Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

बाँकीदास आसिया

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

कविराज बाँकीदास आसिया श्री Kaviraja Bankidas Asiya.jpg बाँकीदास आसिया का चित्र कविराज बाँकीदास आसिया, मारवाड़ के राजकवि 1771 भंडियावास, बाड़मेर, राजस्थान 1833 जोधपुर मारवाड़ राज्य राजस्थानी साहित्य एवं भाषा बाँकीदास री ख्यात, बाँकीदास ग्रन्थावली https://www.charans.org/bankidas-asia/ कविराज बाँकीदास आसिया (1771–1833) राजस्थानी भाषा के कवि, इतिहासकर एवं विद्वान थे। बांकीदास डिंगल, पिंगल, संस्कृत, फारसी आदि भाषाओं के ज्ञाता थे। आशु कवि के रूप में इनकी प्रसिद्धि पूरे राजपुताना में थी। वे इतिहास को वार्ता द्वारा व्यक्त करने में प्रवीण थे। बांकीदास में स्वाभिमान और निर्भीकता के गुण विद्यमान थे। उन्होंने राजकुमार छतरसिंह को शिक्षा देने में असमर्थता व्यक्त कर दी, क्योंकि वह अयोग्य था। इन्होने महाराजा मानसिंह के को नाथ सम्प्रदाय के बढ़ते हुए प्रभाव के प्रति आगाह किया, जिससे मानसिंह क्रोधित हो गया। स्वाभिमानी बांकीदास ने जोधपुर छोड़ दिया, जिसे महाराजा ने ससम्मान वापस बुलवाया। बाँकीदास का जन्म आसिया शाखा के चारण वंश में 1771 में हुआ। रामपुर के ठाकुर अर्जुनसिंह ने बांकीदास की शिक्षा का प्रबन्ध जोधपुर में किया। यहाँ बांकीदास जोधपुर के महाराजा मानसिंह के गुरु देवनाथ के सम्पर्क में आए, जिन्होंने इनका परिचय मानसिंह से कराया। मानसिंह ने इनकी विद्वता से प्रसन्न होकर प्रथम भेट में ही इन्हें १ लाख पसाव पुरस्कार से सम्मानित किया। 19 जुलाई 1833 को जोधपुर में बांकीदास की मृत्यु हो गई। कृतियाँ सन १८३० से १८३३ के बीच इन्होने अनेक ग्रन्थों की रचना की। उनके द्वारा लिखे गये 36 काव्य ग्रंथ प्राप्त हैं जिनमें सूर छतीसी, गंगालहरी, वीर विनोद आदि प्रमुख हैं। किन्तु बांकीदास की महत्वपूर्ण कृति ख्यात है। 1956 ई में नरोत्तम दास स्वामी ने बांकीदास की ख्यात को प्रकाशित किया। ख्यात दो प्रकार से लिखी हुई प्राप्त होती हैं- संलग्न और फुटकर ख्यात। प्रथम प्रकार की ख्यात में विषय क्रमबद्ध और निरन्तर रहता हैं, जबकि द्वितीय प्रकार की ख्यात में विषय अलग-अलग और बातों के रूप में मिलता है। बांकीदास की ख्यात में लिखी ऐतिहासिक बाते संक्षिप्त लिपि अथवा तार की संक्षिप्त भाषा के समान लिखी हुई वृहद विषय की सूचना स्रोत हैं। इनकी ख्याल में कुल बातों की संख्या 2776 हैं। इन बातों से राजस्थान के इतिहास के साथ पड़ौसी राज्यों के इतिहास सम्बन्धी तथा मराठा, सिक्ख, जोगी, मुसलमान, फिरंगी आदि की ऐतिहासिक सूचनाएं प्राप्त होती हैं. सर्वाधिक विवरण मारवाड़ एवं देश के अन्य राठौड़ राज्यों के सम्बन्ध में हैं। मेवाड़ की राजनीतिक घटनाओं का वर्णन भी ख्यात में मिलता है। गहलोतों के साथ ही यादवों की बात, कछवाहों की बात, पड़िहारों की बात, चौहानों की बात में अलग-अलग राज्य के इतिहास वृतांतों की सूचनाएं संग्रहित हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न जातियों, धार्मिक तथा फुटकर विषयक बातों के साथ साथ भौगोलिक बातों का समावेश ख्यात की मुख्य विशेषता है। वस्तुतः बांकीदास की ख्यात इतिहास का खजाना हैं। उनके द्वारा रचित प्रमुख ग्रन्थ निम्नलिखित हैं- मोहा मर्दाना अन्योक्ति पञ्चाशिका कृपण दर्पण मवादिया मिजाज चुगल मिखा चपेतिका वैश वार्ता -- वेश्यावृत्ति की निन्दा में काव्य विदुर बतीसी दुहा अयासजी महाराज देवनाथ रा झमला ठाकुरन रूपसिंह जी रा सन्तोष बावनी धवल पचीसी नीति मञ्जरी गंगालहरी बाँकीदास की ख्यात ख्यात-साहित्य में वांकीदास की ख्यात का स्थान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। बांकीदास-री ख्यात अन्य 'ख्यातों' की तरह केवल एक राजा या वंश का वर्णन नहीं है बल्कि इसमें लगभग २००० ऐतिहासिक घटनाओं का सग्रह है। इसमें केवल राजस्थान के ही नहीं, बल्कि दिल्ली के सुल्तानों, मुगलों और भारत के अन्य राज्यों के इतिहास की भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं। इसमें तत्कालीन सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थितियों का भी विवरण है। अतः यह ग्रंथ 18वीं और 19वीं शताब्दी के भारत, विशेषकर राजपूताना के इतिहास को समझने के लिए एक प्रामाणिक और बहुआयामी स्रोत माना जाता है। यह ख्यात मुख्य रूप से डिंगल (राजस्थानी) और पुरानी हिंदी के मिश्रण में लिखी गई है। इसकी शैली संक्षिप्त और विवरणात्मक है। बाँकीदास अपनी देशभक्ति के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने 'आयो अंग्रेज मुलक रे ऊपर' जैसे गीतों के माध्यम से ब्रिटिश आधिपत्य का विरोध किया था, जिसका प्रभाव उनकी लेखन दृष्टि पर भी दिखता है। सन्दर्भ इन्हें भी देखें राजस्थानी भाषा डिंगल पिंगल चारण बाहरी कड़ियाँ बाँकीदास ग्रन्थावली बाँकीदास री ख्यात बाँकीदास की ख्यात ( पूरा ग्रन्थ) श्रेणी:राजस्थानी कवि श्रेणी:चारण