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माँ अंबिका मंदिर, मुसेन माता

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मांँ अम्बिका मंदिर, मुसेन माता India Rajasthan#India Location in, Rajasthan 24.8010695 N 76.6373779 E type:landmark_region:IN_scale:100 inline,title भारत राजस्थान बाराँ मुसेन माता https://goo.gl/maps/kB8QYkty6V4HqoMv5 मां अंबिका मंदिर भारत के राजस्थान राज्य में बारां से लगभग 50 किमी दक्षिण में मुसेन माता गांव में स्थित एक हिंदू मंदिर है। मां अंबिका, देवी दुर्गा का रूप है जो मंदिर की अधिष्ठात्री देवी हैं। https://www.bhaskar.com/rajasthan/baran/news/29-thousand-64-rupees-in-the-donation-box-of-musen-mata-temple-021603-3500149.html Bhaskar https://web.archive.org/web/20220803052331/https://www.bhaskar.com/rajasthan/baran/news/29-thousand-64-rupees-in-the-donation-box-of-musen-mata-temple-021603-3500149.html 3 अगस्त 2022 3 अगस्त 2022 dead मां अंबिका मंदिर भूपसी नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर एक जंगल के बीच में स्थित है। इस जंगल पर अतिक्रमण करना मना है। इस जंगल में लकड़ी भी नहीं काटी जा सकती। http://geolysis.com/p/in/rj/baran/atru/musen-mata http://geolysis.com/p/in/rj/baran/atru/musen-mata सारांश राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में मां अंबिका का मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि अंबिका माता के दर्शन करने से रोग से पीड़ित व्यक्ति को राहत मिलती है। सोमवार का दिन मंदिर में सबसे व्यस्त दिन होता है क्योंकि सोमवार का दिन मां अंबिका का होता है। यहां हर सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। भक्तों द्वारा अक्सर यहां सामूहिक भोज का आयोजन किया जाता है। मां अंबिका के दरबार में हर उम्र के लोग मन्नत मांगने आते हैं। यहां मां अपने बेटों के लिए सरकारी नौकरी का आशीर्वाद मांगती है। यहां हर सुबह और शाम को आरती होती है। यहां एक पूल और नहाने के लिए एक ट्यूबवेल है। पूजा सामग्री के लिए यहां दुकानें लगाई गई हैं। पास में एक प्यारी सी नदी बह रही है। https://hinditakniki.com/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8/ https://hinditakniki.com/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8/ https://web.archive.org/web/20220803051828/https://hinditakniki.com/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8/ 3 अगस्त 2022 3 अगस्त 2022 dead किंवदंती और इतिहास इस मंदिर के इतिहास के बारे में एक किंवदंती है कि महाभारत काल में इस गांव को कुंदनपुर के नाम से जाना जाता था। जहाँ राजा भीष्मक थे, वहीं उनके पुत्र रुक्मी ने बहन रुकणी का विवाह दुष्ट शिशुपाल से करवा दिया था। लेकिन रुक्मणी जी श्रीकृष्ण को हृदय से बहुत प्रेम करती थीं। वहीं रुक्मी ने रुक्मिणी के विवाह की तैयारी में विवाह मंडप के लिए आठ स्तंभों का छत्र बनाया था। जो आज भी कुंडी की खलियानी में स्थित है। राजा भीष्मक के घर शहनाई की आवाज के बीच रुक्मणी मुसेन माता अंबिका की पूजा करने के लिए आई, जहां से भगवान कृष्ण ने गंधर्व के माध्यम से उनसे विवाह किया और उन्हें महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में ले गए। बाद में श्रीकृष्ण ने भी शिशुपाल का सिर काट दिया। मुसेन माता मंदिर अपने आप में प्राचीन गौरव का प्रतीक है, और इस मंदिर को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। पूरे भारत में मुसेन माता ही एक ऐसी जगह है जहां प्रेम की मूर्ति है। यहां एक ही चट्टान पर सात माताएं विराजमान हैं। देवी के प्रकट होने के बारे में कई किंवदंतियां हैं। मंदिर के उत्तर दिशा में हनुमान और दक्षिण में गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है। मुसेन माता के मंदिर के पास हुई खुदाई में प्राचीन ईंटें और ऊंचे बर्तन भी मिले हैं। जिसकी माप 12/4 और 5/3 है जो कालीबंगा और पाकिस्तान के क्वेटा प्रांत में खुदाई से मिली ईंटों की तरह है। https://www.bharatibiz.com/en/ambika-mata-ji-mandir-musenmata-096496-35907 https://www.bharatibiz.com/en/ambika-mata-ji-mandir-musenmata-096496-35907 https://web.archive.org/web/20220729105602/https://www.bharatibiz.com/en/ambika-mata-ji-mandir-musenmata-096496-35907 29 जुलाई 2022 3 अगस्त 2022 dead जंगल और जानवर यहां बड़ी संख्या में बंदर पाए जाते हैं। वे आगंतुकों, तीर्थयात्रियों और भक्तों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। ब्यूटिया मोनोस्पर्मा, बबूल और नीम के पेड़ यहाँ पाए जाते हैं। ये पेड़ काफी पुराने हैं। यह मंदिर एक जंगल के बीच में स्थित है। इस जंगल पर अतिक्रमण करना मना है। इस जंगल में लकड़ी भी नहीं काटी जा सकती। मेला हर साल अप्रैल के महीने में मेला लगता है। यह लगभग एक महीने तक रहता है। इस मेले में घरेलू जानवर जैसे बैल, गाय और उनके बछड़े बेचे जाते हैं। यह बारां जिले का सबसे बड़ा पशु मेला है। इस मेले में आर्केस्ट्रा, मौत का कुआं, झूला, भजन संध्या आदि गतिविधियां और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। https://patrikabureau.com/author/admin-18/ https://patrikabureau.com/author/admin-18/ 3 अगस्त 2022 24 अक्तूबर 2022 https://web.archive.org/web/20221024213222/https://patrikabureau.com/author/admin-18/ dead https://www.bhaskar.com/news/MAT-RAJ-OTH-c-12-625571-NOR.html https://www.bhaskar.com/news/MAT-RAJ-OTH-c-12-625571-NOR.html गेलरी मंदिर में भगवान, देवी और शेरों की कई मूर्तियाँ हैं। संदर्भ श्रेणी:राजस्थान में हिन्दू मन्दिर