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शीरमाल
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मैदा, दूध, घी, केसर
शीर्माल शीरमल एक स्वादिष्ट और पारंपरिक रोटी है,जो भारतीय उपमहाद्वीप और ईरान में लोकप्रिय है। यह केसर (सैफरन) और दूध से तैयार की जाती है, जिससे इसका स्वाद और सुगंध अनूठा होता है। इसका नाम फारसी शब्दों "शीर" (दूध) और "मालیدن" (गूंथना या रगड़ना) से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है "दूध से गूंथी हुई रोटी"। यह रोटी न केवल अपने स्वाद के लिए बल्कि अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता के लिए भी जानी जाती है। इसका स्वाद मीठा,और नमकीन दोनों तरह का होता है।http://www.hindu.com/mp/2007/07/21/stories/2007072152370400.htm संग्रहीत प्रति 2 मार्च 2010 https://web.archive.org/web/20111105230624/http://www.hindu.com/mp/2007/07/21/stories/2007072152370400.htm 5 नवंबर 2011 live इस रोटी का लखनऊ, हैदराबाद और कश्मीर में बहुत महत्व है।http://www.hindu.com/thehindu/mp/2003/05/29/stories/2003052900410300.htm संग्रहीत प्रति 2 मार्च 2010 https://web.archive.org/web/20101023041532/http://hindu.com/thehindu/mp/2003/05/29/stories/2003052900410300.htm 23 अक्तूबर 2010 live
उत्पत्ति और इतिहास
मुगलकालीन प्रभाव शीरमल की उत्पत्ति ईरान में मानी जाती है, जहां इसे पारंपरिक रूप से बनाया जाता था। मुगल सम्राटों ने इसे 16वीं-17वीं सदी में भारत लाया, और यह जल्द ही उत्तर भारत के शाही रसोईघरों का हिस्सा बन गया। मुगल खानपान में दूध, केसर, और मेवों का उपयोग आम था, जो शीरमल में भी देखने को मिलता है।
स्थानीय स्वाद भारत में आने के बाद, शीरमल ने स्थानीय व्यंजनों के साथ तालमेल बिठाया। खासतौर पर लखनऊ, हैदराबाद, और औरंगाबाद जैसे शहरों में यह रोटी लोकप्रिय हो गई। लखनऊ में अवधी व्यंजनों के साथ इसका विशेष स्थान है, जहां इसे शाही भोजन के रूप में परोसा जाता है।
सांस्कृतिक महत्व शीरमल को अक्सर उत्सवों, शादियों, और विशेष अवसरों पर बनाया जाता है। यह मुगलई और अवधी संस्कृति का प्रतीक माना जाता है।
सन्दर्भ
श्रेणी:भारतीय खाना
श्रेणी:भारतीय रोटियाँ
श्रेणी:पाकिस्तानी रोटियाँ
श्रेणी:ईरानी रोटियाँ
श्रेणी:मुग़लाई खाना