411 REFERENCE · Wikipedia
क्रियाक्रमकरी
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
क्रियाक्रमकरी केरलीय गणित सम्प्रदाय के शंकर वारियर और नारायण द्वारा संस्कृत में रचित टीका ग्रन्थ है। यह भास्कर द्वितीय द्वारा रचित लीलावती नामक गणित ग्रन्थ की टीका है। 'क्रियाक्रमकरी' का शाब्दिक अर्थ है - 'गणितीय संक्रियाएँ करने वाली' ('Operational Techniques')
क्रियाक्रमकरी और ज्येष्ठदेव द्वारा विरचित युक्तिभाष से ही केरलीय गणित सम्प्रदाय के संस्थापक संगमग्राम के माधव के बारे में जानकारी मिलती है। इसमें पाई का अतिशुद्ध मान तथा साधारण-शुद्ध मान (२२/७) दिया गया है। पाई के लिये अनन्त श्रेणी और व्युत्क्रमस्पर्शज्या (arctangent) के लिये अनन्त श्रेणी आदि दी गयी है।
पाई के मान के बारे में निम्नलिखित श्लोक है-
व्यासे भ-नन्द-अग्नि-हते विभक्ते ख-बाण-सूर्यैस् परिधिस् सस् सूक्ष्मस्।
द्वाविंशति-घ्ने विहृते अथ शैलैस् स्थूलस् अथ-वा स्यात् व्यवहार-योग्यस्॥
के वी शर्म के अनुसार इस श्लोक का अनुवाद यह होगा-
"व्यास को 3927 से गुणा करके गुणनफल को 1250 से भाग करें; इससे अधिक परिशुद्ध परिधि की लम्बाई मिलती है। अथवा, व्यास को 22 से गुणा करके गुणनफल को 7 से भग दें ; इससे परिधि का कम शुद्ध मान (स्थूल मान) मिलता है जो व्यवहार योग्य होगा।" John, Taylor (1816). Lilawati or a treatise on arithmetic and geometry. p. 94.
सन्दर्भ
श्रेणी:गणित ग्रन्थ
श्रेणी:संस्कृत ग्रन्थ
श्रेणी:भारतीय गणित
श्रेणी:खगोलीय ग्रंथ