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411 समाचार
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तुवालुवी राजतंत्र

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black रानी तुवालू की Coat of arms of Tuvalu.svg तुवालू का कुलांक Elizabeth II greets NASA GSFC employees, May 8, 2007 edit.jpg महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय Her राजकुमार चार्ल्स, वेल्स के राजकुमार एलिज़ाबेथ द्वितीय 1 अक्टूबर 1978 तुवालुवी राजतंत्र, तुवालू की संवैधानिक राजतंत्र है। तुवालू के एकाधिदारुक को तुवालू और यूनाइटेड किंगडम समेत कुल १५ प्रजाभूमियों, का सत्ताधारक एकराजीय संप्रभु होने का गौरव प्राप्त है। वर्तमान सत्ता-विद्यमान शासक, ६ फरवरी वर्ष १९५२ से महारानी एलिजाबेथ द्वितीय हैं। अन्य राष्ट्रमण्डल देशों के सामान ही तुवालू की राजनीतिक व्यवस्था वेस्टमिंस्टर प्रणाली पर आधारित है, जिसमें राष्ट्रप्रमुख का पद नाममात्र होता है, और वास्तविक प्रशासनिक शक्तियां शासनप्रमुख पर निहित होते हैं। तुवालू सैद्धांतिक रूप से एक राजतंत्र है, और तुवालू के शासक के पदाधिकारी इसके राष्ट्रप्रमुख होते हैं, हालाँकि शासक की सारी संवैधानिक शक्तियों का अभ्यास, उनके प्रतिनिधि के रूप में, तुवालू के गवर्नर-जनरल करते हैं। अधिराट् यदी स्त्री हो तो उन्हें " तुवालू की रानी" के नाम हे संबोधित किया जाता है, और एक पुरुष अधिराट् को " तुवालू के राजा के नाम से संबोधित किया जाता है। व्युत्पत्ति राष्ट्रमण्डल प्रजाभूमि तुवालू में राजतंत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, ब्रिटिश औपनिवेशिकता में है, जब १८वीं सदी में ब्रिटेन ने अपने साम्राज्य का विस्तार किया और विश्व के विभिन्न कोनों में अपने उपनिवेश स्थापित किया। धीरे-धीरे इन उपनिवेशों को अपनी प्रशासन पर संप्रभुता प्रदान कर दी गई, और वेस्टमिंस्टर की संविधि, 1931 द्वारा इन सारे राज्यों को राष्ट्रमण्डल के अंदर, पूर्णतः समान पद दे दिया गया था। जो पूर्व उपनिवेश, ब्रिटिश शासक को आज भी अपना शासक मानते है, उन देशों को राष्ट्रमण्डल प्रजाभूमि या राष्ट्रमण्डल प्रदेश कहा जाता है। इन अनेक राष्ट्रों के चिन्हात्मक समानांतर प्रमुख होने के नाते, ब्रिटिश एकराट् स्वयं को राष्ट्रमण्डल के प्रमुख के ख़िताब से भी नवाज़ते हैं। हालांकि शासक को आम तौरपर ब्रिटिश शासक के नाम से ही संबोधित किया जाता है, परंतु सैद्धान्तिक तौर पर सारे राष्ट्रों का संप्रभु पर सामान अधिकार है, तथा राष्ट्रमण्डल के तमाम देश एक-दुसरे से पूर्णतः स्वतंत्र और स्वायत्त हैं। राजपरिवार ब्रिटिश राजपरिवार संप्रभु के परिवार के सबसे करीबी सदस्यों के समूह को कहाजाता है। हालाँकि, ऐसा कोई दृढ़ नियम या विधान नहीं है, जो यह सुनियोजित करता हो की किन व्यक्तियों को इस विशेष समूह में रखा जाए, नाही कोई ऐसा विधान है जो राजपरिवार को विस्तृत रूप से परिभाषित करता हो। आम तौर पर ब्रिटेन के उन व्यक्तियों को जिनपर हिज़/हर मैजेस्टी(HM) या हिज़/हर रॉयल हाइनेस (HRH) का संबोधन रखते हैं, को आम तौर पर राजपरिवार का सदस्य माना जाता है। राजपरिवार में केवल संप्रभु को ही संवैधानिक कर्तव्य व पद प्राप्त हैं। संप्रभु और उसके तत्काल परिवार के सदस्य देश के विभिन्न आधिकारिक, औपचारिक और प्रतिनिधित्वात्मक कार्यों का निर्वाह करते हैं। उत्तराधिकार राष्ट्रमण्डल प्रदेशों के बीच का संबंध इस प्रकार का है की उत्तराधिकार को अनुशासित करने वाले किसी भी बिधान का सारे देशों की एकमत स्वीकृति आवश्यक है। यह बाध्यता वेस्टमिंस्टर की संविधि, १९३१ द्वारा लागू की गयी थी। सिंघासन पर उत्तराधिकार, विभिन्न ऐतिहासिक संविधिओं द्वारा अनुशासित है। ऐतिहासिक रूप से उत्तराधिकार को पुरुष-वरियति सजातीय ज्येष्ठाधिकार के सिद्धान्त द्वारा अनुशासित किया जाता रहा है, जिसमे पुत्रों को ज्येष्ठ पुत्रियों पर प्राथमिकता दी जाती रही है, तथा एक ही लिंग के ज्येष्ठ संतानों को पहली प्राथमिकता दी जाती है। उत्तराधिकार संबंधित नियम केवल संसदीय अधिनियम द्वारा परिवर्तित किये जा सकते हैं, जिन्हें सारे प्रजाभूमियों की स्वीकृति समेत पारित होना अनिवार्य है। २०११ में राष्ट्रमण्डल की बैठक में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने यह घोषणा की थी कि तमाम राष्ट्रमण्डल प्रदेश पुरुष प्राथमिकता की परंपरा को समाप्त करने के लिए राज़ी हो गए हैं, तथा भविष्य के शासकों पर कैथोलिक व्यक्तियों से विवाह करने पर रोक को भी रद्द करने पर सब की स्वीकृति ले ली गयी थी। परंतु क्योंकि ब्रिटिश अधिराट् चर्च ऑफ़ इंग्लैंड के प्रमुख भी होते हैं, अतः कैथोलिक व्यक्तियों को सिंघासन उत्तराधिकृत करने पर रोक लगाने वाले विधान को यथास्त रखा गया है। इस विधेयक को २३ अप्रैल २०१३ को शाही स्वीकृति मिली, तथा सारे राष्ट्रमण्डल प्रदेशों में सम्बंधित विथान पारित होने के पश्चात् मार्च २०१५ को यह लागू हुआ। सिंघासन का कोई उत्तराधिकारी, स्वेच्छा से अपना उत्तराधिकार त्याग नहीं कर सकता है। वित्त तुवालू की सरकार संप्रभु, राजपरिवार या देश के बाहर स्थित शाही निवासों के रखरखाव के समर्थन हेतु किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं प्रदान करती है। हालांकि, संप्रभु या शाही परिवार के दौरे के समय आने वाले खर्चों का प्रभार सरकार उठाती है। इसके अलावा, गवर्नर-गवर्नर-जनरल के आधिकारिक खर्चे भी सरकार उठाती है। कार्यपद के कर्तव्य सत्ताधारी रानी/राजा पर सैद्धांतिक रूप से एक संवैधानिक शासक के अधिकार निहित है, परंतु परंपरानुसार इन सारी शक्तियों का अभ्यास केवल संसद और सरकार के विनिर्देशों के अनुसार ही, शासक के प्रतिनिधि होने के नाते, महाराज्यपाल द्वारा कार्यान्वित करने के लिए बाध्य हैं। अतः अन्य राष्ट्रमण्डल प्रजाभूमियों के समान ही, यह एक संसदीय सम्राज्ञता है। संसदीय शासक होने के नाते, शासक के सारे संवैधानिक अधिकार, निष्पक्ष तथा गैर-राजनैतिक कार्यों तक सीमित हैं, जो सैद्धान्तिक तौर पर शासक के अधिकार हैं, परंतु वास्तविक रूप से इन्हें केवल गवर्नर-जनरल द्वारा ही उपयोग किया जाता है। जबकि राजनैतिक-शक्तियों का अभ्यय गवर्नर-जनरल द्वारा सरकार और अपने मंत्रियों की सलाह और विनिर्देशों पर ही करते हैं। इन्हें भी देखें राष्ट्रमण्डल प्रजाभूमि ब्रिटिश राजतंत्र राष्ट्रमण्डल के प्रमुख सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:राष्ट्रमण्डल प्रजाभूमि श्रेणी:तुवालू की राजनीति