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ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम
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ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम कभी-कभी इस प्रकार से कहा जाता है:
परम शून्य ताप वाले विशुद्ध क्रिस्टल की एण्ट्रॉपी शून्य होती है।
शून्य केल्विन ताप पर निकाय अपनी न्यूनतम सम्भव ऊर्जा वाली अवस्था में होगा, तथा ऊष्मागतिकी के तृतीय नियम का यह कथन तभी सत्य होगा यदि विशुद्ध क्रिस्टल (perfect crystal) की केवल एक ही न्यूनतम ऊर्जा वाली अवस्था हो। एण्ट्रॉपी का सम्बन्ध सभी सम्भव सूक्ष्म अवस्थाओं की संख्या से है। चूंकि शून्य केल्विन ताप पर केवल एक सूक्ष्म-अवस्था उपलब्ध है, अतः एण्ट्रॉपी अवश्य ही शून्य होगी।
नर्स्ट-साइमन (Nernst-Simon) का कथन इस प्रकार है:
शून्य केल्विन तप पर व्युत्क्रमणीय समतापी प्रक्रम से गुजरता हुए किसी भी संघनित निकाय का एण्ट्रॉपी परिवर्तन शून्य की तरफ अग्रसर होता है। यहाँ संगनित निकाय से आशय द्रव एवं ठोस से है। Satyapal Yadav
इन्हें भी देखें
ऊष्मागतिकी का इतिहास
ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम
ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम
ऊष्मा इंजन
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श्रेणी:ऊष्मागतिकी के नियम