विदेशी शब्द मूल हिन्दी पर्यायवाची शब्द के अस्तित्व को खत्म करता है। इसलिए, हिन्दी भाषा की शुद्धता पर जोर देना आवश्यक है क्योंकि राष्ट्र की संस्कृति उसकी भाषा से गहराई से जुड़ी होती है।
दिसंबर 1937 में अहमदाबाद अधिवेशन में वीर सावरकर ने अपने अध्यक्षीय भाषण में 'हिन्दुत्व' की परिभाषा स्पष्ट करते हुए हिन्दी और संस्कृत के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि संस्कृत और हिन्दी जैसी भाषाएँ हिन्दुओं को एक साझा सांस्कृतिक सूत्र में पिरोती हैं और देवनागरी लिपि इस पहचान का एक अनिवार्य हिस्सा है।
बौद्ध, जैन, सिख समन्वय
हिन्दू महासभा सिखों, जैनों और बौद्धों को हिन्दू समुदाय का अभिन्न अंग मानती थी। महासभा का मानना था कि सनातनी, बौद्ध, सिख, जैन और आर्यसमाजी सभी वास्तव में एक ही 'आर्य धर्म' की विभिन्न शाखाएँ या अंग हैं। महासभा ने एक ऐसी 'अखिल-हिन्दू चेतना' जागृत करने का प्रयास किया, जिससे सभी संप्रदाय और पंथ स्वयं को एक ही राष्ट्र, एक ही संस्कृति और एक ही मूल के बंधु मान सकें। महासभा का मुख्य उद्देश्य इन सभी उप-विभागों को एक साझा 'हिन्दू राष्ट्र' के ध्वज तले संगठित करना था, ताकि वे अपनी संख्यात्मक और राजनीतिक शक्ति को सुरक्षित रख सकें।
• सिखों के प्रति दृष्टिकोण: महासभा ने सिखों द्वारा अलग राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग का विरोध किया। राजा सर रामपाल सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सिखों को अलगाववाद की नीति नहीं अपनानी चाहिए, क्योंकि वे "हिन्दू हैं और हिन्दू ही रहेंगे"। 1923 के बनारस अधिवेशन में अकाली और उदासी दोनों सम्प्रदायों ने भाग लिया था।
1923 के ऐतिहासिक बनारस अधिवेशन में जैनों और प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु अनगारिक धर्मपाल ने पूरे उत्साह के साथ भाग लेकर हिन्दू एकता का परिचय दिया था।
• बौद्धों के साथ निकटता: महासभा बौद्धों के साथ 'निकट आत्मीयता' की पक्षधर थी। इसी दिशा में 1935 के कानपुर अधिवेशन में बर्मा के सुप्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु एवं स्वतंत्रता सेनानी ऊ उत्तम को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया। महासभा का यह स्पष्ट मत था कि भगवान बुद्ध महानतम हिन्दुओं में से एक थे और उन्होंने हिन्दू धर्म का कभी त्याग नहीं किया
चुनावों में हिन्दू महासभा का इतिहास
लोकसभा के चुनावों में
+ वर्ष लोकसभा चुनाव जीती गयीं सीटों की संख्या सीटों की संख्या में परिवर्तन Outcome Ref. १९५१ प्रथम लोक सभा4 489 #FF9933 4 विपक्ष मेंhttp://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=1&tab=15 Party-wise list of members of 1st Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 31 अक्टूबर 2020 https://web.archive.org/web/20201031155342/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=1&tab=15 live १९५७ द्वितीय लोक सभा2 494 #FF9933 2 विपक्ष मेंhttp://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=2&tab=14 Party-wise list of members of 2nd Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 1 अक्टूबर 2020 https://web.archive.org/web/20201001044337/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=2&tab=14 live १९६२ तृतीय लोक सभा1 494 #FF9933 1 विपक्ष मेंhttp://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=3&tab=13 Party-wise list of members of 3rd Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 31 अक्टूबर 2020 https://web.archive.org/web/20201031162746/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=3&tab=13 live १९६७ चौथी लोक सभा1 520 #FF9933 विपक्ष मेंhttp://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=4&tab=12 Party-wise list of members of 4th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 1 अक्टूबर 2020 https://web.archive.org/web/20201001051740/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=4&tab=12 live 1971 पाँचवीं लोक सभा0 518 #FF9933 1 -http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=5&tab=11 Party-wise list of members of 5th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 7 नवम्बर 2020 https://web.archive.org/web/20201107115912/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=5&tab=11 live 1977 छठी लोक सभा0 542 #FF9933 -http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=6&tab=10 Party-wise list of members of 6th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 6 दिसम्बर 2020 https://web.archive.org/web/20201206014950/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=6&tab=10 live 1980 सातवीं लोक सभा0 542 #FF9933 -http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=7&tab=9 Party-wise list of members of 7th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 5 नवम्बर 2020 https://web.archive.org/web/20201105034732/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=7&tab=9 live 1984 आठवीं लोक सभा0 533 #FF9933 -http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=8&tab=8 Party-wise list of members of 8th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 7 नवम्बर 2020 https://web.archive.org/web/20201107115915/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=8&tab=8 live 1989 नौंवीं लोक सभा1 545 #FF9933 1 विपक्ष मेंhttp://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=9&tab=7 Party-wise list of members of 9th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1991 दसवीं लोक सभा0 545 #FF9933 1 -http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=10&tab=6 Party-wise list of members of 10th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 6 नवम्बर 2020 https://web.archive.org/web/20201106062718/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=10&tab=6 live 1996 ग्यारहवीं लोक सभा0 545 #FF9933 -http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=11&tab=5 Party-wise list of members of 11th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 31 अक्टूबर 2020 https://web.archive.org/web/20201031162538/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=11&tab=5 live 1998 बारहवीं लोक सभा0 545 #FF9933 -http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=12&tab=4 Party-wise list of members of 12th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 22 अक्टूबर 2020 https://web.archive.org/web/20201022054613/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=12&tab=4 live 1999 तेरहवीं लोक सभा0 545 #FF9933 -http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=13&tab=3 Party-wise list of members of 13th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 6 दिसम्बर 2020 https://web.archive.org/web/20201206011115/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=13&tab=3 live 2004 चौदहवीं लोक सभा0 543 #FF9933 -http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=14&tab=2 Party-wise list of members of 14th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 2009 पंद्रहवीं लोक सभा0 543 #FF9933 -http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=15&tab=1 Party-wise list of members of 15th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 31 अक्टूबर 2020 https://web.archive.org/web/20201031161956/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=15&tab=1 live 2014 सोलहवीं लोक सभा0 543 #FF9933 -http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=16&tab=0 Party-wise list of members of 16th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 26 अक्टूबर 2020 https://web.archive.org/web/20201026015744/http://loksabhaph.nic.in/Members/partyar.aspx?lsno=16&tab=0 live 2019 सत्रहवीं लोक सभा0 543 #FF9933 -http://loksabhaph.nic.in/Members/PartywiseList.aspx Party-wise list of members of 17th Lok Sabha loksabhaph.nic.in 1 नवम्बर 2020 17 नवम्बर 2020 https://web.archive.org/web/20201117214334/http://loksabhaph.nic.in/Members/PartywiseList.aspx live 2024 अठारहवीं लोक सभा0 543 #FF9933 -
राज्यों के चुनावों में
विधानसभा के चुनाव का इतिहास
वर्ष लड़ी गयी सीटों की संख्या जीती गयी सीटों की संख्या +/- प्राप्त मतों की संख्या मत-प्रतिशत (%) +/- (%) परिणाम उत्तर प्रदेश19691 425 Hindu Mahasabha 167,807 0.29%अन्य१९७४1 424 Hindu Mahasabha 81,829 0.30%अन्य सन् 1977, 1980, 1985, 1989, 1991, 1993, 1996 के चुनावों में हिन्दू महासभा ने चुनाव में भाग लिया लेकिन कोई भी सीट पर जीत नहीं मिली।20021 403 Hindu Mahasabha 1 अन्य सन् 2007, 2012, 2017, 2022 हिन्दू महासभा ने चुनाव लड़ा लेकिन कोई सीट नहीं जीती। कर्नाटक199910 224 Hindu Mahasabha 02530.001%कोई नहींhttps://eci.gov.in/files/file/3781-karnataka-1999/ Karnataka 1999 20 अगस्त 2018 11 मई 2023 2 मार्च 2020 https://web.archive.org/web/20200302100502/https://eci.gov.in/files/file/3781-karnataka-1999/ live 2004 चुनाव में भाग नहीं लिया 200860 224 Hindu Mahasabha023200.01%कोई नहींhttps://eci.gov.in/files/file/3783-karnataka-2008/ Karnataka 2008 20 अगस्त 2018 11 मई 2023 12 अप्रैल 2023 https://web.archive.org/web/20230412105342/https://eci.gov.in/files/file/3783-karnataka-2008/ live 201310 224 Hindu Mahasabha03450.001%कोई नहींhttps://eci.gov.in/files/file/3784-karnataka-2013/ Karnataka 2013 20 अगस्त 2018 11 मई 2023 22 अक्टूबर 2019 https://web.archive.org/web/20191022140739/https://eci.gov.in/files/file/3784-karnataka-2013/ live 201870 224 Hindu Mahasabha028400.01%कोई नहींhttps://eci.gov.in/files/file/6933-karnataka-2018/ Karnataka 2018 20 सितंबर 2018 11 मई 2023 27 अक्टूबर 2021 https://web.archive.org/web/20211027040352/https://eci.gov.in/files/file/6933-karnataka-2018/ live 202360 224 Hindu Mahasabha
इन्हें भी देखें
मदन मोहन मालवीय
बाळकृष्ण शिवराम मुंजे
विनायक दामोदर सावरकर
हिन्दू महासभा (फिजी)
विश्व हिन्दू परिषद
आर्य समाज
बाहरी कड़ियाँ
अखिल भारतीय हिन्दू महासभा का जालघर https://web.archive.org/web/20260517110708/https://www.abhm.org.in/about.aspx 17 मई 2026
सन्दर्भ
सन्दर्भ
श्रेणी:भारत के राजनीतिक दल
श्रेणी:हिन्दू संगठन