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411 समाचार
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मग़फूर अहमद अजाज़ी

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श्रेणी:Articles with hCards डॉ मग़फूर अहमद एजाज़ी Maghfoor Ajazi.jpg स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सेवक डॉ मग़फूर अहमद एजाज़ी yes 1900 03 03 मुजफ्फरपुर, भारत yes 1966 09 26 1900 03 03 मुजफ्फरपुर, भारत भारतीय भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी तथा बड़े नेता इस्लाम स्वतंत्रता सेनानी, लेखक, कवि, समाज सेवक, राजनीतिक कार्यकर्ता भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम Signature of Maghfoor Ahmad Ajazi.jpg मग़फूर अहमद अजाज़ी (3 मार्च 1900 - 26 सितंबर 1966) बिहार के एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में प्रमुख भूमिका अदा की थी। प्रारंभिक जीवन अजाज़ी का जन्म 3 मार्च 1900 को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा ब्लॉक के दिहुली गाँव में हुआ था।सज्जाद मोहम्मद मग़फूर अहमद एजाज़ी: एक स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय लोकतंत्र के निर्माता http://twocircles.net/2013jan06/maghfur_aijazi_freedomfighter_and_builder_indian_democracy.html#.VPkHguHN45w TwoCircles.net 6 जनवरी 2013 5 मार्च 2015 26 दिसंबर 2018 https://web.archive.org/web/20181226065811/http://twocircles.net/2013jan06/maghfur_aijazi_freedomfighter_and_builder_indian_democracy.html#.VPkHguHN45w dead उनके पिता हाफिजुद्दीन हुसैन और दादा इमाम बख्श जमींदार थे और उनकी माता का नाम महफूजुन्निसा था। उनके नाना रेयत हुसैन सीतामढ़ी में एक वकील थे।बिहारी लाल फितरत (1883) आइन-ए-तिरहुत बहार-ए-कश्मीर प्रेस, लखनऊ से प्रकाशित, महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन, दरभंगा द्वारा अनुवाद के साथ पुनर्प्रकाशित, 2001 P291 वह हजरत फजले रहमान गंज मुरादाबादी के खलीफ एजाज हुसैन बदायुनी के शिष्य बन गए और उन्होंने 'अजाजी' की उपाधि धारण की। उन्होंने अपनी देशभक्ति अपने पिता हाफिजुद्दीन से प्राप्त की, जिन्होंने यूरोपीय नील बागान मालिकों के खिलाफ किसानों को संगठित किया था। अजाज़ी की माँ का उनके बचपन में ही मृत्यु हो गई, जबकि उनके पिता की लखनऊ में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई जब अज़ाज़ी स्कूल में थे और उन्हें चार बाग क़ब्रिस्तान में दफनाया गया।सिंह मेजर कुलबीर मग़फूर अहमद एजाज़ी: बिहार के राजनीतिक कार्यकर्ता http://www.youngbites.com/newsdet.aspx?q=204964 youngbites.com 1 जुलाई 2017 11 मार्च 2022 8 फ़रवरी 2022 https://web.archive.org/web/20220208203239/http://www.youngbites.com/newsdet.aspx?q=204964 dead उनके बड़े भाई मंजूर अहसान अजाज़ी भी एक स्वतंत्रता सेनानी थे।"मंज़ूर अहसान अज़ाज़ी: - भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंने ब्रिटिश जेलों में 13 साल बिताए" http://heritagetimes.in/maulana-manzoor/ हेरिटेज टाइम्स 30 नवंबर 2017 en उनकी केवल एक बहन थी, नूरुन निसा।एएमयू, अलीगढ़ का अंग "तहजीब-उल-अखलाक" सर सैयद अहमद खान द्वारा शुरू किया गया, फरवरी 2004, पृष्ठ 49 अजाज़ी ने अपनी प्रारंभिक और धार्मिक शिक्षा मदरसा-ए-इमदादिया, दरभंगा से प्राप्त की और फिर नॉर्थ ब्रुक जिला स्कूल, दरभंगा में दाखिला लिया, जहाँ से उन्हें रॉलेट एक्ट का विरोध करने के लिए निष्कासित कर दिया गया। उन्होंने पूसा हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और उच्च अध्ययन के लिए पटना के बीएन कॉलेज में प्रवेश लिया। उनकी शादी अजीजुल फातिमा से हुई थी। निकाह के बाद के विवाह समारोह जिसमें शफी दाउदी , बिंदा बाबू (बाद में विधानसभा अध्यक्ष, बिहार विधानसभा) और दीप बाबू (बाद में कैबिनेट मंत्री, बिहार) ने भाग लिया, वह समारोह पूरी तरह से स्वतंत्रता संग्राम के लिए एक सार्वजनिक बैठक में बदल गया, जहां ब्रिटिश राज विरोधी और आजादी के नारे लगे।अहमद सैयद नसीर The Immortals 203–आजाद हाउस ऑफ पब्लिकेशन्स, गुंटूर (एपी) enरहमान सैयद उबैदुर 568–70 भारतीय मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का जीवनी विश्वकोश 2021 वैश्विक मीडिया 978-8188869510 en स्वतंत्रता पूर्व सक्रियता अजाज़ी ने महात्मा गांधी का अनुसरण करने के लिए बीएन कॉलेज पटना में अपनी पढ़ाई छोड़ दी और 1921 में असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए। उन्होंने 'मुठिया' अभियान के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के लिए धन एकत्र किया। 'मुठिया' का मतलब स्वतंत्रता संग्राम के लिए हर भोजन तैयार करने से पहले एक मुठ्ठी अनाज निकालना था। एक बार वह अनजाने में एक सुदूर गांव में अपने दूर के एक रिश्तेदार के घर पहुंच गए। उन्होंने 'मुठिया' के बारे में पूछताछ की। उन्हें नकारात्मक जवाब मिला। उनके रिश्तेदार ने उन्हें पहचान लिया और उन्हें भोजन करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने एक गिलास पानी तक लेने से इनकार कर दिया।मग़फूर अहमद एजाज़ी https://www.mpositive.in/tag/dr-maghfoor-ahmed-ajazi-bihar/ mpositive.in जब उनकी रिश्तेदार जो उनकी दूर की बहन भी थी, ने मुठिया निकालने का वादा किया और बकाया दान दिया, तब जाके वह बहन के यहाँ भोजन करने के लिए तैयार हुए।बिहार विभूति-वॉल्यूम(iii), बिहार अभलेखागर, बिहार सरकार(2014) p233-35 उन्होंने 1921 में अहमदाबाद में आयोजित AICC(कांग्रेस) सत्र में भाग लिया और 'पूर्ण स्वराज' पर हसरत मोहानी के प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसका महात्मा गांधी ने विरोध किया और वो प्रस्ताव उस सत्र में पारित ना हो सका। वह साबरमती आश्रम में गांधीजी से मिले।संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार मग़फूर अहमद एजाज़ी https://amritmahotsav.nic.in/unsung-heroes-detail.htm?138 amritmahotsav.nic.in अजाज़ी भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस के समर्थन में नहीं थे जो कांग्रेस में कई लोग उस समय चाहते थे। उनका हमेशा से यह विचार था कि भारत को अब और समय के लिए ब्रिटिश साम्राज्यवाद के अधीन नहीं रहना चाहिए और राज को भारतीयों को अपने अधीन करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यही कारण था कि वह अपने समय के कई कांग्रेस नेताओं के खिलाफ गए जो डोमिनियन स्टेटस से भी संतुष्ट थे और उन्होंने भारत के लिए पूर्ण स्वतंत्रता के प्रस्ताव का तहे दिल से समर्थन किया। अजाज़ी ने मुजफ्फरपुर की कांग्रेस और खिलाफत समितियों के लिए धन जुटाने के लिए एक सात सूत्री कार्यक्रम शुरू किया, जिससे जिला कांग्रेस के लिए जमीन खरीदी गई। इस ज़मीन को अब तिलक मैदान, मुजफ्फरपुर के नाम से जाना जाता है। उनकी लामबंदी योजनाओं की कुछ विशेषताओं में खादी के कपड़े बेचना, विदेशी कपड़े जलाना, अन्य विदेशी सामानों का बहिष्कार करना, घरों से मुट्ठी भर अनाज जमा करना और स्वतंत्रता आंदोलन के लिए धन इकट्ठा करना शामिल था। ऐसी ही एक जनसभा में उन्होंने अपने पैतृक गांव दिहुली में अपने पश्चिमी कपड़ों का अलाव जलाया। अक्टूबर 1921 के अंत तक, मुजफ्फरपुर जिला असहयोग आंदोलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया था। औपनिवेशिक अधिकारियों ने आंदोलन को दबाने का फैसला किया। इसके लिए पुलिस ने दाउदी के घर पर छापा मारा और अजाज़ी, दाउदी और अब्दुल वदूद जैसे बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया और सलाखों के पीछे डाल दिया।"शफी दाऊदी: मुजफ्फरपुर में कांग्रेस के निर्माता" https://www.heritagetimes.in/shafi-daudi-the-builder-of-the-congress-in-muzaffarpur-bihar/ हेरिटेज टाइम्स 28 अक्टूबर 2018 en 1922 के गया कांग्रेस अधिवेशन में अजाज़ी ने चितरंजन दास से मुलाकात की और नगरपालिका चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए जोरदार चुनावी अभियान चलाया। 1923 में अबुल कलाम आज़ाद की अध्यक्षता में दिल्ली में कांग्रेस का एक विशेष अधिवेशन हुआ. इस सत्र के दौरान बैठने की व्यवस्था का मुद्दा उठा जिसमें बिहार के प्रतिनिधियों को अग्रिम पंक्ति में सीट नहीं दी गई। अजाज़ी ने इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई जिसके बाद बिहारी प्रतिनिधियों को भी उचित सीट दी गई। उनका विरोध स्वाभाविक रूप से बिहारियों के स्वाभिमान के मुद्दे पर और लोगों के बीच उनके धर्म, जाति या मूल स्थान के आधार पर किसी भी भेदभाव को स्वीकार नहीं करने के उनके रवैये के कारण था।4 मार्च 2021 https://teesrijungnews.com/2021/03/%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%97%E0%A4%BC%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%A6-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%9C/ "मग़फूर अहमद अजाज़ी: स्वतंत्रता संग्राम के विस्मृत नायक" Teesri Jung hi उन्होंने शौकत अली, बेगम मोहम्मद अली, अब्दुल मजीद दरियाबादी, आजाद सुभानी, अबुल मुहसिन मुहम्मद सज्जाद और अन्य के साथ ऑल पार्टीज कॉन्फ्रेंस और ऑल मुस्लिम पार्टीज कॉन्फ्रेंस में नेहरू रिपोर्ट पर सेंट्रल खिलाफत कमेटी का प्रतिनिधित्व किया।रेनीसेंस लॉ कॉलेज इंदौर बीए, एलएलबी (ऑनर्स) 2nd. सेम इतिहास इकाई-1 मोहम्मद अली जौहर के निर्देश पर उन्होंने खिलाफत समिति, कलकत्ता का कार्यभार संभाला। दाएँ|अंगूठाकार|300px|बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार डॉ मग़फूर अहमद अजाज़ी के जीवन पर लिखी एक पुस्तक का विमोचन करते हुए। उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में चल रहे एक विरोध मार्च में भाग लिया जिस वजह से नेताजी बोस के साथ उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने 1928 में पटना में साइमन कमीशन के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों का नेतृत्व किया।नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय https://books.google.com/books?id=MgduAAAAMAAJ एनएमएमएल पांडुलिपियां: एक परिचय 120 2003 नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय 9788187614050 en उन्होंने राजेंद्र प्रसाद के साथ 1934 नेपाल बिहार भुकम्प के दौरान राहत कार्यों में बड़े पैमाने पर काम किया, जो भारत के इतिहास में सबसे खराब भूकंपों में से एक था। उन्होंने प्रभावित लोगों को भोजन और आश्रय प्रदान करने के लिए कई राहत शिविरों का संचालन किया।https://epaper.prabhatkhabar.com/3361819/MUZAFFARPUR-City/city#clip/65793594/abf76f4c-a26e-45d9-b83c-ee761630f949/991.1111111111111:488.8907095871553 "स्वतंत्रता सेनानी डॉ मग़फूर अहमद अजाज़ी को गणतंत्र दिवस पर याद किया गया" 24 जनवरी 2022 प्रभात खबर hi 1941 में वे व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन में शामिल हो गए और लोगों को लामबंद करना शुरू कर दिया। मुजफ्फरपुर में एक ऐसी लामबंदी के दौरान जब वह शांतिपूर्ण विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे थे तब स्थानीय पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया जिस वजह अजाज़ी और उनके अनुयायियों को गंभीर चोटें आईं। 25 जुलाई 1942 को अपने सबसे बड़े बेटे की मृत्यु के बावजूद, उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे में आयोजित AICC सत्र में उन्होंने ब्रिटिश सरकार से पूर्ण स्वतंत्रता की माँग करने वाले प्रस्ताव को पारित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी के कारण उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। उनके घर पर तलाशी अभियान चलाया गया। जिस वजह से उन्हें गुप्त रहकर आंदोलन को सफल बनाने के लिए काम करना पड़ा। अंत में, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और आंदोलन को कुचलने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा अन्य राष्ट्रीय नेताओं के साथ सलाखों के पीछे डाल दिया गया। दाएँ|अंगूठाकार|300px| अखिल भारतीय जमहूर मुस्लिम लीग का पहला सत्र, जिसे मग़फूर अहमद अजाज़ी ने एक संयुक्त भारत का समर्थन करने के लिए 1940 में स्थापित किया था। अजाज़ी ने मुहम्मद अली जिन्ना के द्विराष्ट्रीय सिद्धांतएस एम अजीजुद्दीन हुसैन जामिया मिलिया इस्लामिया (भारत) https://books.google.com/books?id=SioIOcNWSQwC भारत में मदरसा शिक्षा, ग्यारहवीं से इक्कीसवीं सदी 2005 कनिष्क प्रकाशक, वितरक 9788173917417 en और एक अलग मुल्क पाकिस्तान के निर्माण का विरोध किया था। उन्होंने जिन्ना की अखिल भारतीय मुस्लिम लीग का मुकाबला करने के लिए 1940 में अखिल भारतीय जमहूर मुस्लिम लीग की स्थापना की और इसके पहले महासचिव के रूप में कार्य किया। विरोधी उनके आवास पर जत्थों में आते थे, वस्तुतः थूकते और नारे लगाते थे।साउथ एशियन हिस्ट्री एंड कल्चर रूटलेज, लंदन, वॉल्यूम 2, पृष्ठ 16-36। ISSN 1947-2498, टेलर और फ्रांसिस ग्रुप उन्होंने 1940 के दशक की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ अपनी राजनीति पर जोर दिया। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए भारतीय परिदृश्य के बढ़ते सांप्रदायिकरण के बावजूद हार नहीं मानी और अपने विश्वास पर कायम रहे कि मुस्लिम और हिंदू एक साथ रह सकते हैं और एक दूसरे का सहयोग करके और मिलकर काम करके देश को आगे ले जा सकते हैं।. अजाज़ी उर्दू भाषा के कवि और लेखक होने के साथ-साथ एक बेहतेरीन वक्ता भी थे। उनके कागजात, डायरी, पत्र और फाइलें नई दिल्ली में नेहरु स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय, नई दिल्ली में राष्ट्रीय अभिलेखागार और पटना में खुदाबक़्श लाइब्रेरी में संरक्षित हैं।नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय, नई दिल्ली, 16वीं वार्षिक रिपोर्ट, 1981-82, पृ.9नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय नई दिल्ली, 27वीं वार्षिक रिपोर्ट 1992-93, पृष्ठ 13राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली एफ नं.4(3) 1/92 पीएखुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी पटना एसीसी। नंबर 2209 भारत सरकार ने दिल्ली के लाल किला के आजादी के दीवाने संग्रहालय में उनकी तस्वीर को सजाया है और कैप्शन दिया है "जिन्ना के द्विराष्ट्रीय सिद्धांत का विरोध किया और इसका मुकाबला करने के लिए अखिल भारतीय जमहूर मुस्लिम लीग की स्थापना की"।आजादी के दीवाने संग्रहालय, लाल किला, दिल्लीरिमेम्बरिंग द रोल ऑफ मुस्लिम्स इन इंडियन फ्रीडम मूवमेंट, द इंग्लिश डेली कश्मीर इमेजेज, श्रीनगर, 15/08/2021डॉ.मग़फूर अहमद अजाज़ी की अहम शख़्सियत से मुलाक़ात, लेखक प्रो. एम आर काज़मी एचओडी राजनीति विज्ञान, बिहार विश्वविद्यालय आजादी के बाद की सक्रियता मग़फूर अहमद अजाज़ी 1960 में मुजफ्फरपुर में आयोजित उर्दू सम्मेलन के अध्यक्ष थे, जिसमें पहली बार एक प्रस्ताव पारित किया गया था जिसमें बिहार में उर्दू को आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार करने की मांग की गई थी।हुमा उर्दू डाइजेस्ट दिल्ली, उर्दू नंबर (15 साल बाद यह मांग हकीकत बन गई)।सज्जाद मोहम्मद https://books.google.com/books?id=NFGUxgEACAAJ बिहार में मुस्लिम राजनीति: बदलती रूपरेखा 2019 टेलर और फ्रांसिस समूह 9780367176747 en"मुजफ्फरपुर मुस्लिमों की शैक्षिक चिंताएं" http://www.bihartimes.in/articles/sajjad/muzaffarpur_edu.html बिहार टाइम्स 10 जुलाई 2011 28 जनवरी 2022 9 अगस्त 2025 https://web.archive.org/web/20250809150453/http://www.bihartimes.in/articles/sajjad/muzaffarpur_edu.html dead अजाज़ी ने सर सैयद के शैक्षिक समाज के पैटर्न के आधार पर अंजुमन खुद्दऻम-ए-मिल्लत की स्थापना की। इस समाज ने एक स्कूल की स्थापना की, मुजफ्फरपुर की कंपनी बाग मस्जिद का जीर्णोद्धार किया, जो अब इस शहर की सबसे बड़ी मस्जिद है, एक विश्राम गृह का निर्माण किया और लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया।अफकार-ए-मिली, नई दिल्ली, बिहार विशेष अंक, जुलाई, 2000, पृष्ठ 254इंग्लिश डेली द टाइम्स ऑफ इंडिया, स्वतंत्रता दिवस अंकनुकूश-ए-कलम पृष्ठ 120, नायरंग-ए-कलम, पृष्ठ 26, आती है उनकी याद पृष्ठ 19 लेखक अनवारुल हसन वस्तवी मौत अजाज़ी की मृत्यु 26 सितंबर 1966 को मुजफ्फरपुर में उनके अपने आवास अजाज़ी हाउस में हुआ था। उनके नमाज-ए-जनाजा में हजारों लोग शामिल हुए, जो खुद अजाजी द्वारा किए गए दान और एकत्र किए गए धन से खरीदी गई जमीन ऐतिहासिक तिलक मैदान में अदा की गई थी। यह शहर के इतिहास में एक अंतिम संस्कार के जुलूस के लिए अब तक का सबसे बड़ा जमावड़ा था जिसमे शहर के सभी वर्ग, जाति और धर्मों के लोगों ने भाग लिया। उन्हें काजी मोहम्मदपुर क़ब्रिस्तान में दफनाया गया था। राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनकी सेवाओं को याद करते हुए कहा, "वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सबसे आगे थे। उनके जीवन की कहानी देश के एक महत्वपूर्ण युग की एक अनूठी और दिलचस्प कहानी है।" आचार्य जे॰ बी॰ कृपलानी ने अपने पुराने मित्र को याद करते हुए कहा: "डॉ अजाज़ी एक महान राष्ट्रभक्त, मानवता के लिए एक समर्पित सेवक और एक प्यारे दोस्त थे। उनके जैसा निस्वार्थ देशभक्त दुर्लभ होते जा रहे हैं। उनकी मृत्यु समाज के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है"।"बिहार के नायक डॉ.मगफूर अहमद अजाज़ी के जीवन के रोचक तथ्य" https://thegyanganga.com/biography-of-magphor/ दा ज्ञान गंगा hi लेखक कलाम हैदरी और उपन्यासकार और पत्रकार मोइन शाहिद ने उन्हें उर्दू भाषा के प्रति उनकी सेवाओं के लिए "बाबा-ए-उर्दू, बिहार" (बिहार में उर्दू के पिता) कहा। पत्रकार और कवि वफ़ा मलिकपुरी ने उन्हें उर्दू भाषा के लिए एक पुराना 'मुजाहिद' (योद्धा) बताया। मुजफ्फरपुर नगर निगम ने उनके आवास की ओर जाने वाली सड़क का नाम उनके नाम पर "डॉ अजाजी मार्ग" रखा।बिहार सरकार पत्रिका "बिहार", मार्च, 2005, पृष्ठ 38रिमेम्बरिंग मुस्लिम मेकर्स ऑफ मॉडर्न बिहार बाय मोहम्मद सज्जाद फॉर बिहार कलेक्टिव, ब्राउन बुक्स, अलीगढ़, पीपी 150-158, हिन्दुस्तानी मुसलमान-मसाई-ओ-इमकानत प्रो. एमडी सज्जाद, ब्राउन बुक्स, अलीगढ़, ISBN 978-93-67497-69-6बीस्वीं सदी में बिहार के बहुअयामी व्यक्तितकरें र खिराज-ए-अकीदत लेखक डॉ. एम आर काज़मी, डॉ अखिलेश्वर शर्मा और मोइन शाहिद निगारिशात-ए-डॉ अजाज़ी, ख़िताबत-ए-डॉ. अजाज़ी और डॉ. मग़फूर अहमद अजाज़ी और उनकी समाजी, लेसानी वा सक़फ़ती खिदमात, लेखक डॉ. रिज़वान अहमद अज़ाज़ी भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा श्रद्धांजलि भारत सरकार ने उन्हें स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव की पूर्व संध्या पर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के विस्मृत (अनसंग) नायकों में से एक के रूप में याद किया और सम्मान दिया है। आजादी का अमृत महोत्सव भारत की आजादी के 75 साल और वहाँ के लोगों, संस्कृति और उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास को मनाने के लिए भारत सरकार की एक पहल है। ग्रीस में भारत का दूतावास उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है भारत के स्वतंत्रता के 75 वर्ष को मनाते हुए।भारत का दूतावास Aएथेंस, ग्रीस मग़फूर अहमद अजाज़ी: भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अनसंग हीरो" https://twitter.com/EmbIndiaAthens/status/1453621303403954179 भारत सरकार ने दिल्ली के लाल किला के आजादी के दीवाने संग्रहालय में उनकी तस्वीर को सजाया है और कैप्शन दिया है "जिन्ना के द्विराष्ट्रीय सिद्धांत का विरोध किया और इसका मुकाबला करने के लिए अखिल भारतीय जमहूर मुस्लिम लीग की स्थापना की"। लाल किला परिसर में आजादी के दीवाने संग्रहालय उन गुमनाम नायकों को समर्पित है जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और लड़ाई लड़ी। यह एक अनूठा संग्रहालय है जिसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को प्रेरित करना, उन्हें स्वतंत्रता की कीमत के बारे में सूचित करना और उन्हें जागरूक करना है कि उन्हें स्वतंत्रता को हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि महान स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन का बलिदान देकर इसे हासिल किया था। संग्रहालय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा टैगबिन के साथ मिलकर बनाया गया एक बहु-संवेदी अनुभवों वाला संग्रहालय है। यह एक दो मंजिला इमारत में स्थित है और इसे 22 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जो 1857 से 1947 तक कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित हैं और उन लोगों को समर्पित है जिन्होंने भारतीयों को एक स्वतंत्र राष्ट्र उपहार स्वरूप भेंट में दिया।भारत के संग्रहालय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तत्वावधान में "आज़ादी के दीवाने संग्रहालय" https://www.museumsofindia.org/museum/633/azaadi-ke-diwane 11 मार्च 2022 1 मार्च 2022 https://web.archive.org/web/20220301062359/https://www.museumsofindia.org/museum/633/azaadi-ke-diwane deadhttps://timesofindia.indiatimes.com/travel/destinations/azadi-ke-diwane-museum-opens-at-red-fort-to-pay-homage-to-unsung-fallen-heroes/articleshow/68317276.cms "आज़ादी के दीवाने संग्रहालय गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि देने के लिए लाल किले में खुला" 8 मार्च 2019 टाइम्स ऑफ इंडिया en सन्दर्भ श्रेणी:ब्रिटिश भारत के क़ैदी और बंदी श्रेणी:भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ श्रेणी:बिहार के राजनीतिज्ञ श्रेणी:भारतीय मुस्लिम श्रेणी:१९६६ में निधन श्रेणी:1900 में जन्मे लोग श्रेणी:Pages with unreviewed translations श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता सेनानी श्रेणी:स्वतंत्रता सेनानी