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अपररूपता
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सितंबर 2014
right|thumb|300px|हीरा और ग्रेफाइट, कार्बन के दो प्रमुख अपरूप हैं ; ये दोनों एक ही तत्त्व के शुद्ध रूप होने के बावजूद, संरचना में अलग-अलग होते हैं।
जब एक ही तत्व कई रूपों में मिलता है तो तत्त्व के इस गुण को अपरूपता (एलॉट्रोपी) कहते हैं और उसके विभिन्न रूपों को उस तत्त्व का घन संरचना (austenite)अपरूप कहते हैं। जैसे कार्बन के विभिन्न अपरूप हीरा (डायमंड), ग्रेफाइट, कोयला (कोल), कोक, चारकोल या काष्ठकोयला, अस्थिकोयला (बोनब्लैक), काजल, कार्बन ब्लैक, गैस कार्बन और पेट्रोलियम कोक, तथा चीनी कोयला, इत्यादि हैं। कार्बन के अतिरिक्त आक्सीजन, गंधक, फॉस्फोरस आदि भी अपरूपों में पाए जाते हैं।
अपरूप एक ही तत्त्व के विभिन्न संरचनात्मक रूप हैं और काफी अलग भौतिक गुणों और रासायनिक व्यवहार का प्रदर्शन कर सकते हैं। बहुरूपी रूपों के बीच परिवर्तन कुछ विशेष कारकों अर्थात् दाब, प्रकाश व ताप के प्रभाव से शुरू होता है। इसलिए, विशेष अपरूपों की स्थिरता विशेष परिस्थितियों पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, काय केंद्रित घन संरचना (फेराइट) से लोहे का परिवर्तन कर फलक केंद्रित घन संरचना (ऑस्टेनाइट) में करने के लिए 906 डिग्री सेल्सियस से ऊपर और टिन का परिवर्तन धात्विक टिन से अर्धचालक टिन में करने के लिए उसे 13.2 डिग्री सेल्सियस से नीचे लाना पड़ता है। विभिन्न रासायनिक व्यवहार वाले अपरूपों का एक उदाहरण ओजोन (O3) है जो अपने अपरूप डाई आक्सीजन(O2) की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली ऑक्सीकारक है।
बाहरी कड़ियाँ
https://web.archive.org/web/20080131061355/http://www.physics.uoguelph.ca/summer/scor/articles/scor40.htm
https://web.archive.org/web/20100211125043/http://www.chemistryexplained.com/A-Ar/Allotropes.html
अपरूपता
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श्रेणी:भौतिक रसायन