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भक्तमाल
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प्रसाद रचना 2025-01-01 NEP 2020 का समाजशास्त्रीय मूल्यांकन: समावेशिता और समानता के सन्दर्भ में https://doi.org/10.33545/26647699.2025.v7.i1e.162 International Journal of Humanities and Arts 7 1 339–343 10.33545/26647699.2025.v7.i1e.162 2664-7699भक्तमाल हिन्दी का एक ऐतिहासिक ग्रन्थ है। इसके रचयिता नाभादास या नाभाजी हैंKant Kamal 2025-12-21 महिला सशक्तिकरणः एक ऐतिहासिक अवलोकन https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i06.63214 International Journal For Multidisciplinary Research 7 6 10.36948/ijfmr.2025.v07i06.63214 2582-2160। इसका रचना काल सं. १५६० और १६८० के बीच माना जा सकता है। भक्तमाल में नाभाजी ने इस ग्रन्थ की रचना का उद्देश्य बताया है कि -
अग्रवाल अंकिता गुप्ता कविता 2023-07-01 सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों में भावनात्मक परिपक्वता की जांच: आत्म-सम्मान, घरेलू वातावरण और मानसिक स्वास्थ्य के साथ इसके संबंध की समीक्षा https://doi.org/10.29070/h564s684 Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 20 3 710–715 10.29070/h564s684 2230-7540Sanju Dr. Supriya 2023-05-01 भगवान् भक्त और भक्ति https://doi.org/10.22271/23947519.2023.v9.i3c.2109 International Journal of Sanskrit Research 9 3 149–154 10.22271/23947519.2023.v9.i3c.2109 2394-7519Pareek Kritika 2018-07-05 चीनी यात्रियों द्वारा वर्णित भारतीय समाज : एक अध्ययन https://doi.org/10.29070/15/57747 Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 15 6 176–179 10.29070/15/57747 2230-7540
अग्रदेव आज्ञा दई भक्तन को यश गाउ ।
भवसागर के तरन कौं नाहिन और उपाउ ॥
भक्तमाल में २०० भक्तों का संक्षिप्त जीवनचरित ब्रजभाषा में वर्णित है। इसमें भगवान् के प्रति भक्तों का समर्पण और उनकी दिव्य भक्ति का दर्शन है। इस ग्रन्थ की यह विशेषता है कि इसमें सभी संप्रदयाचार्यों एवं Bajiya Harlal 2017-10-12 प्राचीन भारतीय योग दर्शन की वर्तमान शैक्षिक परिद्रिश्य में भूमिका एवं योग क्रियाओं में भाग लेने वाले एवं न लेने वाले विद्यार्थियों में नैराश्या एवं तनाव का अध्ययन https://doi.org/10.24321/2456.0510.201708 Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi) 02 02 15–18 10.24321/2456.0510.201708 2456-0510सभी सम्प्रदायों के संतो का समान भाव से श्रद्धापूर्वक संस्मरण किया गया है। इसमें चारों युगों के भक्तों का वर्णन है।Sahni Bhishma Thukral Kapoor Uma 2014-09-01 Ya llegamos a Amritsar (अमृतसर आ गया है) https://doi.org/10.24201/eaa.v49i3.2083 Estudios de Asia y África 755–775 10.24201/eaa.v49i3.2083 2448-654X ध्रुव, प्रहलाद, द्वादश प्रधान भक्त सूर, कबीर, तुलसी, मीरा, ताजदेवी आदि अनेकों भक्तों की माला ही भक्तमाल है ।
श्री भक्तमाल|right|thumb|450px
भक्तमाल के दो पहलू स्पष्ट ही प्रतीत होते हैं, एक में छप्पयों में रामानुज आचार्य से पूर्व के सभी प्रकार के भक्तों के नामों का ही स्मरण है। दूसरे में एक-एक कवि या भक्त पर एक पूरा छप्पय, जिसमें उस भक्त के विशिष्ट गुणों पर प्रकाश पड़ता है।ब्रजभाषा का जीवनी साहित्य एक छप्पय में छः चरणों के एक छन्द में किसी कवि की जीवनी नहीं आ सकती। इसलिये इसे जीवनी साहित्य नहीं कहा जा सकता। यह भी ठीक है, पर आगे भक्तमाल पर जो टीकाएँ हुई उनमें विस्तारपूर्वक प्रत्येक कवि के जीवन की घटनाओं का वर्णन हुआ है। ऐसी पहली प्रसिद्ध टीका है -- प्रियादास की भक्ति रस बोधिनी, जिसका मंगलाचरण ये है-महाप्रभु कृष्णचैतन्य मनहरनजू के चरण को ध्यान मेरे नाम मुख गाइये।
ताही समय नाभाजू ने आज्ञा दई लई धारिटीका विस्तारि भक्तमाल की सुनाइये॥कीजिये कवित्त बंद छंद अति प्यारो लगै जगै जग माहिं कहि वाणी विरमाइये।
जानों निजमति ऐपै सुन्यौ भागवत शुक द्रुमनि प्रवेश कियो ऐसेई कहाइये॥
नाभाजी ने भक्तमाल में चार संप्रदायों का वर्णन किया है-रामानन्द उदार सुधानिधि अवनि कल्पतरु।विष्णुस्वामी बोहित्थ सिन्धु संसार पार करु॥
मध्वाचारज मेघ भक्ति सर ऊसर भरिया।निम्बादित्य आदित्य कुहर अज्ञान जु हरिया॥
जनम करम भागवत धरम संप्रदाय थापी अघट।चौबीस प्रथम हरि बपु धरे त्यों चतुर्व्यूह कलिजुग प्रगट॥
नाभाजी की भक्तमाल की एक परम्परा ही चल पड़ी। कितनी ही भक्तमालाएँ लिखी गई। भिन्न-भिन्न सम्प्रदायों में अपने-अपने संप्रदायों के भक्तों के विवरण विशेषतः प्रस्तुत किए गए।
भक्तमालाओं की मूल प्रेरणा इस धार्मिक भावना में थी कि भक्त कीर्तन भी हरिकीर्तन है। इस बिन्दु से आरम्भ होकर विविध प्रकार की घटनाओं से युक्त होकर ये भक्तों की कथाएँ अलौकिक तत्वों से युक्त होते हुए भी भक्तों की जीवन-कथा प्रस्तुत करने में प्रवृत्त हुई।
भक्तमाल का प्रामाणिक संस्करण
भक्तमाल का प्रामाणिक संस्करण १९६५ में जानकीदास श्री वैष्णव द्वारा 'भक्तमाल भास्कर' नाम से प्रकाशित हुआ।Sri Vaishnav Jankidas https://books.google.com/books?id=N55HAAAAMAAJ Bhaktamal Thakuraprasada 1965 Varanasi 2 Hindi इसमें उनने भक्तमाल की सबसे पुरानी हस्तलिखित पाण्डुलिपि का उपयोग किया। आचार्य बलदेव उपाध्याय (1899-1999) ने इस संस्करण के आरम्भ में लिखा है-
मैंने श्री जानकीदासजी श्रीवैष्णव द्वारा सम्पादित 'भक्तमाल' को यत्रतत्र देखा। ग्रन्थ बड़े परिश्रम तथा मनोयोग के साथ सम्पादित किया गया है। प्रियादास जी की प्रख्यात टीका के साथ यह ग्रन्थ पहिले भी प्रकाशित था, परन्तु यह संस्करण इतः पूर्व संस्करणों से अनेक अंश में विशिष्ट है। सम्पादक ने मूल तथा टीका के पाठ संशोधन के निमित्त अनेक प्राचीन हस्तलेखों का भी इसमें विवेक के साथ उपयोग किया है। साथ ही साथ जिन महात्माओं के विषय में प्रियादास जी मौन हैं अथवा स्वल्पाक्षर में ही विवरण दिया है, उनका विवरण यहाँ विशेष रूप से श्री जानकीदास जी ने दिया है। इस प्रकार यह नूतन संस्करण मूल के उपबृंहण के साथ ही साथ प्रियादास जी की टीका का भी उपबृंद्दण प्रस्तुत करता है। ऐसे सुन्दर तथा विद्वत्तापूर्ण, प्रामाणिक तथा सुविशुद्ध संस्करण के प्रस्तुतकर्ता जानकीदास जी भक्तों तथा साहित्य रसिकों के धन्यवाद के समुचित पात्र हैं। मैं इस ग्रन्थ के बहुल प्रचार की कामना करता हूँ।
टीका, अनुवाद आदि
प्रियादास कृत भक्तिरसबोधिनी (१७१२ ई० में) Lutgendorf Philip 1994 Winand M. Callewaert Rupert Snell According to Tradition: Hagiographical Writing in India Otto Harrassowitz Verlag 9783447035248 Wiesbaden, Germany 65–85 The quest for the legendary Tulsidās
दादूपन्थी भक्तमाल -- राघवदास कृत राजस्थानी ग्रन्थ (१७२० ई० में रचित) । इसमें दादूपन्थ के १२०० सन्तों का जीवनचरित है।
भाई गुरदास द्वारा गुरुमुखी में टीका १८वीं शताब्दी मेंCallewaert Winand M. Mukunda Lāṭha 1989 The Hindī Padāvalī of Nāmdev Peeters Publishers 9789068311075 24 Do we know Nāmdev?
भक्तमालप्रदीपन -- हिन्दी भाषा तथा फारसी लिपि में तुलसीराम द्वारा १८वीं शताब्दी में रचित
लोलदास द्वारा बांग्ला भाषा में "भक्तमाल" (१८वीं शताब्दी)
'भक्तकल्पद्रुम' नाम से प्रताप सिंह द्वारा भक्तमाल का हिन्दी अनुवाद (१९वीं शताब्दी)
'श्री भक्तमाल : टीका तिलक और नामावली सहित' नाम से सीतारामशरण भगवान प्रसाद द्वारा भक्तमाल का हिन्दी अनुवाद (1903 में)
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
भक्तमल डाउनलोड करें https://web.archive.org/web/20220712023151/https://pdfbooks.hindihearts.in/2022/01/shri-bhaktmal-shri-nabha-ji-hindi-book.html 12 जुलाई 2022
भक्तमाल
श्रीभक्तमाल
ब्रजभाषा का जीवनी साहित्य
श्रीभक्तमाल (टीका सहित)
श्री भक्तमाल
श्रेणी:हिन्दी
श्रेणी:ग्रन्थ