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कंगारू
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pink कंगारू Kangaroo and joey03.jpg 175px Female Eastern Grey Kangaroo with joey जंतु कौरडेटा (Chordata) स्तनधारी (Mammalia) मारसूपियलिया (Marsupialia) डाएप्रोटोडोंटिया (Diprotodontia) मैक्रोपोडीडाए (Macropodidae) मैक्रोपस (Macropus) कई जातियाँ
Macropus rufus
Macropus giganteus
Macropus fuliginosus
Macropus antilopinus
कंगारू आस्ट्रेलिया में पाया जानेवाला एक स्तनधारी पशु है। यह आस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय पशु भी है। कंगारू शाकाहारी, धानीप्राणी (मारसूपियल, marsupial) जीव हैं जो स्तनधारियों में अपने ढंग के निराले प्राणी हैं। इन्हें सन् 1773 ई. में कैप्टन कुक ने देखा और तभी से ये सभ्य जगत् के सामने आए। इनकी पिछली टाँगें लंबी और अगली छोटी होती हैं, जिससे ये उछल उछलकर चलते हैं। पूँछ लंबी और मोटी होती है जो सिरे की ओर पतली होती जाती है।
कंगारू स्तनधारियों के शिशुधनिन भाग (मार्सूपियल, marsupialia) के जीव हैं जिनकी विशेषता उनके शरीर की थैली है। जन्म के पश्चात् उनके बच्चे बहुत दिनों तक इस थैली में रह सकते हैं। इनमें सबसे बड़े, भीम कंगारू (जायंट कंगारू) छोटे घोड़े के बराबर और सबसे छोटे, गंध कंगारू (मस्क कंगारू) खरहे से भी छोटे होते हैं।
प्रजातियाँ
कंगारू केवल आस्ट्रलिया में ही पाए जाते हैं। वहाँ इनकी 21 प्रजातियों (जीनस, genus) का अब तक पता चल सका है जिनमें 158 जातियाँ तथा उपजातियाँ सम्मिलित हैं। इनमें कुछ प्रसिद्ध कंगारू इस प्रकार हैं :
न्यू गिनी में डोरकोपसिस (Dorcopsis) जाति के कंगारू मिलते हैं जो कुत्ते के बराबर होते हैं। इनकी पूँछ और टाँगें छोटी होती हैं। इन्हीं के निकट संबंधी तरुकुरंग (डेंड्रोलेगस कंगारू, Dendrolagus kangaroos) हैं जो पेड़ों पर भी चढ़ जाते हैं। इनके कान छोटे और पूँछ पतली तथा लंबी होती है।
पैडीमिलस (pademelous) नामक कंगारू डोलकोपसिस के बराबर होने पर भी छोटे सिरवाले होते हैं। ये न्यु गिनी से टैक्मेनिया तक फैले हुए हैं।
प्रोटेमनोडन (Protemnodon) जाति के कई कंगारू बहुत प्रसिद्ध हैं जो घास के मैदानों में रहते हैं। ये रात में चराई करके दिन का समय किसी झाड़ी में बिताते हैं। इनकी पूँछ, कान और टाँगें लंबी होती हैं।
मैकरोपस (Macropus) जाति का महान् धूम्रवर्ण कंगारू (ग्रेट ग्रे कंगारू) भी बहुत प्रसिद्ध है। यह घास के मैदान का निवासी है। इसी का निकट संबंधी लाल कंगारू भी किसी से कम प्रसिद्ध नहीं है, यह आस्ट्रेलिया के मध्य भाग के निचले पठारों पर रहता है।
शैलधाकुरंग (पेट्रोग्रोल, Petrogole) और ओनीकोगोल (Onychogole) प्रजाति के शैल वैलेबी (रॉक वैलेबी, Rock Wallaby) और नखपुच्छ (नेल टेल) वैलेबी नाम के कंगारू बहुत सुंदर और छोटे कद के होते हैं। इनमें से पूर्वोंक्त प्रजातिवाले कंगारू पहाड़ की खोहों में और दूसरे घास के मैदानों में रहते हैं।
पैलार्किस्टिस (Palorchistes) जाति के प्रातिनूतन भीम कंगारू (प्लाइस्टोसीन जायंट कंगारू, pliestocene giant kangaroo) काफी बड़े (लगभग छोटे घोड़े के भार के) होते हैं। इनका मुख्य भोजन घास पात और फल फल है। इनका सिर छोटा, जबड़ा भारी और टाँगें छोटी होती हैं।
शारीरिक विशेषताएँ
कंगारू के पैरों में अँगूठे नहीं होते। इनकी दूसरी और तीसरी अँगुलियाँ पतली और आपस में एक झिल्ली से जुड़ी रहती हैं, चौथी और पाँचवीं अँगुली बड़ी होती हैं। चौथी में पुष्ट नख रहता है।
कंगारू की पूँछ लंबी और भारी होती है। उछलते समय वे इसी से अपना संतुलन बनाए रहते हैं और बैठते समय इसी को टेककर इस प्रकार बैठे रहते हैं मानों कुर्सी पर बैठे हों। वे अपनी अगली टाँगों और पूँछ को टेककर पिछली टाँगों को आगे बढ़ाते हैं और उछलकर पर्याप्त दूरी तक पहुँच जाते हैं।
कंगारू का मुखछिद्र छोटा होता है जिसका पर्याप्त भाग ओठों से छिपा रहता है। मुख में निचले कर्तनकदंत (इनसाइज़र्स, incisors) आगे की ओर पर्याप्त बढ़े रहते हैं, जिनसे ये अपना मुख्य भोजन, घास पात, सुगमता से कुतर लेते हैं। इनकी आँखें भूरी और औसत कद की, कान गोलाई लिए बड़े और घूमनेवाले होते हैं, जिन्हें हिरन आदि की भाँति इधर-उधर घुमाकर ये दूर आहट पा लेते हैं। इनके शरीर के रोएँ पर्याप्त कोमल होते हैं और कुछ के निचले भाग में घने रोओं की एक और तह भी रहती है।
कंगारू की थैली उसके पेट के निचले भाग में रहती है। यह थैली आगे की ओर खुलती है और उसमें चार थन रहते हैं। जाड़े के आरंभ में इनकी मादा एक बार में एक बच्चा जनती है, जो दो चार इंच से बड़ा नहीं होता। प्रारंभ में बच्चा माँ की थैली में ही रहता है। वह उसको लादे हुए इधर-उधर फिरा करती है। कुछ बड़े हो जाने पर भी बच्चे का सबंध माँ की थेली से नहीं छूटता और वह तनिक सी आहट पाते ही भागकर उसमें घुसजाता है। किंतु और बड़ा हो जाने पर यह थेली उसके लिए छोटी पड़ जाती है और वह माँ के साथ छोड़कर अपना स्वतंत्र जीवन बिताने लगता है। आस्ट्रेलिया के लोग कंगारू का मांस खाते हैं और उसकी पूँछ का रसा बड़े स्वाद से पीते हैं। वैसे तो यह शांतिप्रिय शाकाहारी जीव है, परंतु आत्मरक्षा के समय यह अपनी पिछली टाँगों से भयंकर प्रहार करता है।McCullough, Dale R.; McCullough, Yvette (2000). Kangaroos in Outback Australia. Columbia University Press. ISBN 0-231-11916-X.Flannery, Timothy Fridtjof; Martin, Roger (1996). Tree Kangaroos: A Curious Natural History. Melbourne: Reed Books. ISBN 0-7301-0492-3.
शिकारियों
कंगारूओं के कुछ प्राकृतिक शिकारी हैं। थाइलासीन, जिसे जीवाश्म विज्ञानियों ने कभी कंगारूओं का प्रमुख प्राकृतिक शिकारी माना था, अब विलुप्त हो चुका है। अन्य विलुप्त शिकारियों में मार्सुपियल शेर, मेगालानिया और वोनाम्बी शामिल थे। हालाँकि, कम से कम 50,000 साल पहले ऑस्ट्रेलिया में मनुष्यों के आगमन और लगभग 5,000 साल पहले डिंगो के आने के बाद, कंगारूओं को अनुकूलन करना पड़ा। डिंगो के साथ-साथ, लोमड़ी, जंगली बिल्लियाँ और घरेलू और जंगली कुत्ते जैसी प्रजातियाँ कंगारू आबादी के लिए खतरा पैदा करती हैं। कंगारू और वालबी कुशल तैराक होते हैं और अक्सर विकल्प मिलने पर जलमार्गों में भाग जाते हैं। यदि पानी में पीछा किया जाता है, तो एक बड़ा कंगारू अपने अगले पंजों का उपयोग शिकारी को पानी के नीचे पकड़ने के लिए कर सकता है ताकि उसे डुबो सके।Weinryb Ittai 2011-09 Treasures of Heaven: Saints, Relics, and Devotion in Medieval Europe https://doi.org/10.1086/662530 West 86th: A Journal of Decorative Arts, Design History, and Material Culture 18 2 281–286 10.1086/662530 2153-5531 प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा बताई गई एक अन्य रक्षात्मक रणनीति यह है कि हमलावर कुत्ते को अगले पंजों से पकड़ लिया जाता है तथा पिछले पैरों से उसकी आंतें फाड़ दी जाती हैं।
इन्हें भी देखें
धानीप्राणी
लाल कंगारू
मैक्रोपोडीडाए
सन्दर्भ
श्रेणी:धानीप्राणी
श्रेणी:ऑस्ट्रेलिया के स्तनधारी
श्रेणी:मैक्रोपोडीडाए