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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

स्वामी सत्यपति परिव्राजक

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स्वामी सत्यपति परिव्राजक ( १९२७ -- ४ फरवरी २०२१) आर्यसमाज के सन्यासी, योगदर्शन के प्रकाण्ड विद्वान तथा लेखक, उपदेशक थे। उनका मूल नाम 'मुंशीखान' था। उन्हें योग में व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए पूरे भारत की यात्रा करने के लिए भी जाना जाता है। आपने गुजरात के अहमदाबाद से लगभग ९० किसी. की दूरी पर रोजड़ नामक स्थान पर एक विस्तृत भूभाग पर दर्शन योग महाविद्यालय की स्थापना की। स्वामी सत्यपति का जन्म सन 1927 में हरियाणा के रोहतक जिले के फरमाणा गांव में एक मुसलमान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम मोलड़ खान और माता का नाम बांखा देवी था। उनकी आर्थिक स्थिति अत्यन्त दयनीय थी। पिता कपड़े धोने का कम करते थे। उन्हें बाँसुरी बजाने का बड़ा शौक था। उन्हें 19 वर्ष की आयु तक कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली थी। उन्होंने गांव के ही कुछ लोगों की मदद से स्वयं अपनी पढ़ाई-लिखाई की पहल की और हिन्दी वर्णमाला सीखी। वर्ष 1947 में जब भारत का विभाजन हुआ तो उन्होंने अपनी आंखों के सामने हजारों निर्दोष लोगों, महिलाओं और बच्चों की हत्या होते देखी। उस नरसंहार ने उन्हें इतना व्यथित किया कि उनके हृदय में वैराग्य की भावना पैदा हो गई। इसके बाद उन्होंने अपने सारे पारिवारिक संबंधों को समाप्त कर दिया और 'सत्य' की खोज में निकल पड़े। लगभग २२ वर्ष की आयु में उन्होने घर छोड़ दिया। पहले दयानन्द मठ गये और फिर झज्जर गुरुकुल चले गये। झज्जर गुरुकुल के स्वामी ओमनन्द ने उन्हें मुंशीखान से मनुदेव में दीक्षित किया। यहीं उन्होंने ठीक से पढ़ना-लिखना सीखा और शीघ्र संस्कृत के प्रकाण्ड पण्डित हो गये। मनुदेव ने मुस्लिम मन्यताओं को छोड़कर आर्य समाज के सिद्धान्तों को धारण कर लिया। मुस्लिम परिवार में जन्मा और बना योग दर्शन का प्रकाण्ड विद्वान सबसे अधिक वे महर्षि दयानन्द सरस्वती की शिक्षाओं से प्रेरित थे। उन्होंने अष्टांग योग की भी दीक्षा ली। प्रामाणिक पतंजलि योग के प्रसार के लिए उन्होंने अपने जीवन को समर्पित कर दिया। योग शिविरों का आयोजन करके उन्होंने हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित किया। वेद-दर्शन,उपनिषदों का ज्ञान, प्रशिक्षण और सहायता देने के लिए उन्होंने दर्शन योग महाविद्या, आर्ष गुरुकुल और विश्व कल्याण धर्मार्थ ट्रस्ट जैसे आदर्श संस्थानों की स्थापना की। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ योगदर्शनम्जुलाई 2026 InternetArchiveBot (स्वामी सत्यप्ति परिव्राजक द्वारा कृत योग की व्याख्या) श्रेणी:आर्य समाज