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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ख़ादिम-उल-हरमैन-उल-शरीफ़ैन

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ख़ादिम दो मुक़द्दस मसाजिद File:Salman of Saudi Arabia - 2020 (49563590728) (cropped).jpg Custodian of the Two Holy Mosques (formal) or साहब-ए-जलाल (diplomatic relations) 12th century आम ज़माना (दर हक़ीक़त)November 1986 (अज़रूए-क़ानून) Al-Yamamah Palace (Riyadh) Al-Salam Palace (Jeddah) ar خَادِمُ ٱلْحَرَمَيْنِ ٱلشَّرِيفَيْنِ Khādim al-Ḥaramayn aš-Šarīfayn ar सलाहुद्दीन अय्यूबी शाह सलमान 23 January 2015 alharamain.gov.sa ख़ादिम-उल-हरमैन-उल-शरीफ़ैन (Custodian of the Two Holy Mosques) (خادم الحرمين الشريفين) एक सालेह शाही ख़िताब है जिसे बहुत से मुस्लिम हुक्मरानों ने इस्तेमाल किया है बशमूल अय्यूबी ख़ानदान, ममलूक सलातीन मिस्र, सलातीन उस्मानी और मौजूदा दौर के शाहान-ए-सऊदी अरब। ख़ादिम-उल-हरमैन-उल-शरीफ़ैन के मायने "दो मुक़द्दस हरम (मस्जिदुल हराम व मस्जिद-ए-नबवी) के ख़ादिम" के हैं। तारीख़ तारीख़ी तौर पर कहा जाता है कि सबसे पहले मर्तबा इस ख़िताब का इस्तेमाल सलाहुद्दीन अय्यूबी के लिए गया गया था।"Story behind the king’s title | Arab News" https://web.archive.org/web/20160804084234/http://www.arabnews.com/saudi-arabia/news/695351इसके बाद ममलूक हुक्मरानों को शिकस्त देने के बाद उस्मानियों ने मक्का और मदीना फ़तेह किया तो सुल्तान सलीम-ए-अव्वल ने ये ख़िताब अपनाया। सलीम-ए-अव्वल के बाद मुहम्मद वहीदुद्दीन (जो सुल्तनत-ए-उस्मानिया के आख़िरी सुल्तान थे) तक तमाम उस्मानी सुल्तानों के लिए ये ख़िताब इस्तेमाल किया गया। सऊदी अरब के फ़रमानरवों में सबसे पहले शाह फ़हद बिन अब्दुल अज़ीज़ ने ये ख़िताब 1986 में अपनाया। इससे पहले सऊदी बादशाहों के लिए साहब-ए-जलाल का लफ़्ज़ इस्तेमाल किया जाता था जसे शाह फ़हद ने तब्दील करा कर ख़ादिम-उल-हरमैन-उल-शरीफ़ैन कर दिया। शाह फ़हद की वफ़ात के बाद शाह अब्दुल्लाह बिन अब्दुल अज़ीज़ और शाह सुलैमान बिन अब्दुल अज़ीज़ आल सऊद ने भी ख़िताब अपनाया। मज़ीद देखिये हरमैन-ए-शरीफ़ैन साहब-ए-जलाल हवाले जात