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मिलखा सिंह
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मिलखा सिंह सन २०१२ में चण्डीगढ गोल्फ क्लब में मिलखा सिंह Milkha Singh.jpg Indian yes 1929 11 20 गोविन्दपुरा, पंजाब (वर्तमान में अब पाकिस्तान में) 2021 6 18 1929 11 20 y चण्डीगढ़, भारत भारतीय उड़न सिख Retired; formerly of the Indian Army and Government of Punjab, India Nirmal Kaur Saini 1963 2021 died Track and field Sprinting Men's Athletics
British Empire and Commonwealth Games
1958 Cardiff 440 yards
Asian Games
1958 Tokyo 200 m
1958 Tokyo 400 m
1962 Jakarta 400 m
1962 Jakarta 4 x 400 m relay
National Games of India
1958 Cuttack 200m
1958 Cuttack 400m
1964 Calcutta 400 m yes
India
India
25px मानद कप्तान
30px|Padma Shri riband पद्मश्री
मिलखा सिंह (जन्म: २० नवंबर १९२९ - मृत्यु: १८ जून २०२१) एक भारतीय धावक थे,https://www.rajputcommunity.in/t/milkha-singh-the-flying-sikh/432 Milkha Singh - The Flying Sikh 2020-06-11 Rajput Community Forum en 2021-02-18 जिन्होंने रोम के १९६० ग्रीष्म ओलंपिक और टोक्यो के १९६४ ग्रीष्म ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उन्हें "उड़न सिख" उपनाम दिया गया था। वे भारत के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ एथलीट्स में से एक थे। वे एक राजपूूूत सिख (राठौड़) परिवार से थे। Exclusive Interview: Milkha Singh – The making of a legend https://www.sify.com/sports/exclusive-interview-milkha-singh---the-making-of-a-legend-imagegallery-others-nhmmDTdfeaasi.html 24 August 2020 Sify en 2 September 2020 https://web.archive.org/web/20200902013749/https://www.sify.com/sports/exclusive-interview-milkha-singh---the-making-of-a-legend-imagegallery-others-nhmmDTdfeaasi.html live
भारत सरकार ने १९५९ में उन्हें पद्म श्री की उपाधि से भी सम्मानित किया।
बचपन
मिलखा सिंह का जन्म २० नवंबर १९२९ को गोविन्दपुर (जो अब पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में पड़ता है) में एक सिख जाट परिवार में हुआ था।Exclusive interview: Milkha Singh - The making of a legend https://www.sify.com/sports/exclusive-interview-milkha-singh---the-making-of-a-legend-imagegallery-others-nhmmDTdfeaasi.html 24 August 2020 Sify en भारत के विभाजन के बाद की अफ़रा तफ़री में मिलखा सिंह ने अपने माँ-बाप को खो दिया। अंततः वे शरणार्थी बन के ट्रेन से पाकिस्तान से भारत आए। ऐसे भयानक बचपन के बाद उन्होंने अपने जीवन में कुछ कर गुज़रने की ठानी।
मिल्खा सिंह सेना में भर्ती होने की कोशिश करते रहे और अंततः वर्ष 1952 में वह सेना की विद्युत मैकेनिकल इंजीनियरिंग शाखा में शामिल होने में सफल हो गये। एक बार सशस्त्र बल के उनके कोच हवीलदार गुरुदेव सिंह ने उन्हें दौड़ (रेस) के लिए प्रेरित कर दिया, तब से वह अपना अभ्यास कड़ी मेहनत के साथ करने लगे। वह वर्ष 1956 में पटियाला में हुए राष्ट्रीय खेलों के समय से सुर्खियों में आये।
एक होनहार धावक के तौर पर ख्याति प्राप्त करने के बाद उन्होंने २०० मीटर और ४०० मीटर की दौड़े सफलतापूर्वक की और इस प्रकार भारत के अब तक के सफलतम धावक बने। कुछ समय के लिए वे ४०० मीटर के विश्व कीर्तिमान धारक भी रहे।
कार्डिफ़, वेल्स, संयुक्त साम्राज्य में १९५८ के कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण जीतने के बाद सिख होने की वजह से लंबे बालों के साथ पदक स्वीकारने पर पूरा खेल विश्व उन्हें जानने लगा। इसी समय पर उन्हें पाकिस्तान में दौड़ने का न्यौता मिला, लेकिन बचपन की घटनाओं की वजह से वे वहाँ जाने से हिचक रहे थे। लेकिन न जाने पर राजनैतिक उथल पुथल के डर से उन्हें जाने को कहा गया। उन्होंने दौड़ने का न्यौता स्वीकार लिया। दौड़ में मिलखा सिंह ने सरलता से अपने प्रतिद्वन्द्वियों को ध्वस्त कर दिया और आसानी से जीत गए। अधिकांशतः मुस्लिम दर्शक इतने प्रभावित हुए कि पूरी तरह बुर्कानशीन औरतों ने भी इस महान धावक को गुज़रते देखने के लिए अपने नक़ाब उतार लिए थे, तभी से उन्हें फ़्लाइंग सिख की उपाधि मिली।
सेवानिवृत्ति के बाद मिलखा सिंह खेल निर्देशक, पंजाब के पद पर थे। मिलखा सिंह ने बाद में खेल से सन्यास ले लिया और भारत सरकार के साथ खेलकूद के प्रोत्साहन के लिए काम करना शुरू किया। वे चंडीगढ़ में रहते थे। जाने-माने फिल्म निर्माता, निर्देशक और लेखक राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने वर्ष 2013 में इनपर भाग मिल्खा भाग नामक फिल्म बनायी। ये फिल्म बहुत चर्चित रही। 'उड़न सिख' के उपनाम से चर्चित मिलखा सिंह देश में होने वाले विविध तरह के खेल आयोजनों में शिरकत करते रहते थे। हैदराबाद में 30 नवंबर,2014 को हुए 10 किलोमीटर के जियो मैराथन-2014 को उन्होंने झंड़ा दिखाकर रवाना किया।
मृत्यु
मिलखा सिंह ने 18 जून, 2021 को चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे कोविड-१९ से ग्रस्त थे। चार-पाँच दिन पूर्व उनकी पत्नी का देहान्त भी कोविड से ही हुआ था। उनके पुत्र जीव मिलखा सिंह गोल्फ़ के खिलाड़ी हैं।https://www.bhaskar.com/national/news/milkha-singh-passes-away-24-minute-before-the-death-photo-of-milkha-singh-128613377.html मिल्खा सिंह के निधन से 24 मिनट पहले की फोटो: डॉक्टर बोले- ऐसी हालत में कोई युवा 1 घंटा नहीं जी सकता, फ्लाइंग सिख 10 से 12 घंटे जिंदगी की जंग लड़ते रहे 2021-06-19 Dainik Bhaskar hi 2021-06-19
खेल कूद रिकॉर्ड, पुरस्कार
इन्होंने 1958 के एशियाई खेलों में 200 मीटर व ४०० मी में स्वर्ण पदक जीते।
इन्होंने १९५८ के राष्ट्रमण्डल खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
वर्ष 1958 के एशियाई खेलों की 400 मीटर रेस में – प्रथम
वर्ष 1958 के एशियाई खेलों https://web.archive.org/web/20210624201718/https://ekbharth.com/%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%AF-milkha/ 24 जून 2021 की 200 मीटर रेस में – प्रथम
वर्ष 1959 में – पद्मश्री पुरस्कार
वर्ष 1962 के एशियाई खेलों की 400 मीटर दौड़ में – प्रथम
वर्ष 1962 के एशियाई खेलों की 4*400 रिले रेस में – प्रथम
वर्ष 1964 के कलकत्ता राष्ट्रीय खेलों की 400 मीटर रेस में – द्वितीय
संदर्भ
बाहरी कड़ियाँ
मिलखा सिंह का निधन! https://web.archive.org/web/20210620001240/https://www.nayaindia.com/sports/milkha-singh-passed-away-after-long-battle-with-corona-159693.html 20 जून 2021
सिंह, मिलखा
श्रेणी:1935 में जन्मे लोग
श्रेणी:२०२१ में निधन
सिंह, मिलखा
सिंह, मिलखा
श्रेणी:भारतीय सिख
श्रेणी:पद्मश्री प्राप्तकर्ता
श्रेणी:चंडीगढ़ के खिलाड़ी
श्रेणी:भारत के विभाजन में विस्थापित लोग