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लोकसभा में एंग्लो-इंडियन आरक्षित सीटें
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जुलाई 2023
१९५२ और २०२० के बीच, एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्यों के लिए भारत की संसद के निचले सदन लोकसभा में दो सीटें आरक्षित की गईं। इन दो सदस्यों को भारत सरकार की सलाह पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता था। जनवरी २०२० में भारत की संसद और राज्य विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन आरक्षित सीटों को २०१९ के १२६वें संवैधानिक संशोधन विधेयक द्वारा बंद कर दिया गया था, जब इसे १०४वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, २०१९ के रूप में लागू किया गया था। Anglo Indian Representation To Lok Sabha, State Assemblies Done Away; SC-ST Reservation Extended For 10 Years: Constitution (104th Amendment) Act To Come Into Force On 25th Jan http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/215637.pdf 25 January 2020 egazette.nic.inhttp://www.elections.in/government/anglo-indian-mps.html Anglo Indian Members of Parliament (MPs) of India - Powers, Salary, Eligibility, Term www.elections.in
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 331 ने संविधान के निर्माण के दौरान एंग्लो-इंडियन समुदाय को आरक्षण दिया था, अनुच्छेद ३३१ में यह भी कहा गया है कि संविधान के प्रारंभ होने के १० साल बाद यह आरक्षण समाप्त हो जाएगा। लेकिन ८वें संशोधन के जरिए इस आरक्षण को १९७० तक बढ़ा दिया गया। आरक्षण की अवधि २३वें संशोधन के माध्यम से १९८० तक और फिर ४५वें संशोधन के माध्यम से १९९० तक, ६२वें संशोधन के माध्यम से २००६ तक, ७९वें संशोधन के माध्यम से २०१० तक और ९५वें संशोधन के माध्यम से २०२० तक बढ़ा दी गई थी।https://www.indialegallive.com/top-news-of-the-day/news/centre-notifies-constitutional-amendment-away-quota-anglo-india-84961 Centre notifies constitutional amendment doing away with quota for Anglo Indian 3 June 2020 जनवरी २०२० में, १०४वें संविधान संशोधन अधिनियम, २०१९ द्वारा भारत की संसद और राज्य विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन आरक्षित सीटों को समाप्त कर दिया गया था। लोकसभा में विधेयक पेश करने वाले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा उद्धृत कारण यह है कि भारत में २०११ की जनगणना में एंग्लो-इंडियन आबादी सिर्फ 296 थी, हालांकि यह आंकड़ा विवादित है। एंग्लो-इंडियन की कुल संख्या १५०,००० तक के अनुमान के साथ विवादित है जबकि कुछ स्रोत ७५,००० और १००,००० के बीच की आबादी का सुझाव देते हैं।
इतिहास
एंग्लो-इंडियन समुदाय भारत में एकमात्र ऐसा समुदाय था जिसके अपने प्रतिनिधि भारत की संसद में लोकसभा (निचले सदन) के लिए नामांकित थे। यह अधिकार जवाहरलाल नेहरू से ऑल इंडिया एंग्लो-इंडियन एसोसिएशन के पहले और लंबे समय तक अध्यक्ष रहे फ्रैंक एंथोनी द्वारा प्राप्त किया गया था। समुदाय का प्रतिनिधित्व दो सदस्यों द्वारा किया गया था। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि समुदाय का अपना कोई मूल राज्य नहीं था। भारत के चौदह राज्यों (आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल) में भी प्रत्येक राज्य विधानसभाओं में एक मनोनीत सदस्य था।
१९६० के दशक तक आरक्षित सीटों के चरणबद्ध रूप से समाप्त होने की उम्मीद थी, लेकिन २०२० में इस प्रावधान को समाप्त किए जाने तक लगातार सरकारों द्वारा नवीनीकृत किया जाना जारी रहा।
आज़ादी से पहले
हेनरी गिडनी १९२०, १९२३, १९२६, १९३० और १९३४ के चुनावों में 'विशेष रुचि/एंग्लो-इंडियन' श्रेणी के तहत केंद्रीय विधान सभा के मनोनीत सदस्य थे।
सन्दर्भ
जुलाई 2023