Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

कुलधरा

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

कुलधरा कुलधारा hi कुलधर गाँव Kuldhara.JPG उजड़े हुए कुलधरा के घर India Rajasthan#India कुलधरा की स्थिति राजस्थान ,भारत 26.81 70.80 inline,title देश भारत राज्य राजस्थान ज़िला जैसलमेर Metric 266 आईएसटी +5:30 thumb|250px|कुलधरा गांव thumb|कुलधर के मंदिर के अंदर एक स्तंभ पर शिलालेख कुलधरा या कुलधर (Kuldhara or Kuldhar) भारतीय राज्य राजस्थान के जैसलमेर ज़िले में स्थित है एक शापित और रहस्यमयी गाँव है जिसे भूतों का गाँव (Haunted Village) पत्रिका Kuldhara Village - A true story of haunted village-एक लड़की की ... http://www.patrika.com/feature/dus-ka-dum-landing-page/kuldhara-village-a-true-story-of-haunted-village-1001125/ 9 जनवरी 2017 https://web.archive.org/web/20170109190108/http://www.patrika.com/feature/dus-ka-dum-landing-page/kuldhara-village-a-true-story-of-haunted-village-1001125/ 9 जनवरी 2017 live भी कहा जाता है। इस गाँव का निर्माण लगभग १३वीं शताब्दी में पालीवाल ब्राह्मणों ने किया था। लेकिन यह १९वीं शताब्दी में घटती पानी की आपूर्ति के कारण पूरा गाँव नष्ट हो गया, लेकिन कुछ किवदंतियों के अनुसार इस गाँव का विनाश जैसलमेर के राज्य मंत्री सलीम सिंह के कारण हुआ था। सलीम सिंह जो जैसलमेर के एक मंत्री हुआ करते थे, वो गाँव पर काफी सख्ती से पेश आता था इस कारण सभी ग्रामवासी लोग परेशान होकर रातोंरात गाँव छोड़कर चले गए साथ ही श्राप भी देकर चले गए इस कारण यह शापित गाँव भी कहलाता है।न्यूज़ १८ ये हैं देश का सबसे डरावना गांव, जो गया वो अकेला http://hindi.news18.com/news/city-khabrain/india-9-baje-rajasthan-village-kuldhara-haunted-499215.html 9 जनवरी 2017 २०१६ https://web.archive.org/web/20170109184740/http://hindi.news18.com/news/city-khabrain/india-9-baje-rajasthan-village-kuldhara-haunted-499215.html 9 जनवरी 2017 dead यह गाँव अभी भी भूतिया गाँव कहलाता है लेकिन अभी राजस्थान सरकार ने इसे पर्यटन स्थल का दर्जा दे दिया है,इस कारण अब यहां रोजाना हज़ारों की संख्या में देश एवं विदेश से पर्यटक आते रहते है।दैनिक भास्कर भूत प्रेत व आत्माओं पर रिसर्च करने वाली टीम ने ... http://www.bhaskar.com/news/c-10-1597275-NOR.html १२ दिसम्बर २०१६ २०१३ https://web.archive.org/web/20170109184019/http://www.bhaskar.com/news/c-10-1597275-NOR.html 9 जनवरी 2017 liveअमर उजाला haunted villige kuldhara rajasthan http://www.amarujala.com/news/astrology/mystery/haunted-villige-kuldhara-rajasthan/ १२ दिसम्बर २०१६ https://web.archive.org/web/20160302171242/http://www.amarujala.com/news/astrology/mystery/haunted-villige-kuldhara-rajasthan/ 2 मार्च 2016 live भौगोलिक स्थिति यह स्थान (पूर्व ग्राम) जैसलमेर नगर से १८ किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह गाँव ८६१ मी॰ x २६१ मी॰ के उत्तर-दक्षिण आयताकार क्षेत्र में फैला हुआ था। यह गाँव माता-रानी के मन्दिर को केन्द्र में रखकर उसके चारों और फैला हुआ था। इसमें तीन उत्तर-दक्षिण मार्ग थे जो विभिन्न स्थानों पर पूर्व-पश्चिम की पतली गलियों द्वारा मिलते थे।रेज़वी 1995 312 इस स्थान की अन्य दीवारें उत्तर एवं दक्षिण से देखी जा सकती हैं। ग्राम के पूर्वी भाग में छोटी ककणी नदी के रूप में एक सूखी नदी है। पश्चिमी भाग मानव निर्मित कृतियों की दीवारों से सुरक्षित है।रेज़वी 1995 312 स्थापना कुलधरा गाँव मूल रूप से पाली से जैसलमेर विस्थापित ब्राह्मणों द्वारा बसाया गया।रेज़वी 1995 313 पाली मूल के इन लोगों को पालीवाल कहा जाता है। लक्ष्मी चन्द द्वारा रचित १८९९ की इतिहास की पुस्तक तवारिख-ए-जैसलमेर के अनुसार कधान नामक पालीवाल ब्राह्मण कुलधरा गाँव में बसने वाला प्रथम व्यक्ति थे। उन्होंने गाँव में उधानसर नामक एक तालाब खोदा।रेज़वी 1995 312 गाँव के खंडहरों के बीच विभिन्न देवलीयों (स्मारक पत्थर) सहित ३ श्मशान घाट हैं।रेज़वी 1995 315 देवली शिलालेखों के अनुसार, गाँव की स्थापना १३वीं सदी के पूर्वार्द्ध में हुई। ये शिलालेख भट्टिक संवत् (एक पंचांग पद्धति जो ६२३ ई॰ से आरम्भ होती है) में दिनांकित हैं और दो निवासियों के निधन के रूप में क्रमशः १२३५ ई॰ और १२३८ ई॰ अंकित हैं।रेज़वी 1995 313-314 जनसांख्यिकीय जनसंख्या गाँव में अब ४०० खण्डहर घर देखे जा सकते है, जिसमें अब वर्तमान में कोई नहीं रहता है किन्तु किंवदन्तियों के अनुसार यहाँ भूत रहते है। लक्ष्मी चन्द द्वारा रचित इतिहास ग्रन्थ तवारीख-ए-जैसलमेर (१८९९) जिसमें लिखा गया है कि यहां पालीवाल ब्राह्मण जाति के लोग रहते थे। जबकि ऱेजवी के मुताबिक यहाँ १७वीं १८ वीं शताब्दी में कुलधरा गाँव में तकरीबन १५८८ लोग रहते थे। एक ब्रिटिश अधिकारी जेम्स टॉड के अनुसार यहां की जनसंख्या १८१५ ईस्वी में कुल ८०० ही थी जिसमें २०० परिवार थे। सामाजिक समूह वहां काफी अन्य देवाली अभिलेख ( अथवा शिलालेख) हैं। ये अभिलेख पालीवाली शब्द का उल्लेख नहीं करते। ये अभिलेख यहाँ के निवासियों को ब्राह्मण बताया हैं। काफी अभिलेख इन निवासियो को कुलधर या कलधर जाति का बताते हैं। ऐसा प्रतीत होता हैं कि पालीवाल ब्राह्मणों में कुलधर एक जाति समूह था, और इन्हीं के नाम पर गांव का नाम पड़ा। कुछ अभिलेख इन निवासियों के जाति और गोत्र का भी उल्लेख करते हैं। अन्य जातियां जिनका अभिलेख में उल्लेख हैं, वें हैं - हरजल, हरजलु, हरजलुनी, मुगदल, जिसुतिया, लोहार्थी, लहठी, लखर, सहारन, जग, कलसर और महाजलार। गोत्र जिनका उल्लेख हैं वें हैं, असमर, सुतधाना, गर्गवी, और गागो। एक अभिलेख गोनाली के रूप में एक ब्राह्मण के कुल (परिवार की वंशावली) का उल्लेख करता हैं। पालीवाल ब्राह्मण के आलावा एक अभिलेख दो सूत्रधार (शिल्पकार) का उल्लेख करता हैं, जिनका नाम धन्मग और सुजो गोपालना हैं। ये अभिलेख दर्शाते हैं कि, ब्राह्मण निवासी ब्राह्मण समाज में ही शादी (सगोत्री विवाह) करते थे, जबकि जातियां दूसरे गोत्र में विवाह करती थी। संस्कृति धर्म कुलधरा गाँव के लोग वैष्णव धर्म के थे। इस गाँव का मुख्य मन्दिर विष्णु भगवान और महिषासुर मर्दिनी का है। हालाँकि ज्यादातर मूर्तियां गणेश जी की भी है जो प्रवेश द्वार पर प्रदर्शित है। गाँव के लोग विष्णु ,महिषासुर मर्दिनी और गणेश जी के अलावा बैल और स्थानीय घोड़े पर सवार देवता की भी पूजा करते थे। वेशभूषा कुलधरा गाँव में लोग जिसमें पुरुष लोग मुग़लिया अंदाज की पगड़ी अथवा साफा पहनते थे जबकि पजामा भी पहनते थे साथ ही कमर पर कमरबंध (belt) बांधते थे। इनके अलावा कंधे पर अंगरखा (जो एक बड़ा परिधान होता है ,जिसे रुमाल भी कह सकते है) भी रखते थे। पुरुष लोग इन सब के अलावा गले में कुछ हार भी पहनते थे। महिलाएं मुख्यतः लहँगे पहनती थी जबकि अंगरखा ये महिलाएं भी रखती थी, साथ ही गले में कुछ हार भी पहना करती थी। अर्थव्यवस्था कुलधरा गाँव के लोग ज्यादातर कृषि का व्यापार ,बैंकरों का कार्य और किसान हुआ करते थे ,साथ ही मिट्टी के बर्तन भी बनाया करते थे ,ये अलंकृत बर्तनों का इस्तेमाल करते थे ,जो (fine clay) के बनाए जाते थे।ऱेजवी 1995 320 वे जलसंचय के लिए खड़ीन का इस्तेमाल करते थे जो एक कृत्रिम निचाई वाला हिस्सा होता था जिसके तीन ओर बाँध बना दिये जाते थे। जब खड़ीन का पानी सूख जाता तो पीछे बची मिट्टी ज्वार ,गेहूँ और चने की फसल के लिए अनुकूल होती। एक २.५ किलोमीटर लंबी और २ किलोमीटर चौड़ी खड़ीन कुलधरा के दक्षिण दिशा में मौजूद थी।ऱेजवी 1995 322 खेती करने में गाँव के लोग ककनी नदी या काकनी नदी (Kakni River) और कुछ कुओं से पानी सींचते थे। ककनी नदी जो शाखाओं में विभाजित थीं ,एक जिसे "मसुरड़ी नदी" कहा जाता था ,और दूसरी जो कि एक नाली के रूप में थी। ककनी नदी जो कि एक मौसमी नदी है जब यह सूख जाती थी तब गाँव के लोग घरों से दूर बने कुओं से पानी लेकर आते थे। एक स्तम्भ शिलालेख से पता चलता है कि गाँव में तेजपाल नाम का एक ब्राह्मण हुआ करता था, जिसने एक बावड़ी का निर्माण करवाया था। यह ब्राह्मण कुलधरा गाँव का ही रहने वाला था।ऱेजवी 1995 321-322 किंवदन्ती कुछ लोगों का मानना है कि यहां पानी की समस्या के कारण लोग गाँव छोड़कर नहीं गए बल्कि जैसलमेर राज्य के मंत्री सलीम सिंह के अत्याचार के कारण गए थे। किंवदंतियों के अनुसार यहां पर काफी संख्या में लोग रहा करते थे जिसमें एक मुखिया भी हुआ करता था ,मुखिया की एक सुंदर पुत्री भी थी यह बात कुलधरा गाँव से बाहर निकली और जैसलमेर राज्य तक पहुंची। जब इसका पता सलीम सिंह को चला तो वह उस सुंदर कन्या पर रूप मोहित हो गया इस कारण उसने गाँव वालों पर दबाव बनाने लगा। सलीम सिंह चाहता था कि वह मुखिया की पुत्री से शादी करे लेकिन गाँव वाले कतई नहीं चाहते थे ब्राह्मण समाज का नाम छोटा पड़े। इस कारण गाँव के मुखिया ने एक रात सभा बुलाई और सभी ने फैसला लिया कि हम लोग रातों रात यह गाँव छोड़कर चले जाएंगे ,अन्यथा यह गाँव की कन्या से शादी कर लेगा । फिर एक रात सभी गांववाले पूरा गाँव को छोड़कर किसी दूसरे गाँव में चले गए। लोगों का कहना है कि ये गाँव वाले जाते -जाते यह श्राप भी देकर गए थे कि यहाँ फिर कोई नहीं बस पायेगा इसलिए वर्तमान में यह राजस्थान के जैसलमेर का गाँव एक शापित गाँव कहलाता है। पर्यटन स्थल पूर्व में इस गाँव में घूमने अमर उजाला 200 सालों से विरान एक गांव, जहां रात में जाना मना है http://www.amarujala.com/news-archives/astrology-archives/haunted-villige-kuldhara-rajasthan 9 जनवरी 2017 २०१४ https://web.archive.org/web/20170110014856/http://www.amarujala.com/news-archives/astrology-archives/haunted-villige-kuldhara-rajasthan 10 जनवरी 2017 live जाने के लिए के अनुमति नहीं थी ,क्योंकि इस गाँव को भूतिया गाँव कहा जाता है लोगों के अनुसार यहां भूत रहते है। लेकिन एक श्राप ने बदल दी कुलधरा की तकदीर http://hindi.speakingtree.in/allslides/secret-of-haunted-kuldhara-village स्पीकिंग ट्री 9 जनवरी 2017 https://web.archive.org/web/20170109194649/http://hindi.speakingtree.in/allslides/secret-of-haunted-kuldhara-village 9 जनवरी 2017 dead अभी राजस्थान सरकार ने यह दावा किया है कि यहाँ कोई भूत नहीं रहते है इसलिए सभी के लिए खोल दिया है और 200 साल पुराने प्राचीन गांव कुलधरा की बदलेगी http://hindi.eenaduindia.com/States/West/Rajasthan/OthersInRajasthan/2016/09/08133456/renovation-of-kuldhara-village-started-in-jaisalmer.vpf ईनाडुइंडिया 9 जनवरी 2017 https://web.archive.org/web/20170109185559/http://hindi.eenaduindia.com/States/West/Rajasthan/OthersInRajasthan/2016/09/08133456/renovation-of-kuldhara-village-started-in-jaisalmer.vpf 9 जनवरी 2017 dead पर्यटन स्थल का दर्जा दिया गया है। इस कारण अब यहां हज़ारों की संख्या में लोग घूमने आते है। यहाँ स्थानीय लोग ही नहीं अपितु देश एवं विदेश से भी आते है।राजस्थान टूरिज़्म कुलधरा: राजस्थान के जैसलमेर का एक रहस्यमयी गाँव - राजस्थान टूरिज़्म http://tourism.rajasthan.gov.in/jaisalmer/38/kuldhara 9 जनवरी 2017 https://web.archive.org/web/20161223041932/http://tourism.rajasthan.gov.in/jaisalmer/38/kuldhara 23 दिसंबर 2016 dead सन्दर्भ 3 सन्दर्भ ग्रंथ रेज़वी एस॰ अली नदीम https://archive.org/stream/TheMedievalSiteOfKuldharaInJaisalmer/KuldharaSocEconImplications#page/n0/mode/2up Kuldhara in Jaisalmer State — Social and Economic Implications of the remains of Medieval Settlement भारतीय इतिहास कांग्रेस की कार्यवाही, ५६वाँ सत्र रबिन्द्र भारती कलकत्ता 1995 312–338 अंग्रेज़ी बाहरी कड़ियाँ कुलधरा: राजस्थान पर्यटन श्रेणी:जैसलमेर के दर्शनीय स्थल श्रेणी:राजस्थान के गाँव श्रेणी:जैसलमेर ज़िले के गाँव