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411 समाचार
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फ़िरोज़ाबाद

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फ़िरोज़ाबाद Firozabad Firozabad UP 2.jpg फ़िरोज़ाबाद का महावीर दिगाम्बर जैन मंदिर फ़िरोज़ाबाद India Uttar Pradesh 27.15 78.42 inline, title उत्तर प्रदेश में स्थिति ज़िला फ़िरोज़ाबाद ज़िला राज्य उत्तर प्रदेश देश 604214 2011 भाषाएँ प्रचलित हिन्दी भारतीय मानक समय +5:30 पिन 283203 टेलीफोन कोड 05612 UP 83 firozabad.nic.in thumb|280px|फ़िरोज़ाबादी चूड़ियाँ thumb|280px|खंडहर thumb|280px|सन् 1787 में फ़िरोज़ाबाद का दृश्य thumb|280px|फ़िरोज़ाबाद ईदगाह फ़िरोज़ाबाद (Firozabad) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के फ़िरोज़ाबाद ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है। राष्ट्रीय राजमार्ग 19 यहाँ से गुज़रता है।"Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716"Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC 23 अप्रैल 2017," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975 विवरण फ़िरोज़ाबाद का पुराना नाम चंदवार के नाम से जाना जाता था। यह शहर चूड़ियों के निर्माण के लिये प्रसिद्ध है। यह आगरा से 40 किलोमीटर और राजधानी दिल्ली से 250 किलोमीटर की दूरी पर पूर्व की तरफ स्थित है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ यहाँ से लगभग 250 किमी पूर्व की तरफ है। फिरोज़ाबाद ज़िले के अन्तर्गत बड़े कस्बे टुंडला , सिरसागंज, और शिकोहाबाद आते हैं। टुंडला पश्चिम तथा शिकोहाबाद शहर के पूर्व में स्थित है। फिरोज़ाबाद में मुख्यतः चूडियों का कारोबार होता है। यहाँ पर आप रंग बिरंगी चूडियों को अपने चारों ओर देख सकते हैं। लेकिन अब यहाँ पर गैस का कारोबार होता है। यहाँ पर काँच का अन्य सामान (जैसे काँच के झूमर) भी बनते हैं। इस शहर की आबो हवा गरम है। यहाँ की आबादी बहुत घनी है। यहाँ के ज्यादातर लोग कोरोबार से जुडे हैं। घरों के अन्दर महिलाएं भी चूडियों पर पालिश और हिल लगाकर रोजगार अर्जित कर लेती हैं। बाल मज़दूरी यहाँ आम है। सरकार तमाम प्रयासों के बावजूद उन पर अंकुश नहीं लगा सकी है। प्राचीन समय में चन्द्रनगर के नाम से जाना जाता था इतिहास फ़िरोज़ाबाद का पुराना नाम चंदवार बताया जाता है। उस समय चंद्रवार के राजा चन्द्रसेन, जो हिंदू (जैन)धर्म के अनुयायी थे। फ़िरोज़ाबाद की भगवान चन्दाप्रभु की स्फटिक मणि की प्रतिमा विश्व की सबसे बड़ी स्फटिक मणि की प्रतिमा है, जो की राजा चन्द्रसेन के समय में प्राप्त हुयी थी। उस चंदाप्रभु भगवान् की प्रतिमा के कारण और राजा चन्द्रसेन के नाम के कारण उस समय चंद्रवार का नाम पड़ा। आज भी फ़िरोज़ाबाद के चदरवार नगर जो यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है, पर राजा चन्द्रसेन का खंडहर हुआ पुराना किले के अवशेष और प्राचीन जैन मंदिर मौजूद है यहाँ पसीने वाले हनुमान जी का मदिर और एक पुराना शिव मंदिर भी है। वर्तमान नाम अकबर के समय में मनसबदार फ़िरोज़शाह द्वारा 1566 में दिया गया।http://firozabad.nic.in/District_History.html संग्रहीत प्रति 29 दिसंबर 2017 https://web.archive.org/web/20171218194012/http://firozabad.nic.in/District_History.html 18 दिसंबर 2017 live चंदवार (या चंदावर) में चौहान वंश के राजा चन्द्रसेन और मुहम्मद ग़ोरी के बीच 1194 ई। में युद्ध लड़ा गया जिसमें राजा जयचन्द की हार हुई फ़िरोज़ाबाद का प्राचीन नाम चंदवार नगर था। फ़िरोज़ाबाद का नाम अकबर के शासन में फिरोज शाह मनसब दार द्वारा 1566 में दिया गया था। कहते हैं कि राजा टोडरमल गया से तीर्थ यात्रा कर के इस शहर के माध्यम से लौट रहे थे ,तब उन्हें लुटेरो ने लूट लिया|उनके अनुरोध पर, अकबर ने मनसबदार फिरोज शाह को यहा भेजा| फिरोज शाह दतौजि, रसूलपुर,मोहम्मदपुर गजमलपुर ,सुखमलपुर निज़ामाबाद, प्रेमपुर रैपुरा के आस-पास उतरा|फिरोज शाह का मकबरा और कतरा पठनं के खंडहर इस तथ्य का सबूत है और इतिहासकारों का मानना है कि फिरोजशाह ने भारी संख्या में हिंदू का जबरन धर्म परिवर्तित करवाया।Satish Chandra Medieval India: From Sultanat to the Mughals-Delhi Sultanat (1206-1526) - Part One https://books.google.com/books?id=L5eFzeyjBTQC&pg=PA27 2004 Har-Anand Publications 978-81-241-1064-5 27– 29 दिसंबर 2017 https://web.archive.org/web/20170310225730/https://books.google.com/books?id=L5eFzeyjBTQC 10 मार्च 2017 liveKunal Kishore Ayodhya Revisited https://books.google.com/books?id=gKKaDAAAQBAJ&pg=PA315 2016 Ocean Books Pvt. Limited 978-81-8430-357-5 315– ईस्ट इंडिया कंपनी से सम्बंदित एक व्यापारी पीटर ने 9 अगस्त 1632 में यहाँ का दौरा किया और शहर को अच्छी हालत में पाया|यह आगरा और मथुरा की विवरणिका में लिखा है की फ़िरोज़ाबाद को एक परगना के रूप में उन्नत किया गया था|शाहजहां के शाशन में नबाब सादुल्ला को फ़िरोज़ाबाद जागीर के रूप में प्रदान किया गया|Jahangir ने 1605 से 1627 तक शाशन किया|इटावा, बदायूं मैनपुरी, फ़िरोज़ाबाद सम्राट फर्रुखसियर के प्रथम श्रेणी मनसबदार के अंतर्गत थे। बाजीराव पेशवा ने मोहम्मद शाह के शासन में 1737 में फ़िरोज़ाबाद और एतमादपुर लूटा|महावन के जाटों ने फौजदार हाकिम काजिम पर हमला किया और उसे 9 मई 1739 में मारे दिया|जाटों ने फ़िरोज़ाबाद पर 30 साल शासन किया। मिर्जा नबाब खान यहाँ 1782 तक रुके थे। 18 वीं सदी के अंत में फ़िरोज़ाबाद पर मराठाओं के सहयोग के साथ हिम्मत बहादुर गुसाईं द्वारा शासन किया गया। फ्रेंच, आर्मी चीफ डी. वायन ने नवंबर 1794 में एक आयुध फैक्टरी की स्थापना की। श्री थॉमस ट्रविंग ने भी अपनी पुस्तक 'Travels in India ' में इस तथ्य का उल्लेख किया है। मराठाओं ने सूबेदार लकवाददस को यहां नियुक्त किया,जिसने पुरानी तहसील के पास एक किले का निर्माण कराया जो वर्तमान में गाढ़ी के पास स्थित है|जनरल लेक और जनरल वेल्लजल्ल्य ने 1802 में फ़िरोज़ाबाद पर आक्रमण किया|ब्रिटिश शासन की शुरुआत में फ़िरोज़ाबाद इटावा जिले में था। लेकिन कुछ समय बाद यह अलीगढ़ जिले में संलग्न किया गया| जब 1832 में सादाबाद को नया ज़िला बनाया गया तो फ़िरोज़ाबाद को इस में सम्मिलित कर दिया गया। पर बाद में 1833 में फ़िरोज़ाबाद को आगरा में सम्मिलित कर दिया गया।1847 में लाख का व्यापर यहाँ बहुत फल-फूल रहा था। 1857 के स्वतंत्रा संग्राम में चंदवार के जमींदारो ने स्थानीय मलहो के साथ सक्रिय भाग लिया ग्राम- हिरनगऊ वर्तमान-(राजस्व ग्राम हिरनगाँव) जनपद फिरोजाबाद निवासी क्रांतिकारी ,क्रांतिकारी पंडित तेजसिंह तिवारी द्वारा 1857 क्रांति की लो को स्थानीय लोगों के दिलों में जलाते रहे प्रसिद्ध उर्दू कवि मुनीर शिकोहाबादी को ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार ने काला पानी की सजा सुनाई थी। इस शहर के लोगो ने 'खिलाफत आंदोलन', 'भारत छोड़ो आंदोलन' और 'नमक सत्याग्रह' में भाग लिया और राष्ट्रीय आंदोलनों के दौरान जेल गये। फिरोजाबाद के कुछ जैन समझते है के यह स्फटिक मणि की प्रतिमा आचार्य समंतभद्र स्वामी ने अपने योगवल से दर्शाई थी पर फिरोजाबाद के जैन समाज को शायद यह नही पता के यह प्रतिमा जमुना के फूल ठहरने से मिली थी समंतभद्र स्वामी ने जिस प्रतिमा को निकाला वो प्रतिमा चंद्रपुरी बनारस में है समंतभद्र मुनिवर ने ध्याया पिंडी फटी दर्शन तुम पाया यह फटे महादेव के नाम से पिंडी बनारस में है और उस प्रतिमा से जो चंदप्रभु भगवान उत्पन्न हुए वो चंद्रपुरी जो बनारस के पास का चंदप्रभू भगवान की जन्मस्थली है के मंदिर मैं विराजमान है । जनपद बनने का वर्षवार इतिहास वर्ष              #इटावा जनपद के अंतर्गत था वर्ष              #अलीगढ़ जनपद के अंतर्गत था 1832 मैं यह #सादाबाद जनपद के अंतर्गत था 1833 में यह #आगरा जनपद के अंतर्गत था 1989 से यह #फिरोजाबाद जनपद के अंतर्गत है फिरोजाबाद के ऐतिहासिक स्थल किलोमीटर दूर यमुना तट पर ग्राम चंद्रवार बसा हुआ है यहां पर मौहम्मद गौरी एवं जयचंद का युद्ध हुआ था, इसी युद्ध में कन्नौज के सम्राट जयचंद को वीरगति प्राप्त हुयी थी, जैन विद्वानों की यह मान्यता थी कि यह क्षेत्र श्रीकृष्ण भगवान के पिता वासुदेव द्वारा शासित रहा है। प्राचीन शांतेश्वर महादेव शिवजी मंदिर- हिरनगऊ से लगभग13 किलोमीटर दूरी पर हाथवंत रोड पर स्थित गांव सांती बसा हुआ है, जो सेकडों साल पुराना है सांती गांव में बसे हुए इस मंदिर का जिक्र फिरोजाबाद गजेटियर में आता है, गजेटियर के मुताबिक महाभारत कालीन राजा शान्तुन ने इस मंदिर की स्थापना करायी थी, मंदिर में जहां पर शिवलिंग स्थापित है वहां नित्य प्रतिदिन 1 सर्प आता था, राजा शान्तुन को साप को देखकर कोई चमत्कार होने की उम्मीद लगी, तो उन्होंने यहा खुदाई करायी, खुदायी के दौरान स्वंय एक शिवलिंग प्रकट हुआ तभी राजा शान्तुन ने यहां मंदिर की स्थापना करायी जो शातेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। राजा शान्तनु का किला फिरोजाबाद - हिरनगऊ से लगभग 13 किलोमीटर दूरी पर हाथवंत रोड पर स्थित सांती ग्राम में राजा शान्तनु का किला था। देवर्षि नारद मुनि आश्रम फिरोजाबाद - हिरनगऊ से लगभक25 किलोमीटर दूर ग्राम नारखी देवर्षि नारद मुनि जी के आश्रम/तपोभूमि के लिए जाना जाता है नारद जी के नाम पर ग्राम का नाम नारखी पडा है, यहां पर नारद जी मंदिर व आश्रम बना हुआ है। फतेहपुर करखा रियासत फिरोजाबाद - हिरनगऊ से 49 किलोमीटर से दूर शिकोहाबाद क्षेत्र का फतेहपुर करखा ग्राम सेकडों वर्ष पुराना ऐतिहासिक ग्राम है, यह सिरसागंज बटेश्वर मार्ग पर बसा हुआ है यहां मुस्लिम काल में कई युद्ध लडे गये है मेवातियों ने रपडी के राजाओं को यही हुये युद्ध में हराया था खेतों की खुदाई में 10 वीं शताब्दी तक के कई अवशेष प्राप्त हुये है इस ग्राम के चारो ओर तालाब व पुराने कुऐं अब भी जीर्णावस्था में मौजूद है। आल्हा ऊदल के समय के माणों परिवार के लोग यहां आकर बसे थें 17 वीं व 18 वीं शताब्दी में चोबें लोगों की यहां जमीदारी रही है। परीक्षित नगरी पाढम फिरोजाबाद - हिरनगऊ से लगभग 50 किलोेमीटर दूरी पर एका शिकोहाबाद मार्ग पर स्थित परीक्षित नगरी पाढम की मान्यता है कि अर्जुन के पौत्र तथा अभिमन्यु के पुत्र महाराजा परीक्षित की नागदंश के फलस्वरूप मृत्यु के उपरान्त उनके पुत्र जनमेजय ने पृथ्वी के समस्त नागों को नष्ट करने के लिए इसी स्थान पर नाग यज्ञ किया था पाढम खेढे की ऊंचाई 200 फुट है इस खेढे की खुदाई में 3.5 गज की मौटी दिवारे निकली है खुदाई से प्राप्त ईटे विभिन्न आकार में 1 फुट से लेकर 1.5 फुट तक लम्बी है खेढे पर एक प्रचीन कुआ है जिसे परीक्षित कूप कहा जाता है जनमेजय का नाम यज्ञ कुण्ड भी खेढे की समीप ही है। रपडी का किला फिरोजाबाद - हिरनगऊ से लगभग 52 किलोमीटर दूर शिकोहाबाद से दक्षिण किनारे यमुना नदी के निकट राय जोरावर सिंह ने रपडी को बसाया था इस छोटे राज्य का विस्तार यमुना के खारों और शिकोहाबाद मुस्ताफाबाद, घिरोर तथा बरनाहल के परगने तक था राजा जयचंद को पराजित करने के बाद विजयी मुस्लिम सेना ने सन् 1194 में रपडी के राजा पर आक्रमण कर करखा युद्ध में पराजित किया तब से रपडी मुगल शासन की जागीर के रूप में रही, पुराने समय में लगभग 1 किलोमीटर के दायरा में विशाल किला बना होगा। फिरोजाबाद के अंतर्गत रियासत 1 जारखी रियायत 2 गांगनी रियासत 3 फतेहपुर करखा रियासत 4 धीरपुरा रियायत 5 रपड़ी का किला 6 कोटला का किला 7 चंदवार का किला 8 राजा शान्तनु का किला नगर पालिका की स्थापना आगरा गजेटियर 1965 के पृष्ठ 263 के अनुसार फिरोजावाद नगर पालिका की स्थापना सन् 1868 में हुई थी, अनेक वर्षों तक ज्वांट मजिस्ट्रेट इसका अध्यक्ष हुआ करता था। उस समय पुलिस की व्यवस्था भी नगर पालिका के अंतर्गत थी। काँच उद्योग का प्रारम्भ अलीगढ इंस्टिट्यूट गजट सन 1880 के पृष्ठ 1083 पर उर्दू के कवि मौलाना अल्ताफ हुसैन हाली ने लिखा है कि फ़िरोज़ाबाद में खजूर के पटटे की पंखिया एशी उम्दा वनती है कि हिंदुस्तान में शायद ही कही वनती हो। सादी पंखिया जिसमे किसी कदर रेशम का काम होता है एक रुपया कीमत की हमने भी यहाँ देखी। इस कथन से स्पस्ट होता है कि 1880 तक यहाँ काँच उद्योग का प्रारम्भ नहीं हुआ था, आगरा गजेटियर 1884 के पृष्ठ 740 के अनुसार उस समय फ़िरोज़ाबाद में लाख का व्यवसाय भी अच्छी स्थिति में था ये व्यवसाय कालान्तर में समाप्त हो गया है ,परंतु वर्तमान में भारत में सबसे अधिक काँच की चूड़ियाँ, सजावट की काँच की वस्तुएँ, वैज्ञानिक उपकरण, बल्ब आदि फ़िरोज़ाबाद में बनाये जाते हैं। फ़िरोज़ाबाद में मुख्यत:चूड़ियों का व्यवसाय होता है। यहाँ पर आप रंगबिरंगी चूड़ियों की दुकानें चारों ओर देख सकते हैं। घरों के अन्दर महिलाएँ भी चूडियों पर पॉलिश लगाकर रोजगार अर्जित कर लेती हैं। भारत में काँच का सर्वाधिक फ़िरोज़ाबाद नामक छोटे से शहर में बनाया जाता है। इस शहर के अधिकांश लोग काँच के किसी न किसी सामान के निर्माण से जुड़े उद्यम में लगे हैं। सबसे अधिक काँच की चूड़ियों का निर्माण इसी शहर में होता है। रंगीन काँच को गलाने के बाद उसे खींच कर तार के समान बनाया जाता है और एक बेलनाकार ढाँचे पर कुंडली के आकार में लपेटा जाता है। स्प्रिंग के समान दिखने वाली इस संरचना को काट कर खुले सिरों वाली चूड़ियाँ तैयार कर ली जातीं हैं। अब इन खुले सिरों वाली चूड़ियों के विधिपूर्वक न सिर्फ़ ये सिरे जोड़े जाते हैं बल्कि चूड़ियाँ एकरूप भी की जाती हैं ताकि जुड़े सिरों पर काँच का कोई टुकड़ा निकला न रह जाये। यह एक धीमी प्रक्रिया है जिसमें काँच को गर्म व ठण्डा करना पड़ता है। रेल का प्रारम्भ सन 1862 में 1 अप्रेल को टूंडला से शिकोहाबाद के लिए पहली रेलगाड़ी चालू हुई इससे अगले वर्ष मार्च 1863 ई0 से टूंडला से अलीगढ तक रेल चलने लगी। फिरोजाबाद में स्थापित रेलवे स्टेशन जनपद फिरोजाबाद में निम्नलिखित रेलवे स्टेशन स्थापित है 1 फिरोजाबाद रेलवे स्टेशन 2 टूंडला रेलवे स्टेशन 3 हिरनगांव रेलवे स्टेशन 4 मक्खनपुर रेलवे स्टेशन 5 शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन शिक्षा 1-जनपद फिरोजाबाद में सन 1850 में तहसीली स्कूलों की स्थापना का कार्य एवं सन 1851 से ग्राम पाठशालाओं की स्थापना का कार्य प्रारंभ हुआ 2-फिरोजाबाद जनपद में सर्वप्रथम हाई स्कूल की शिक्षा 1919 एवं इंटरमीडिएट की शिक्षा 1926 से प्रारंभ हुई l 3-जनपद फिरोजाबाद में सर्वप्रथम वर्ष 1947 में डिग्री कॉलेज की स्थापना हुई थी फिरोजाबाद की जनगणना सन 1865 ई0 में सन 1872 ई0 में 10,76005 सन 1881 ई0 में 09,74656 सन 1891 ई0 में सन 1901 ई0 में 10,60528 सन 1951 ई0 में सन 1961 ई0 में सन 1971 ई0 में सन 1981 ई0 में सन 1991 ई0 में सन 2001 ई0 में सन 2011 ई0 में 604,214 2024 में फ़िरोज़ाबाद शहर की वर्तमान अनुमानित जनसंख्या 856,000 है |https://www.census2011.co.in/census/city/116-firozabad.html#:~:text=The%20current%20estimate%20population%20of,based%20on%20past%20growth%20rate. Firozabad City Population 2024 Literacy and Hindu Muslim Population www.census2011.co.in 2024-12-19 परिवहन यह आगरा और इटावा के बीच प्रमुख रेलवे जंक्शन है। दिल्ली से रेल द्वारा आसानी से टूंडला जंक्शन एवम् हिरनगाँव रेलवे स्टेशन होते हुए फ़िरोज़ाबाद रेलगाड़ी से पंहुचा जा सकता है एवम् फ़िरोज़ाबाद पहुँचने हेतु बस आदि की भी समुचित व्यवस्ता है। अन्य पहलू .इस शहर का नाम फिरोजशाह मनसबदार के नाम पर रखा गया जोकि अकबर कई सेनापतियों में से एक थे। फिरोजशाह की कब्र आज भी मौजूद है। फिरोजाबाद में ही एक गांव है राजा का ताल जिसमें ताल का निर्माण अकबर के नवरत्नों में से एक राजा टोडरमल ने किया था। राजा टोडर मल ने मानक वजन और एक भूमि सर्वेक्षण और निपटान प्रणाली, राजस्व जिलों और अधिकारियों की शुरुआत की। पटवारी द्वारा रखरखाव की इस प्रणाली का उपयोग अभी भी भारतीय उपमहाद्वीप में किया जाता है जिसे ब्रिटिश राज और भारत सरकार द्वारा सुधार किया गया था। 1857 की क्रांति में, स्थानीय जनता के साथ फिरोजाबाद के जमींदारों ने भी सक्रिय भाग लिया। प्रसिद्ध उर्दू कवि मुनीर शिकोहाबादी को भी ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार ने कालापानी की सजा सुनाई थी। इन्हें भी देखें फ़िरोज़ाबाद ज़िला शिकोहाबाद हिरनगाँव अलीनगर केंजरा सन्दर्भ 6.https://gazetteers.up.gov.in/en/page/gazzetters श्रेणी:फ़िरोज़ाबाद ज़िला श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नगर श्रेणी:फ़िरोज़ाबाद ज़िले के नगर