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यंग्स डबल स्लिट परीक्षण
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thumb|द्वि-रेखाछिद्र परीक्षण का चित्रण।
यङ का द्वि-रेखाछिद्र परीक्षण, आधूनिक द्वि-रेखाछिद्र परीक्षण का मूल रूप है। यह प्रयोग थोमस यङ के द्वारा १९ वीं शताब्दी मे प्रदर्शित किया गया था। इस प्रयोग ने प्रकाश की तरंग सिद्धान्त की स्वीकृति में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। खुद थोमस यंग का कहना था कि यह उनकी सभी उपलब्धियों मे से अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्धि है।
१७ वीं और १८ वीं शताब्दी में प्रकाश प्रचार के सिद्धांत
right|thumb|400px|पानी की लहरों की टिप्पणियों के आधार पर, डबल स्लिट प्रयोग मे विवर्तन का, थोमस यंग के द्वारा तैयार किया गया रेखा चित्र।
इस अवधि के दौरान कई वैज्ञानिकों जैसे रॉबर्ट हुक , क्रिश्चियन हुय्गेंस तथा लियोनार्ड ओइलर, ने प्रयोगात्मक टिप्पणियों के आधार पर प्रकाश के तरंग सिद्धांत के कईं प्रस्ताव रखे। हालांकि, सर आइज़ैक न्यूटन, जिन्होने प्रकाश पर कई प्रायोगिक जांच किए थे, प्रकाश की तरंग सिद्धांत को खारिज कर दिया और प्रकाश की कणिका सिद्धांत विकसित की, जिसके अनुसार किसी भी चमकदार शरीर से प्रकाश छोटे कणों के रूप में उत्सर्जित होता है और उसी रूप मे प्रसारित होता है। न्यूटन का यह सिद्धांत विवर्तन जैसे कई प्रत्यक्ष प्रसंगो की व्याख्या नहीं कर सकता। फिर भी इस सिद्धांत के कई प्रख्यात समर्थक थे जैसे कि पियेर सिमों लाप्लास तथा जीन बैप्टिस्ट बैयट।
तरंग सिद्धांत पर यंग के कृत्य
सन १८०० में गौटिंगेन में औषधीय विज्ञान का अध्ययन करते हुए, यंग ने रॉयल सोसायटी के सामने एक पत्र प्रस्तुत किया जिस्मे यंग ने तर्क दिया कि प्रकाश भी तरंग की तरह व्यवहार करता है। यंग के इस विचार को कुछ मात्रा मे संदेह से देखा गया क्योंकि यह न्यूटन के कणिका सिद्धांत का खण्डन करता था। बहरहाल, वह निरंतर अपने सिद्धांत को विकसित करता रहा।
उन्होने पानी के तरंगो का इस्तमाल करते हुए, उन तरंगो के गुणों का वर्णन किया।
thumb|दो तरंगों के बीच संपर्क का एनीमेशन।
सन १८०१ मे उन्होने रॉयल सोसायटी के समक्ष "ओन द थियोरि ओफ लाईट एंड कलर" ("प्रकाश तथा रंगो के सिद्धांत पर") नामक एक थिसिस प्रस्तुत किया। इस थिसिस मे यंग ने विभिन्न [[व्यतिकरण (तरंगों का)|तरंगों के व्यक्तिकरणों] का विश्लेषण दिया।
डबल स्लिट प्रयोग
right|350px|thumb|डबल स्लिट प्रयोग जब प्रकाश पर किया जाता है, तो स्क्रीन पर निम्न पैटर्न देखा जा सकता है।
डबल- स्लिट प्रयोग एक प्रदर्शन है जिसके प्रकार प्रकाश तथा बात दोनों तरंगों और कणों के रूपक व्यवहार कर सकता है। इसके अलावा, यह क्वांटम यांत्रिक घटना की मौलिक "संभाव्य प्रकृति" (अंग्रेजी: probabilistic nature) को प्रदर्शित करता है।
इस प्रयोग मे एक सुसंगत प्रकाश स्रोत (उदाहरण: एक लेजर बीम), एक थाली में दो समानांतर छेदों को प्रकाशित करता है। इन छेदों द्वारा गुज़रने वाले प्रकाश का निरीक्षण, पीछे एक स्क्रीन पर किया जाता है। Feynman Richard P. Robert B. Leighton Matthew Sands The Feynman Lectures on Physics, Vol. 3
Addison-Wesley 1965 US 1.1-1.8 0201021188 दोनो छेदों से निकासित प्रकाश के बीच संपर्क के कारण, स्क्रीन पर उज्ज्वल तथा अंधेरे बैंड उत्पादित होते है। अगर प्रकाश कणो के गठन से बना है, तो इन बैंडों के प्रतिमान का कोई मतलब नही बनता। इससे पता लगता है कि प्रकाश तरंगो की तरह व्यवहार करता है। परंतु कुछ अनेक प्रयोगो, जैसे फोटो एलेक्ट्रिक एफेक्ट, से मालुम पडता है कि प्रकाश कणों के समान भी व्यवहार करता है। इसे प्रकाश का "तरंग-कण द्वैतता" Darling David David Darling (astronomer) Wave–Particle Duality The Internet Encyclopedia of Science The Worlds of David Darling 2007 http://www.daviddarling.info/encyclopedia/W/wave-particle_duality.html 2008-10-18 https://web.archive.org/web/20160624030314/http://www.daviddarling.info/encyclopedia/W/wave-particle_duality.html 24 जून 2016 dead कहा जाता है।
प्रकाश के साथ-साथ कई अन्य अपरमाणविक कण जैसे इलेक्ट्रॉन भी इन गुणों को धरण मे रखते हैं।
व्यक्तिगत कणों के हस्तक्षेप
frame|कण-लहर समारोह का अनुकरण : डबल स्लिट प्रयोग
इस प्रयोग का एक महत्वपूर्ण संस्करण एकला कणों का भी इस्तमाल करता है, जैसे कि इलेक्ट्रॉन। इस प्रयोग मे एक मशीन का उपयोग किया जाता है जो इलेक्ट्रॉन के कणो को स्क्रीन कि तरफ फेंकता है। यह मशीन एक पिस्तोल की तरह काम करता है। इलेक्ट्रॉन के कणों को दो समानांतर छेदों से गुज़राया जाता है। छेदों से गुज़र कर यह इलेक्ट्रॉन एक स्क्रीन पर जा गिरते है। यह स्क्रीन एक फोटोग्राफिक फिल्म होने के कारण, इलेक्ट्रॉन का इस पर गिरना हमे दिाखाई पडता है। इस प्रयोग को करने के पस्चात देखा गया कि स्क्रीन पर उसी तरह के उज्ज्वल तथा अंधेरे बैंडों का निर्माण हुआ, जैसे प्रकाश पर यह प्रयोग करने से हुआ था।
यह प्रयोग इलेक्ट्रॉन सहित कई अन्य कणों तथा उप-कणो पर किया जा सकता है और हर बार वही बैंडों का पैटर्न दिखा जा सकता है। क्वांटम यांत्रिक सिद्धांत के अनुसार इन कणों का स्क्रीन के विभिन्न भागों पर गिरना एक अप्रत्याशित प्रक्रिया है। कण कब और कहां आ गिरेगा, इस बात का अंदाजा नही लगाया जा सकता। अगर दो तरंग कि तरह व्यवहार करने वाले कण एक दुसरे को रद्द कर दें, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कण गायब हो जाता है ; इसका मतलब यह है कि कण कहीं और दिखाई देगा।
इस प्रयोग की व्याख्या
कोपनहेगन व्याख्या
कोपेनहेगन व्याख्या , क्वांटम यांत्रिकी के क्षेत्र में, नील्स बोर तथा वर्नर हाइजनबर्ग के द्वारा निर्मित सिद्धांत है। यह क्वांटम यांत्रिकी के क्षेत्र मे सबसे प्रसिद्ध व्याख्या मानी जाती है।
इस व्याख्या के अनुसार किसी भी प्रणाली के गुण ,मापने के पहले, निश्चित नही होता। Harrison
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Complementarity and the Copenhagen Interpretation of Quantum Mechanics
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3 मार्च 2016
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1 जुलाई 2010
live
और क्वांटम यांत्रिकी केवल माप के संभावनाओं के बारे मे बता सकता है। कोई भी प्रणाली अवलोकन के पश्चात ही माप का निर्माण कर पाता है। इसका मतलब यह हुआ कि अवलोकन के पहले उस माप के विभिन्न परिणाम मुमकिन है। पिछले कुछ वर्षों में कोपेनहेगन व्याख्या पर कई आपत्तियों कि गईं है।
कोपेनहेगन व्याख्या के लिए कई विकल्प मौजूद है। इसमे मेनी वर्लडस् व्याख्या, डी ब्रोगली - बोम (पायलट - वेव) व्याख्या, और क्वांटम असम्बद्धता सिद्धांतों में शामिल हैं।
मेनी वर्लडस् व्याख्या
भौतिक विज्ञानी डेविड ड्यूश अपनी पुस्तक "फेब्रिक ओफ रियालिटि" मे कहते है कि डबल स्लिट प्रयोग मेनी वर्लडस् व्याख्या के लिए सबूत है।
कुछ दिलचस्प एनीमेशन
ह्यूजीन्स और हस्तक्षेप
एकैक कणों पर प्रयोग
मेर्ली , मिस्सिरोलि , और पोज़ी द्वारा पहली एकल इलेक्ट्रॉन प्रयोग से अन्य जानकारी के साथ वेबसाइट।
एकल इलेक्ट्रॉन घटनाओं डबल स्लिट प्रयोगों में एक हस्तक्षेप पैटर्न फार्म का निर्माण वाला मूवी।
हिताची वेबसाइट है जो "टोनोमूरा" पर पृष्ठभूमि प्रदान करता है
पन गतिशील अनुरूप (अंग्रेज़ी: Hydrodynamic analog)
" एकल कण हस्तक्षेप स्थूल वस्तुओं के लिए देखा गया।"
पायलट वेव पन गतिशील : पूरक वीडियो
' वर्महोल के माध्यम से ': यवेस कौडर सिलिकॉन बूंदों के माध्यम से तरंग-कण द्वैतता के बारे मे बताते हैं।
सांगणक सिमुलेशन
डबल स्लिटा प्रयोग का जावा प्रदर्शन।
यंग डबल स्लिट हस्तक्षेप का जावा प्रदर्शन
एक सिमुलेशन कि मेथेमेटिका प्लेयर में चलाता है, जिसमें क्वांटम कणों की संख्या, कणों की आवृत्ति, और भट्ठा जुदाई स्वतंत्र रूप से अलग किया जा सकता है।
बाहारी कडियां
https://web.archive.org/web/20081012223004/http://www.falstad.com/ripple/ex-2slit.html
https://web.archive.org/web/20170216073420/http://demonstrations.wolfram.com/WaveParticleDualityInTheDoubleSlitExperiment/
https://web.archive.org/web/20161115194436/https://en.wikipedia.org/wiki/Double-slit_experiment
https://web.archive.org/web/20161120132639/http://abyss.uoregon.edu/~js/21st_century_science/lectures/lec13.html
सन्दर्भ
Robinson, Andrew (2006). The Last Man Who Knew Everything. New York, NY: Pi Press. pp. 123–124. ISBN 0-13-134304-1.
Feynman, Richard P.; Robert B. Leighton; Matthew Sands (1965). The Feynman Lectures on Physics, Vol. 3. US: Addison-Wesley. pp. 1.1–1.8. ISBN 0201021188.
Greene, Brian (2007). The Fabric of the Cosmos: Space, Time, and the Texture of Reality. Random House LLC. p. 90. ISBN 0-307-42853-2. Extract of page 90