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411 समाचार
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रानी की वाव

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रानी की वाव Rani ki vav 02.jpg 1.2 Rani-ki-Vav पाटन, गुजरात, भारत, (i), (iv)(i), (iv) 922 23 51 32 N 72 6 6 E region:IN-GJ_type:landmark dms inline,title 2014 4.68 ha acre on 125.44 ha acre on India Gujarat#India 922 रानी की वाव भारत के गुजरात राज्य के पाटण में स्थित प्रसिद्ध बावड़ी (सीढ़ीदार कुआँ) है। इस चित्र को जुलाई 2018 में RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा ₹100 के नोट पर चित्रित किया गया है तथा 22 जून 2014 को इसे यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल में सम्मिलित किया गया।http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-Gujarat-11th-century-Queen-UNESCO-World-Heritage-Site-39-39-433279.html रानी की वाव विश्व विरासत घोषित 23 जून 2014 https://web.archive.org/web/20180719203450/https://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-Gujarat-11th-century-Queen-UNESCO-World-Heritage-Site-39-39-433279.html 19 जुलाई 2018 dead पाटण को पहले 'अन्हिलपुर' के नाम से जाना जाता था, जो गुजरात की पूर्व राजधानी थी। कहते हैं कि रानी की वाव (बावड़ी) वर्ष 1063 में सोलंकी शासन के राजा भीमदेव प्रथम की प्रेमिल स्‍मृति में उनकी पत्नी रानी उदयामति ने बनवाया था। रानी उदयमति जूनागढ़ के चूड़ासमा शासक रा' खेंगार(खंगार) की पुत्री थीं। सोलंकी राजवंश के संस्‍थापक मूलराज थे। सीढ़ी युक्‍त बावड़ी में कभी सरस्वती नदी के जल के कारण गाद भर गया था। यह वाव 64 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा तथा 27 मीटर गहरा है। यह भारत में अपनी तरह का अनूठा वाव है। वाव के खंभे सोलंकी वंश और उनके वास्तुकला के चमत्कार के समय में ले जाते हैं। वाव की दीवारों और स्तंभों पर अधिकांश नक्काशियां, राम, वामन, महिषासुरमर्दिनी, कल्कि, आदि जैसे अवतारों के विभिन्न रूपों में भगवान विष्णु को समर्पित हैं।http://hindi.nativeplanet.com/patan/attractions/rani-ki-vav/ रानी की वाव, पाटन 23 जून 2014 https://web.archive.org/web/20140308075119/http://hindi.nativeplanet.com/patan/attractions/rani-ki-vav/ 8 मार्च 2014 dead 'रानी की वाव' को विश्व विरासत की नई सूची में शामिल किए जाने का औपचारिक ऐलान कर दिया गया है। 11वीं सदी में निर्मित इस वाव को यूनेस्को की विश्व विरासत समिति ने भारत में स्थित सभी बावड़ी या वाव (स्टेपवेल) की रानी का भी खिताब दिया है। इसे जल प्रबंधन प्रणाली में भूजल संसाधनों के उपयोग की तकनीक का बेहतरीन उदाहरण माना है। 11वीं सदी का भारतीय भूमिगत वास्तु संरचना का अनूठे प्रकार का सबसे विकसित एवं व्यापक उदाहरण है यह, जो भारत में वाव निर्माण के विकास की गाथा दर्शाता है। सात मंजिला यह वाव मारू-गुर्जर शैली का साक्ष्य है। ये करीब सात शताब्दी तक सरस्वती नदी के लापता होने के बाद गाद में दबी हुई थी। इसे भारतीय पुरातत्व सर्वे ने वापस खोजा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सायआर्क और स्कॉटिस टेन के सहयोग से वाव के दस्तावेजों का डिजिटलाइजेशन भी कर लिया है। सन्दर्भ इन्हें भी देखें बावड़ी अडालज वाव चाँद बावड़ी बाहरी कड़ियाँ विश्व विरासत बनी 1000 साल पुरानी ‘रानी की वाव’ देखें तस्वीरें... (भास्कर) राणी की वावजून 2020 InternetArchiveBot (गुजारत पर्यटन) विरासतः विश्व धरोहर गुजरात की 'रानी',प्राचीन भारत का जल प्रबंधन् का नायाब नमूना (भारतीय विदेश मंत्रालय) श्रेणी:भारत के विश्व धरोहर स्थल श्रेणी:गुजरात में स्मारक श्रेणी:गुजरात में पर्यटन आकर्षण श्रेणी:बावड़ी श्रेणी:पाटण ज़िला