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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

सुभाष काक

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सुभाष काक (जन्म 26 मार्च 1947) प्रमुख भारतीय-अमेरिकी कवि, दार्शनिक और वैज्ञानिक हैं। वे ऐतिहासिक संशोधनवादी (historical revisionist) हैं। उनके कई ग्रन्थ वेद, कला और इतिहास पर भी प्रकाशित हुए हैं। वे अमेरिका की ओक्लाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी-स्टिलवाटर में इलेक्ट्रिकल एवं कंप्यूटर इंजीनियरिंग स्कूल के रीजेंट्स प्रोफेसर हैं तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग के मानद विजिटिंग प्रोफेसर हैं। वे भारत के प्रधानमंत्री की विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सलाहकार परिषद (पीएम-एसटीआईएसी) के सदस्य हैं। सुभाष काक ने विज्ञान के इतिहास, विज्ञान के दर्शन, पुराखगोलिकी और गणित के इतिहास पर लेख प्रकाशित किए हैं। उन्होंने पुराखगोलिकी पर भी लेख प्रकाशित किए हैं और आर्यों के स्वदेशी होने के विचार का समर्थन किया है। कई विद्वानों ने इन विषयों पर उनके सिद्धांतों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और उनके लेखन की कड़ी आलोचना की है। 2019 में, भारत सरकार ने उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित किया। == जीवन परिचय == उनका जन्म श्रीनगर, कश्मीर में राम नाथ काक और सरोजिनी काक के यहाँ हुआ। उनकी शिक्षा कश्मीर और दिल्ली में हुई। उन्होंने श्रीनगर के क्षेत्रीय इंजीनियरी महाविद्यालय से इंजीनिअरी में स्नातक डिग्री प्राप्त की। अब इस कॉलेज का नाम राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कर दिया गया है। उन्होंने १९७० में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से पी०एच०डी० की। == कार्यक्षेत्र == सुभाष काक का कार्यक्षेत्र विविधता से भरा हुआ है। वे व्यवसाय से एक संगणक विज्ञानी हैं। वे भारतीय दर्शन एवं प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्परा पर लिखते और बोलते हैं। इसके साथ-साथ वे काव्यरचना भी करते हैं। === कविता और जीवन का मर्म === उनकी कविता जीवन की पहेलियों पर प्रकाश डालती है। सुभाष काक की शैली सरल है पर इस सरलता के भीतर विचारों की जटिलता छिपी हुई है। वह प्रकृतिवाद के समर्थक हैं। प्रकृति के माध्यम से वह जटिल मानव भाव प्रस्तुत करते हैं। विख्यात विद्वान और आलोचक गोविन्द चन्द्र पाण्डे ने उनकी कविता की अंग्रेजी के विलियम वर्ड्सवर्थ की रचनाओं से तुलना की है। पाण्डे जी लिखते हैं -- उनकी भाषा और शैली आन्तरिक गाम्भीर्य को सरल प्रासादिकता से प्रस्तुत करती है जैसी कभी शेषनाग सरोवर का सलिल। उनकी भाव-भूमि स्मृतियों की पच्चीकारी से अलंकृत है। उनके बिम्ब प्रकृति और सहज मानवता से बराबर जुड़े रहते हैं। इन कविताओं को पढ़ते हुए ऐसा लगता है कि न सिर्फ कवि एक बीते शैशव और सुदूर प्रदेश की स्मृतियों से अभिभूत है बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर की बदलती परिस्थिति की आशंकाओं से भी चिन्तित है। उनकी कविताएं अनुभव रस से सिक्त हैं, वे उलझी बौद्धिकता और आन्तरिक विसंगतियों से दुर्बोध नहीं हैं। उनकी कविता ने हिन्दी के समकालीन मार्ग और विधि से दूर नये रूप की स्थापना का प्रयत्न किया है। उनकी कविता के कई संग्रह प्रकाशित -- और अन्य भाषाओं में अनूदित -- हो चुके हैं। === संस्कृति और दर्शन === वे भारतीय विद्या में निपुण और साहित्य, दर्शन, कला, एवं संस्कृति के सहृद-मर्मज्ञ हैं। वेदकाल का बहुत समय से लुप्त उन्होंने एक ज्योतिष ढूंढ निकाला है जिससे भारत की संस्कृति, विज्ञान और कालक्रम पर नया प्रकाश पड़ता है। इनमें से सबसे रोचक १०८ अंक, जो भारतीय संस्कृति में बहुत आता है, की व्याख्या है। प्रमुख देवी-देवताओं के १०८ नाम हैं, जपमाला में १०८ दाने, १०८ धाम हैं, आदि। इनके शोध ने दिखाया है कि वैदिक काल में यह ज्ञान था कि सूर्य और चन्द्रमा पृथिवी से क्रमशः लगभग १०८ गुणा निजि व्यास की दूरी पर हैं। आधुनिक ज्योतिष ने तो यह भी दिखाया है कि सूर्य का व्यास पृथिवी के व्यास से लगभग १०८ गुणा है। पिण्ड और ब्रह्माण्ड के समीकरण के कारण मानव अपने व्यक्तिगत आध्यात्मिक यात्रा में भी इस संख्या को पाता है, यह वेद की धारणा है। इस शोध का विद्वानों ने स्वागत किया है। अमेरिका के वेदपण्डित वामदेव शास्त्री ने इस शोध को "स्मारकीय उपलब्धि" (monumental achievement) कहा है। कनाडा के विख्यात आचार्य क्लास क्लास्टरमेयर के अनुसार, "मेरी बहुत देर की समझ थी कि ऋग्वेद में भाषाशास्त्र और इतिहास के परे बहुत कुछ था। यह है वह!... यह एक युगान्तककारी खोज (epoch-making discovery) है।" उनका दार्शनिक दृष्टिकोण पुनर्गमनवाद से प्रेरित है, जिसके अनुसार विश्व में प्रतिरूप विभिन्न अनुमाप में पुनरावृत, अथवा दोहरते, हैं और कवि और कलाकार इसीका चित्रण करते हैं। इसका प्रयोग कर उन्होंने भारतीय कला और संस्कृति की विवेचना की है। उनके अनुसार पुनर्गमन ही विश्व का समझना सम्भव करता है। वे संस्कृत के भी विद्वान हैं, इस भाषा में उन्होंने वेदान्त के नए सूत्र (प्रज्ञा सूत्र) की रचना की है। === विज्ञान की सीमाएं === विज्ञान में इनका योगदान भौतिक शास्त्र और संगणन शास्त्र पर हुआ है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धि (en:Artificial Intelligence) की सीमा पर शोध किया है और वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि संगणक बुद्धि कभी भी मानव बुद्धि की सीमा पर नहीं पहुंच सकती है। उनके अनुसार भौतिक सिद्धान्तों का एकीकरण - जो पिछले कुछ दशकों में विज्ञान का प्रमुख लक्ष्य रहा है - असफल रहेगा। पार्थव और आध्यात्मिक में निरन्तर द्वन्द्व बना रहेगा। वह अपने यमल परोक्षक के समाधान के कारण समाचार पत्रों में बहुत चर्चित रहे हैं। == ग्रन्थ == मृतक नायक (The Conductor of the Dead) लन्दन सेतु (The London Bridge) मन्दिर की सीढ़ियां ईश्वर रहस्य एक ताल, एक दर्पण (1999)[2] Archived 2006-09-27 at the वेबैक मशीन प्रज्ञा सूत्र (2003) चिनार उपवन (The Chinar Garden) [3] मिट्‍टी का अनुराग (2007) [4] अन्य ग्रन्थ The Nature of Physical Reality (भौतिक तथ्यता का स्वरूप) (1986)25th Anniversary Edition Archived 2015-01-20 at the वेबैक मशीन Patanjali and Cognitive Science (पतञ्जलि और प्रज्ञान शास्त्र) (1987)Second edition, OSU Archived 2015-01-19 at the वेबैक मशीन India at Century's End (भारत, शताब्दी के अन्त में) (1994) en:In Search of the Cradle of Civilization ([सभ्यता के स्रोत की खोज) (1995, 2001) en:The Astronomical Code of the Rigveda (ऋग्वेद का ज्योतिषीय कोड)) (2000)Third edition, OSU Archived 2015-01-20 at the वेबैक मशीन Computing Science in Ancient India (प्राचीन भारत का संगणन शास्त्र) (2001) The Wishing Tree: The Presence and Promise of India (कल्पतरु : भारत की उपस्थिति एवं प्रतिश्रुति) (2001) The Gods Within (आन्तरिक देवता) (2002) The Asvamedha (अश्वमेध यज्ञ) (2002) en:The Architecture of Knowledge (ज्ञान की संरचना) (2004) Recursionism and Reality (पुनर्गमनवाद और याथार्थ) (2005)"Recursionism and Reality: Representing and Understanding the World" Archived 2015-01-20 at the वेबैक मशीन == संदर्भ == == बाह्य कडियां == सुभाष काक की रचनाएँ कविता कोश में अनुभूति पत्रिका में कविता कविता कोश में सुभाष काक The Secrets Of Ishbar (Poems On Kashmir by Subhash Kak) भौतिक और संगणन शास्त्र की arXiv रचनाएं लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के जालपृष्ठ पर काक के प्रकाशनों की सूची ओक्लाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी केजालपृष्ठ पर काक के बारे में Archived 2015-01-19 at the वेबैक मशीन मस्तिष्क और चेतना भाषण साक्षात्कार राजीव श्रीनिवासन् द्वारा रीडिफ साक्षात्कार पी.बी.एस. साक्षात्कार Archived 2004-12-07 at the वेबैक मशीन Closer to Truth