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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

दीन मुहम्मद खान

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Shaykh-ut-Tafsir Deen Muhammad Khan Deen Muhammad Khan.jpg Dhaka 1900 1974 12 2 1900 yes British Raj (1900–1947) Pakistan (1947–1971) Bangladesh (1971–1974) Darul Uloom Deoband Bangladesh Jamiat Ulema-e-Islam Bangladesh दीन मुहम्मद खान (1900-1974) एक बांग्लादेश के देवबंदी इस्लामी विद्वान और मुफस्सिर थे। उन को उर्दू में कुरान की व्याख्या करने के लिए जाना जाता था। दारुल उलूम देवबंद में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पढ़ाना शुरू किया। वह जामिया कुरानिया अरब लालबाग के संस्थापकों में से एक रहे। उन्होंने कुछ समय के लिए ढाका विश्वविद्यालय में इस्लामी अध्ययन विभाग में पढ़ाया और बाद में सरकारी मदरसा-ए-आलिया में पढ़ाया। वह जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम बांग्लादेश के राजनेता थे।http://reposit.library.du.ac.bd:8080/xmlui/handle/123456789/2774 Bangladeshi Ulama in Politics and Social Welfare: 1935–1971 https://web.archive.org/web/20250403121153/reposit.library.du.ac.bd:8080/xmlui/handle/123456789/2774 3 April 2025 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा जनवरी 1900 खान का जन्म, ढाका में एक बंगाली मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके पिता, नूरुल्ला खान, ब्रिटिश भारतीय सेना के एक कप्तान थे। उनकी शिक्षा ढाका की चौकबाजार शाही मस्जिद में शुरू हुई। उस समय इब्राहिम पेशावरी चौकबाजार मस्जिद में धार्मिक शिक्षा के प्रभारी थे। उन्होंने इब्राहिम पेशावरी के अधीन माध्यमिक तक क़ौमी मदरसे की प्राथमिक पाठ्यपुस्तकों का अध्ययन किया। इसके बाद वह हदीस, तफसीर और फ़िक़ह में उच्च डिग्री हासिल करने के लिए दारुल उलूम देवबंद चले गए । उनके शिक्षकों में अनवर शाह कश्मीरी थे। उन्हें किफायतुल्लाह देहलवी से हदीस का प्रमाण पत्र भी मिला।https://www.kitabghor.com/books/the-handrede-bangla-mayer-kriti-sontan.html The Hundred (100 Great Scholars from Bangladesh) Nijampuri Ashraf Ali Salman Publication 2013 978-112009250-2 1st Hathazari, Chittagong 153–155 8 May 2022 करियर 1920 से 1930 तक दस वर्षों तक उन्होंने ढाका में हम्मदिया मदरसे सहित अलग अलग मदरसों में पढ़ाया। उस वक़्त जब अब्दुल करीम मदनी बांग्लादेश में इस्लाम का उपदेश देने आए तो उनकी मुलाकात मदनी से हुई। वह मदनी के अलग अलग धार्मिक समारोहों के अरबी प्रवचनों का अनुवाद करते थे। मदनी अपने उचित अनुवाद और कथात्मक शैली से मोहित हैं। इसलिए वह उन्हें 1930 में बर्मा ले गए। वहाँ उन्हें बंगला मुन्नी जेम मस्जिद का इमाम और मुफ्ती नियुक्त किया गया। उन्होंने मस्जिद में तफ़सीरूल कुरान पर व्याख्यान देना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उन्होंने कुरान की तफसीर को पूर्ण समाप्त किया। 1941 में जब द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया, तो उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय में इस्लामी अध्ययन विभाग और बाद में सरकारी मदरसे-ए-आलिया में पढ़ाया। वह जामिया कुरानिया अरब लालबाग के संस्थापकों में से एक थे। इसकी स्थापना के बाद, वह इसका नाज़िम आला बन गए । उन्होंने इस्लामी राजनीति में भी योगदान दिया। खिलाफत आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण उन्हें कुछ समय के लिए असम में कैद भी किया गया था। उन्होंने पाकिस्तान आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम बांग्लादेश के राजनेता थे। ढाका में सिरातुन्नाबी समिति के गठन के अग्रदूत के रूप में उनका नाम उल्लिखित है। उन्होंने रेसकोर्स ग्राउंड पर एक विशाल रैली की। वह पूर्वी पाकिस्तान में "कुरान और हमारा जीवन" नामक एक रेडियो कार्यक्रम में नियमित रूप से प्रस्तुतकर्ता थे। उनकी दो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। एक सूरह यूसुफ के तफसीर से संबंधित है, दूसरा डोवा, दारूद और तसवुफ से संबंधित है।Islam Aminul Islam Samar Book House 2014 Dhaka 159–162 bn bn:বাংলার শত আলেমের জীবনকথা Biographies of hundreds of Bengali scholars निधन 2 दिसंबर 1974 को उनका देहाँत हुआ । अगले दिन लालबाग केल्ला मैदान में उनका जनाज़ा आयोजित किया गया। उनके अंतिम संस्कार में लाखों लोग शामिल हुए। उन्हें लालबाग शाही मस्जिद कब्रिस्तान में दफन किया गया ।Sayed Ahsan Adorn Publications 2006 9789842005602 Dhaka 191 bn bn:বাংলাদেশে হাদিস চর্চা উৎপত্তি ও ক্রমবিকাশ Origin and development of Hadith practice in BangladeshIslam Amirul Kohinoor Library 2012 Dhaka 45–50 bn bn:সোনার বাংলা হীরার খনি ৪৫ আউলিয়ার জীবনী 45 Biography of Awliya श्रेणी:१९७४ में निधन श्रेणी:1900 में जन्मे लोग श्रेणी:देवबंदी लोग