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जम्हाई
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कड़ी=https://en.wikipedia.org/wiki/File:Yawning_Infant,_August_2018.jpg|right|अंगूठाकार|एक बच्चा जम्हाई लेता हुआ
जम्हाई या उबासी (अंग्रेज़ी: Yawn) एक स्वाभाविक रिफ्लेक्स क्रिया है जो लगभग सभी कशेरुकी जीवों (vertebrate) में दिखी जाती है। इसमें व्यक्ति या प्राणी का मुँह धीरे-धीरे खुलता है, गहरी साँस ली जाती है (दीर्घ प्रेरक श्वास), इसके बाद कुछ क्षणों के लिए मुँह खुला रहता है और फिर मांसपेशियों के तनाव के चरम के साथ तीव्र श्वास-निकास (exhalation) होता है। इस पूरी प्रक्रिया में सामान्यत: कुछ सेकंड लगते हैं, परंतु यह शरीर की कई जैविक और मानसिक अवस्थाओं से जुड़ी होती है।Barbizet J 1958 Yawning J Neurol Neurosurg Psychiatry 21 3 203–209 10.1136/jnnp.21.3.203 497319 13576171Provine RR 1986 Yawning as a stereotyped action pattern and releasing stimulus Ethology 72 2 109–122 1986Ethol..72..109P 10.1111/j.1439-0310.1986.tb00611.x
मछलियों और पक्षियों में जम्हाई को मुँह के धीरे-धीरे खुलने, लगभग ३ सेकंड तक खुला रहने और तत्पश्चात मुँह के तीव्र रूप से बंद हो जाने की क्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है।Baenninger R 1987 Some comparative aspects of yawning in Betta splendens, Homo sapiens, Panthera leo, and Papio sphinx https://archive.org/details/sim_journal-of-comparative-psychology_1987-12_101_4/page/348 J Comp Psychol 101 4 349 10.1037/0735-7036.101.4.349वैज्ञानिकों ने पाया है कि लगभग सभी कशेरुकी जीव - स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप, उभयचर और यहाँ तक कि मछलियाँ भी जम्हाई लेती हैं।The Mystery of Yawning in Physiology and Disease Seuntjens Wolter 2010 978-3-8055-9404-2 Frontiers of Neurology and Neuroscience 28 55–62 The Hidden Sexuality of the Yawn and the Future of Chasmology 10.1159/000307081 20357463Mikami Akichika January 2011 Olivier Walusinski (Ed.): The Mystery of Yawning in Physiology and Disease: Karger, Basel, 2010, 160 pp Primates 52 1 97–99 10.1007/s10329-010-0222-6 16749981Teive Hélio A. G. Munhoz Renato P. Camargo Carlos Henrique F. Walusinski Olivier July 2018 Yawning in neurology: a review Arquivos de Neuro-Psiquiatria 76 7 473–480 10.1590/0004-282X20180057 30066799 51890021 free
जम्हाई का सटीक कारण आज भी पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं है, परंतु इसके कई वैज्ञानिक सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं। कुछ प्रमुख सिद्धांत इस प्रकार हैं:
मस्तिष्क का ताप-नियंत्रण सिद्धांत (Brain Cooling Hypothesis): इस सिद्धांत के अनुसार जम्हाई लेने से मस्तिष्क का तापमान नियंत्रित होता है। गहरी साँस और जबड़े की मांसपेशियों की गति से रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे मस्तिष्क को ठंडक मिलती है और उसकी कार्यक्षमता संतुलित रहती है।
ऑक्सीजन-आपूर्ति सिद्धांत (Oxygen Theory): पुराने सिद्धांतों के अनुसार जम्हाई शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने और कार्बन डाइऑक्साइड को निकालने की प्रक्रिया से जुड़ी है। हालांकि आधुनिक शोधों में इस सिद्धांत को कम समर्थन मिला है।
सामाजिक एवं संक्रामक जम्हाई (Contagious Yawning): मनुष्यों और कुछ जानवरों (विशेष रूप से चिंपांज़ी, कुत्ते आदि) में जम्हाई "संक्रामक" होती है — अर्थात् किसी को जम्हाई लेते देखना या उसके बारे में सोचना भी दूसरों को जम्हाई लेने के लिए प्रेरित कर सकता है। इसे सहानुभूति (empathy) और सामाजिक जुड़ाव से संबंधित माना जाता है।
नींद और थकान का संबंध: जम्हाई प्रायः थकान, नींद या ऊब (boredom) की अवस्था में ली जाती है। यह मस्तिष्क को सतर्क बनाए रखने या शरीर को विश्राम के लिए तैयार करने का संकेत भी हो सकती है।
जम्हाई के वैज्ञानिक अध्ययन को कास्मोलॉजी कहा जाता है, जो इसके न्यूरोलॉजिकल, शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पहलुओं का विश्लेषण करता है।
संदर्भ
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श्रेणी:निद्रा-सम्बन्धी शरीर क्रियाएँ
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