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411 समाचार
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सतीनाथ भादुड़ी

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सतीनाथ भादुड़ी (27 सितंबर 1906 Banglapedia: National Encyclopedia of Bangladesh Hasnat Abul Asiatic Society of Bangladesh 2012 Islam Sirajul Sirajul Islam Second Bhaduri, Satinath Jamal Ahmed A. http://en.banglapedia.org/index.php?title=Bhaduri,_Satinath - 30 मार्च 1965) बांग्ला के उपन्यासकार और राजनीतिज्ञ थे। उन्हें उनके साहित्यिक छद्मनाम 'चित्रगुप्त' से जाना जाता था। आरम्भिक जीवन सतीनाथ भादुड़ी का जन्म 27 सितंबर 1906 को पूर्णिया में हुआ था, जहां उनके पिता इंदुभूषण भादुड़ी ने वकालत की थी। उनका पैतृक घर नदिया जिले के कृष्णानगर में था। उन्होंने 1930 में पटना विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए की डिग्री प्राप्त की। 1931 में उन्होंने बीएल की डिग्री पूरी की। उन्होंने 1932 और 1939 के बीच पटना में कानून का अभ्यास करना शुरू किया। इसके बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए और पूर्णिया के जिला सचिव बने। उन्हें भागलपुर जेल में दो बार कैद किया गया: 1940-41 और 1942-45। 1948 में, वह कांग्रेस से अलग हो गए और सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हो गए। https://books.google.com/books?id=ObFCT5_taSgC&pg=PA419 Encyclopaedia of Indian Literature: A-Devo Amaresh Datta Sahitya Akademi 1987 978-81-260-1803-1 419–420 कृतियाँ सतीनाथ का पहला उपन्यास जागरी (1946) था, जिसके लिए उन्हें पहला रवीन्द्र पुरस्कार (1950) मिला। इस पुस्तक ने उन्हें काफी प्रसिद्धि दिलाई, और 1965 में यूनेस्को के प्रतिनिधि कार्यों के संग्रह के हिस्से के रूप में अंग्रेजी में अनुवाद किया गया। http://www.unesco.org/culture/lit/rep/pop.php?fnc=record&lng=en_GB&record=5573 The Vigil [Jagari] एक राजनीतिक उपन्यास के रूप में, जागरी बंगाली साहित्य में एक अद्वितीय स्थान रखता है। उन्होंने पेरिस में अपने अनुभवों के बारे में एक यात्रा वृत्तान्त, सत्यि भ्रमणकाहिनी (1951) भी लिखा। उनकी अन्य उल्लेखनीय कृतियों में गणनायक (1948), चित्रगुप्तेर फाइल (1949), ढोँड़ाइ चरित मानस (2 भाग, 1949, 1951), अचिन रागिनी (1954), अपरिचिता (1954), संगत (1957), आलोक दृरष्टि (1964) शामिल हैं। परुयार नोटबुक (लेखन का संग्रह) आदि। सतीनाथ भादुड़ी द्वारा रचित ग्रन्थों का पूर्ण विवरण नीचे दिया गया है- उपन्यास जागरी (४ अक्टूबर, १९४५) चित्रगुप्तेर फाइल (सितम्बर, १९४९) ढोँड़ाइ चरित मानस, प्रथम चरण (१९४९) ढोँड़ाइ चरित मानस, द्बितीय चरण (१९५१) अचिन रागिनी (नवम्बर, १९५४) संकट (जून, १९५७) दिकभ्रान्त (१९६६) लघुकथा संकलन गणनायक (१९४८) अपरिचिता (सितम्बर, १९५४) चकाचकी (अगस्त, १९५६) पत्रलेखार बाबा (मार्च, १९५९) जलभ्रमि (अप्रैल, १९६२) आलोकदृष्टि (मार्च, १९६४) जर्नल सत्यि भ्रमणकाहिनी (सितम्बर, १९५१): बेङ्गाल पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित। अनूदित ग्रन्थ जागरी (हिन्दी अनुबाद : नारायणप्रसाद वर्मा; जुलाई, १९४८): बिहार साहित्य भवन से प्रकाशित। द भिजिल (अंग्रेजी अनुबाद : लीला राय; मार्च, १९६५): जागरी उपन्यास का अनुवाद। ढोँड़ाइ चरित मानस (हिन्दी अनुवाद : गङ्गाधर मधुकर; १९७४) रचना-संकलन सतीनाथ बिचित्रा (कार्तिक, १३७२): प्रकाशभवन से प्रकाशित। इस ग्रन्थ के अन्तर्गत ये रचनाएँ हैं-- गल्प - "दिगभ्रान्त", "मा आम्रफलेषु", "बमिकपालिया", "तलानिर स्बाद", "अजागड़", "रोगी", "ब्लाडप्रेशार", "एकचक्षु", "एकघण्टार राजा", "करदाता संघ जिन्दाबाद", "रहस्य", "जामाइबाबु", "ओयारकोयालिटि" ओ "आन्तर्जातिक"; कबिता - "गोपाल जागो जागो", "दिनपञ्जि", "मोचेर लड़ाइ" ओ "मोहनपुरेर छबि"; "मुनाफा ठाकरुण" गल्पेर नाट्यरूप "पारबे ना ओदेर सङ्गे"; रम्यरचना ओ प्रबन्ध - "ढोँड़ाइ", "दुइटि खेला", "ससंकोच", "आमि कालिदास", "अनुसन्धानी", "प्यारिस ओ लन्डन", "म्याकरोनिर स्मृति", "पड़ुय़ार नोट थेके", "मधुसूचन ओ ला फँतेन" ओ "इंलण्डे गान्धीजि"। ग्रन्थावली सतीनाथ ग्रन्थावली, ४ खण्डों में, सम्पादना: शङ्ख घोष और निर्मल आचार्य, अरुणा प्रकाशनी, कलकाता ; प्रथम खण्ड (जनवरी, १९७३) : "सतीनाथ भादुड़ी: प्रकाश ओ प्रतिष्ठा"; उपन्यास - जागरी, चित्रगुप्तेर फाइल; गल्प - "गणनाय़क", "बन्या", "आन्टाबांला", "पङ्कतिलक", "भूत", "अपरिचिता", "परिचिता", "फेरबार पथ", "रथेर तले", "षड़यन्त्र", "मामलार राय़", "अत्याबश्यक" ओ "ईर्षा"; ग्रन्थ प्रसङ्ग। द्वितीय खण्ड (जुलाई, १९७३): "सतीनाथ भादुड़ी: निःसङ्ग दीक्षा" (एखाने डाय़रिर उल्लेख आछे); उपन्यास: ढोँड़ाइ चरित मानस, प्रथम ओ द्बितीय़ चरण; गल्प -"चकाचकी", "बैय़ाकरण", "डाकातेर मा", "बिबेकेर गण्डी", "मुष्टियोग", "राजकबि", "मुनाफा ठाकरुण", "तबे कि", "पत्रलेखार बाबा", "कम्यान्डार इन चिफ", "बाहात्तुरे", "कण्ठकण्डुत्ति", "साँझेर शीतल", "एकटि किंबदन्तीर जन्म", "पूतिगन्ध", "अभिज्ञता" ओ "धस"; ग्रन्थ प्रसङ्ग। तृतीय़ खण्ड (जुलाइ, १९७४): "सतीनाथ भादुड़ी: असम्पन्न साधना" (एइ अंशे लेखके अलिखित उपन्यास जारज-एर खसड़ा मुद्रित हय़ेछे); उपन्यास - अचिन रागिणी, संकट; गल्प - "महिला इनचार्ज", "कृष्णकलि", "जलभ्रमि", "स्बर्गेर स्बाद", "चरणदास एम.एल.ए.", "दाम्पत्य सीमान्ते", "दुइ अपराधी", "पदाङ्क", "हिसाबनिकाश", "आलोकदृष्टि", "जादुगण्डि", "ब्यर्थतपस्या", "परकीय़ा सन-इन-ल", "तिलोत्तमा संस्कृति संघ", "जोड़कलम", "बाय़ोकेमि", "शेष संख्यान", "गोँज" ओ "सरमा"; ग्रन्थ प्रसङ्ग। चतुर्थ खण्ड (अगस्ट, १९७५): "सतीनाथ भादुड़ी: जीबनयापन"; उपन्यास - दिगभ्रान्त; गल्प - "जामाइबाबु", "ओय़ारकोय़ालिटि", "आन्तर्जातिक", "तलानिर स्बाद", "अजागड़", "रोगी", "दिगभ्रान्त", "मा आम्रफलेषु", "ब्लाडप्रेशार", "एकघण्टार राजा", "करदाता संघ जिन्दाबाद", "बमिकपालिय़ा", "एकचक्षु" ओ "रहस्य"; नाटक - पारबे ना एदेर सङ्गे; प्रबन्ध - "इंलण्डे गान्धीजि", "प्यारिस ओ लन्डन", "म्याकरोनिर स्मृति", "पड़ुय़ार नोट थेके", "हाय़ रबीन्द्रनाथ", "उपन्यास ओ भूगोल", "अनुसन्धानी", "आमि कालिदास", "मधुसूचन ओ ला फँतेन", "ससंकोच" ओ "दुइटि खेला"; भ्रमणकाहिनि - सत्यि भ्रमणकाहिनी; कबिता - "दिबास्बप्न", "दिनपञ्जी", "मोचेर लड़ाइ" ओ "मोहनपुरेर छबि"; ग्रन्थ प्रसङ्ग। आलोचनात्मक प्रशंसा पार्थ चटर्जी ने अपने प्रसिद्ध कृति द पॉलिटिक्स ऑफ द गवर्नमेंट में धोराई चरित मानस की कथा का विश्लेषण किया है, जिसे चटर्जी के अनुसार 'भारत में औपनिवेशिक शासन और राष्ट्रीय आंदोलन की एक यथार्थ नृवंशविज्ञान' के रूप में पढ़ा जा सकता है The Politics of the Governed: Reflections on Popular Politics in Most of the World. Partha Chatterjee Columbia University Press, New York, 2004, 173pp वर्ण्यविषय उनकी लघु कथाएँ न्यायपालिका की व्यंग्यात्मक आलोचना, पक्षपातपूर्ण राजनीति, क्रूड नारीवाद आदि हैं। पैरोडी-ग्रंथों या इन ब्लैक कॉमेडी का विश्लेषण करना बहुत मुश्किल या लगभग असंभव है क्योंकि समालोचक स्व-स्वीकृत संस्थागत संगठित वित्त पोषित विज्ञान या प्रयोगशाला-राज्य विज्ञान, सर्वेक्षण तकनीकों, सांख्यिकी आदि की शारीरिक-जैव राजनीति पर टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। भादुड़ी के प्रवचन के आलोचनात्मक विश्लेषण ने पैरोडी की पैरोडी को जन्म दिया। एक समालोचक कहानी-रेखा को मानकीकृत के साथ-साथ पूर्व-अनुमानित औपचारिक उपकरण के साथ मापने के लिए एक खेदजनक आंकड़ा काट सकता है। भादुड़ी की कहानियां दोहरे सत्र के उदाहरण हैं, जहां मौजूदा नागरिक और राजनीतिक समाज और रूढ़िवादी साहित्यिक आलोचनाओं पर सूक्ष्म बुद्धि के साथ हमला किया जाता है। भादुड़ी ने मॉडल-सैद्धांतिक सूत्रबद्ध आलोचना की मृत्यु की घोषणा की। उनके अधिकांश लेखन बंगाल और पूर्वी बिहार के लोगों की जीवन शैली को चित्रित करते हैं। निधन 30 मार्च 1965 को उनका निधन हो गया। संदर्भ श्रेणी:1906 में जन्मे लोग श्रेणी:१९६५ में निधन