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जॉर्ज कांटॉर
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गेऔर्ग काण्टॉर Georg Cantor (Porträt).jpg गेऔर्ग फ़ेर्डिनाण्ड लूत्विश फ़ीलिप काण्टॉर 1845 3 3 सेंट पीटर्सबर्ग, रूसी साम्राज्य 1918 1 6 1845 3 3 हाल, सैक्सनी प्रान्त, जर्मन साम्राज्य रूसी साम्राज्य (1845–1856) जर्मन साम्राज्य (1856–1918) जर्मन ईटीएच त्सूरिश बर्लिन विश्वविद्यालय De aequationibus secundi gradus indeterminatis https://web.archive.org/web/20150704015954/http://gdz.sub.uni-goettingen.de/index.php?id=11&PPN=PPN237853094&DMDID=DMDLOG_0008&L=1 1867 Ernst Kummer कार्ल वाईश्ट्रास समुच्चय सिद्धान्त Vally Guttmann 1874 गणित हाल विश्वविद्यालय सिल्वेस्टर पदक (1904)
Yadav Anuradha WNT 2018 http://dx.doi.org/10.1007/978-3-319-67199-4_101790 Encyclopedia of Signaling Molecules 5998–6004 Springer International Publishing 2023-10-27 Chaturvedi Rajnish Kumarगेऔर्ग काण्टॉर (Georg Cantor, १८४५ ई. - १९१८ ई.) जर्मन गणितज्ञ थे। उन्होने समुच्चय सिद्धान्त की खोज की जो आजकल गणित का आधारभूत सिद्धान्त बन गया है।
जीवनी- जॉर्ज कैंटर
जॉर्ज कान्टॉर का जन्म ३ मार्च, १८४५ ई. को पीट्रोग्राड में एक यहूदी परिवार में हुआ था। १८६३ ई. से १८६९ ई. तक इन्होंने बर्लिन में गणित, दर्शन शास्त्र और भौतिकी का अध्ययन किया। १८६७ ई. में इनकी अनिर्णीत समीकरण (ax2 + by2 +cz2 = ०) के हल से संबंधित, गाउस द्वारा अवशिष्ट एक कठिन समस्या के हल पर पी.एच.डी. उपाधि प्रदान की गई। हाले (Halle) में ये १८६९ ई में प्राध्यापक (लेक्चरर), १८७२ ई. में गणित के असाधारण और १८७९ ई. में साधारण प्रोफेसर नियुक्त हुए। १८७४ ई. में इनका प्रथम क्रांतिकारी शोधपत्र प्रकाशित हुआ, जिसमें इन्होंने 'संख्याओं के कांटॉर सिद्धान्त' की व्याख्या की थी। इस सिद्धान्त के अनुसार कोई अपरिमेय संख्या उस एक अनन्त अनुक्रम (a1, a2, a3... an...) से प्राप्त की जा सकती है, जिसमें n और m के मान पर्याप्त हों, तो (an-amI <Å)। तदुपरान्त इन्होंने इसपर अनेक महत्वपूर्ण शोधपत्र लिखे।
श्रेणी:जर्मन गणितज्ञ