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सघन पिंड
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सघन पिंड (Compact object) या सघन तारा एक सामूहिक शब्द है जिसका उपयोग मुख्य रूप से तीन प्रकार के चरम खगोलीय पिंडों के लिए किया जाता है: श्वेत वामन, न्यूट्रॉन तारे, और ब्लैक होल। ये पिंड तारों के जीवन चक्र के अंतिम चरण का प्रतिनिधित्व करते हैं। जब किसी तारे का परमाणु ईंधन समाप्त हो जाता है और वह नाभिकीय संलयन बंद कर देता है, तो तारे का विशाल गुरुत्वाकर्षण उसे अंदर की ओर सिकोड़ने लगता है। इस 'गुरुत्वाकर्षण पतन' के परिणामस्वरूप बचा हुआ मृत अवशेष ही 'सघन पिंड' कहलाता है।"Astronomers Just Narrowed Down The Source of Those Powerful Radio Signals From Space"अगस्त 2026 InternetArchiveBot [ "The Host Galaxies and Progenitors of Fast Radio Bursts Localized with the Australian Square Kilometre Array Pathfinder"| "The Host Galaxies and Progenitors of Fast Radio Bursts Localized with the Australian Square Kilometre Array Pathfinder"]
सघन पिंडों के प्रकार
मूल तारे के द्रव्यमान के आधार पर, गुरुत्वाकर्षण पतन के बाद मुख्य रूप से तीन प्रकार के सघन पिंड बनते हैं:
श्वेत वामन: हमारे सूर्य जैसे कम से मध्यम द्रव्यमान वाले तारों का अंत एक श्वेत वामन के रूप में होता है। इनमें कोई नाभिकीय संलयन नहीं होता, बल्कि ये क्वांटम यांत्रिकी के एक सिद्धांत, "इलेक्ट्रॉन अपभ्रष्टता दबाव" द्वारा गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध खुद को ढहने से रोकते हैं। एक सामान्य श्वेत वामन का द्रव्यमान सूर्य के बराबर होता है, लेकिन इसका आकार पृथ्वी जितना छोटा होता है। इनकी अधिकतम द्रव्यमान सीमा (लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान) को चंद्रशेखर सीमा कहा जाता है।Carroll Bradley W. Ostlie Dale A. An Introduction to Modern Astrophysics Cambridge University Press 2017 978-1108422161 560-565
न्यूट्रॉन तारा: यदि मूल तारे का द्रव्यमान बहुत अधिक है, तो पतन के दौरान इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन मिलकर न्यूट्रॉन बन जाते हैं। परिणामस्वरूप एक न्यूट्रॉन तारा बनता है, जो "न्यूट्रॉन अपभ्रष्टता दबाव" द्वारा संतुलित रहता है। ये पिंड इतने सघन होते हैं कि इनके एक चम्मच पदार्थ का वज़न पृथ्वी पर अरबों टन हो सकता है। इनका व्यास केवल 10 से 20 किलोमीटर के बीच होता है।
ब्लैक होल: यदि किसी तारे का अवशेष न्यूट्रॉन तारे की अधिकतम सीमा (टोलमैन-ओपेनहाइमर-वोल्कॉफ सीमा) से भी अधिक भारी होता है, तो कोई भी भौतिक बल उसके गुरुत्वाकर्षण पतन को रोक नहीं सकता। यह पूरी तरह से ढह कर एक विलक्षणता में बदल जाता है, जहाँ घनत्व अनंत हो जाता है। इसके चारों ओर के उस क्षेत्र को जहाँ से प्रकाश भी बाहर नहीं निकल सकता, 'घटना क्षितिज' कहा जाता है।Lattimer James M. Prakash Madappa Neutron Star Observations: Prognosis for Equation of State Constraints Physics Reports 442 1-6 2007 109-165 10.1016/j.physrep.2007.02.003
सैद्धांतिक और विदेशी सघन पिंड
उपर्युक्त तीन मुख्य प्रकारों के अलावा, सैद्धांतिक भौतिकी कुछ अन्य प्रकार के "विदेशी सघन पिंडों" के अस्तित्व की भी भविष्यवाणी करती है, हालांकि वे अभी तक देखे नहीं गए हैं:
क्वार्क तारा: यह माना जाता है कि अत्यधिक भारी न्यूट्रॉन तारों के केंद्र में दबाव इतना अधिक हो सकता है कि न्यूट्रॉन स्वयं अपने मूलभूत कणों, यानी 'क्वार्क' में टूट जाएं। ऐसे पिंड को क्वार्क तारा कहा जाएगा।
बोसॉन तारा: यह एक काल्पनिक खगोलीय पिंड है जो मानक पदार्थ (फर्मीऑन) के बजाय पूरी तरह से बोसॉन कणों से बना होता है, जिन्हें संभवतः डार्क मैटर से जोड़ा जा सकता है।Glendenning Norman K. Compact Stars: Nuclear Physics, Particle Physics, and General Relativity Springer Science & Business Media 2000 310-315
खगोलीय महत्व
सघन पिंड ब्रह्मांड के कुछ सबसे चरम और ऊर्जावान वातावरण प्रदान करते हैं। जब दो सघन पिंड (जैसे दो न्यूट्रॉन तारे या ब्लैक होल) एक-दूसरे की परिक्रमा करते हुए आपस में टकराते हैं, तो वे अंतरिक्ष-समय में लहरें पैदा करते हैं, जिन्हें गुरुत्वाकर्षण तरंगें कहा जाता है। 2015 में LIGO (लेज़र इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्ज़र्वेटरी) द्वारा पहली बार इन गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाया गया था, जिसने खगोल भौतिकी में एक नए युग की शुरुआत की। इसके अलावा, एक्स-रे बायनेरिज़ और पल्सर जैसी परिघटनाएं सीधे सघन पिंडों से ही जुड़ी हैं।https://www.ligo.caltech.edu/page/gravitational-waves What are Gravitational Waves? LIGO Caltech
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
नासा (NASA) - खगोल भौतिकी और सघन पिंड
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