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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

तकी अल-दीन अल-सुबकी

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तकी अल-दीन अल-सुबकी Taqi al-Din al-Subki.png تقي الدين السبكي.png تقي الدين السبكي इस्लाम (सुन्नी) शफीई अशअरी (Ash'ari) 1284 ईसवी (683 हिजरी) सुबक, मेनोफिया, मिस्र 1355 ईसवी (756 हिजरी) काहिरा, मिस्र मुख्य न्यायाधीश (काज़ी अल-कुज़ात), हाफिज़ न्यायविद, धर्मशास्त्री, हदीस विशेषज्ञ ताज अल-दीन अल-सुबकी Q12202948 तकी अल-दीन अल-सुबकी (Taqi al-Din al-Subki), जिनका पूरा नाम अली इब्न अब्द अल-काफी अल-सुबकी था, आठवीं शताब्दी हिजरी (चौदहवीं शताब्दी ईसवी) के एक सुन्नी इस्लामी विद्वान, शफीई (Shafi'i) न्यायविद और अशअरी (Ash'ari) धर्मशास्त्री थे।https://openlibrary.org/books/OL681065M/Reliance_of_the_traveller Reliance of the traveller: the classic manual of Islamic sacred law ʻUmdat al-salik al-Naqīb Aḥmad ibn Luʼluʼ Ibn Al-Naqib Ahmad Ibn Lulu Ibn Keller Noah Ha Mim 1999 Amana Publications 978-0-915957-72-9 Beltsville, MD, U.S.A मामलुक साम्राज्य के दौरान इस्लामी न्यायशास्त्र और धर्मशास्त्र के क्षेत्र में उनका सक्रिय योगदान रहा। वे अपने समय के प्रमुख न्यायाधीशों (Qadi) में से एक थे और पारंपरिक सुन्नी मान्यताओं के संरक्षण से जुड़े हुए थे।https://openlibrary.org/books/OL36763777M/Law_and_Legal_Theory_in_Classical_and_Medieval_Islam Law and Legal Theory in Classical and Medieval Islam Hallaq Wael B. 2022 Taylor & Francis Group प्रारंभिक जीवन और शिक्षा अल-सुबकी का जन्म 1284 ईसवी (683 हिजरी) में मिस्र के मेनोफिया प्रांत के सुबक (Subk) नामक गाँव में हुआ था। उनका पालन-पोषण एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ शिक्षा को महत्व दिया जाता था। प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही उन्होंने कुरान और कुछ बुनियादी इस्लामी ग्रंथों का अध्ययन कर लिया था। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए उन्होंने काहिरा, अलेक्जेंड्रिया, सीरिया और हिजाज़ (वर्तमान सऊदी अरब) की यात्राएं कीं। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने तत्कालीन विद्वानों से हदीस, न्यायशास्त्र (फ़िक़्ह), अरबी व्याकरण और उसूल अल-फ़िक़्ह (कानून के सिद्धांत) की शिक्षा ग्रहण की। उनके अकादमिक प्रदर्शन के कारण उन्हें समकालीन विद्वानों के बीच मान्यता प्राप्त हुई।Ignaz Goldziher 30 June 1966 A short history of classical Arabic literature Lubrecht & Cramer Ltd 144 न्यायिक और प्रशासनिक करियर मामलुक साम्राज्य में अल-सुबकी की प्रशासनिक क्षमता और ज्ञान को देखते हुए उन्हें कई पदों पर नियुक्त किया गया। सीरिया में वे एक प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारी के रूप में स्थापित हुए। उन्हें दमिश्क के मुख्य न्यायाधीश (काज़ी अल-कुज़ात - Qadi al-Qudat) के रूप में नियुक्त किया गया था।https://openlibrary.org/books/OL25109354M/Islamic_law_in_action Islamic law in action: authority, discretion, and everyday experiences in Mamluk Egypt Stilt Kristen 2011 Oxford University Press, USA 978-0-19-960243-8 New York इस पद पर रहते हुए उन्होंने इस्लामी कानून (शरिया) के क्रियान्वयन की देखरेख की। एक न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल शफीई न्यायशास्त्र के प्रति उनके झुकाव के लिए जाना जाता है। उन्होंने दमिश्क और काहिरा के कई मदरसों में अध्यापन कार्य भी किया, जहाँ उन्होंने इस्लामी कानून और सिद्धांतों का ज्ञान छात्रों को प्रदान किया। उनके द्वारा दिए गए वैधानिक फतवों का उस समय के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर प्रभाव था।https://www.elgaronline.com/monobook/9781784711375.xml History of Islamic Economic Thought : Contributions of Muslim Scholars to Economic Thought and Analysis 2014 www.elgaronline.com Edward Elgar Publishing 9781784711382 2026-03-12 वैचारिक दृष्टिकोण और विवाद बाएँ|अंगूठाकार अल-सुबकी अपने समय के अशअरी (Ash'ari) धर्मशास्त्रियों के एक प्रमुख पक्षधर थे। उनका वैचारिक दृष्टिकोण पारंपरिक सुन्नी मान्यताओं पर आधारित था, जिसके कारण वे इब्न तैमिया (Ibn Taymiyya) और उनके छात्र इब्न कय्यिम अल-जौज़िया (Ibn Qayyim al-Jawziyya) के विचारों के आलोचक रहे।https://openlibrary.org/books/OL38440356M/Wahhabism Wahhabism: The History of a Militant Islamic Movement Bunzel Cole M. 2023 Princeton University Press 9780691241609 इन विद्वानों के बीच कई वैधानिक और धर्मशास्त्रीय मुद्दों पर मतभेद थे। उदाहरण के लिए, 'तलाक की शपथ' (Divorce oaths) के मुद्दे पर अल-सुबकी ने पारंपरिक इस्लामी न्यायशास्त्र का बचाव किया और इब्न तैमिया के विचारों का विरोध किया।https://openlibrary.org/books/OL3309715M/Marriage_money_and_divorce_in_Medieval_Islamic_society Marriage, money and divorce in Medieval Islamic society Rapoport Yossef 2005 Cambridge University Press 978-0-521-84715-5 Cambridge, New York इसके अतिरिक्त, 'नरक की अवधि' (Duration of Hell-Fire) के प्रश्न पर भी उनके बीच विवाद था। जब इब्न तैमिया और इब्न कय्यिम ने यह विचार प्रस्तुत किया कि नरक की अग्नि अनंत नहीं हो सकती है, तो अल-सुबकी ने 'अल-इतिबार' (Al-I'tibar) नामक एक ग्रंथ की रचना की। इस ग्रंथ में उन्होंने पारंपरिक सुन्नी मान्यता का समर्थन किया कि नरक की सजा शाश्वत (अनंत) है और इस विषय पर इस्लामी विद्वानों की सर्वसम्मति (Ijma) है।Hoover Jon 2009 Islamic Universalism: Ibn Qayyim al-Jawziyya's Salafi Deliberations on the Duration of Hell-Fire https://archive.org/details/sim_muslim-world_2009-01_99_1/page/184 The Muslim World 99 Blackwell Publishing Ltd 184https://openlibrary.org/books/OL24907268M/Islam_and_the_fate_of_others Islam and the fate of others: the salvation question Khalil Mohammad Hassan 2012 Oxford University Press 978-0-19-979666-3 Oxford, New York उनका तर्क था कि इस्लामी सिद्धांतों की सर्वमान्य व्याख्याओं को चुनौती देना उचित नहीं है।Hoover Jon Islamic Universalism: Ibn Qayyim al-Jawziyya's Salafi Deliberations on the Duration of Hell-Fire 187 Islamic Universalism रचनाएं और विरासत अल-सुबकी ने न्यायशास्त्र, धर्मशास्त्र, हदीस और अरबी भाषा जैसे विभिन्न विषयों पर कई ग्रंथों की रचना की। उनके फतवों का संग्रह इस्लामी कानून के शोधकर्ताओं द्वारा एक ऐतिहासिक स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता है। उनके पुत्र, ताज अल-दीन अल-सुबकी (Taj al-Din al-Subki), भी एक विद्वान थे, जिन्होंने 'तबाकत अल-शफिय्या अल-कुबरा' (Tabaqat al-Shafi'iyya al-Kubra) नामक शफीई विद्वानों का जीवनी विश्वकोश संकलित किया।https://books.google.co.in/books?id=RwPnCAAAQBAJ&redir_esc=y THE BIOGRAPHIES OF THE ELITE LIVES OF THE SCHOLARS, IMAMS & HADITH MASTERS: Biographies of The Imams & Scholars 2015-05-02 Zulfiqar Ayub en अल-सुबकी के समकालीन इतिहासकार और हदीस विद्वान अल-ज़हाबी (Al-Dhahabi) ने उन्हें अपने समय के एक योग्य विद्वान और 'हाफिज़' (हदीस के ज्ञाता) के रूप में वर्णित किया है।Shams al-Din al-Dhahabi Biographies Of The Nobles Hadith 100 http://shamela.ws/browse.php/book-22669/page-100 12 मार्च 2026 19 अक्तूबर 2016 https://web.archive.org/web/20161019001420/http://shamela.ws/browse.php/book-22669/page-100 bot: unknown निधन अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, अल-सुबकी सीरिया छोड़कर वापस काहिरा आ गए थे। 1355 ईसवी (756 हिजरी) में काहिरा में उनका निधन हो गया। उनके लिखित कार्य इस्लामी न्यायशास्त्र के इतिहास का एक हिस्सा माने जाते हैं।Abdel-Ghaffar Omar Taqlīd and Tillage in the Works of Two Taqī al-Dīns https://knowledge.uchicago.edu/record/5405 Mamlūk Studies Review 10.6082/FV3N-WZ83 सन्दर्भ श्रेणी:1284 में जन्मे लोग श्रेणी:1355 में निधन श्रेणी:इस्लामी विद्वान श्रेणी:सुन्नी इस्लाम