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तुलनात्मक साहित्य

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जुलाई 2016 तुलनात्मक साहित्य (Comparative literature) वह विद्या-शाखा है जिसमें दो या अधिक भिन्न भाषायी, राष्ट्रीय या सांस्कृतिक समूहों के साहित्य का अध्ययन किया जाता है। तुलना इस अध्ययन का मुख्य अंग है। साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन व्यापक दृष्टि प्रदान करता है। संकीर्णता के विरोध में व्यापकता आज के विश्व-मनुष्य की आवश्यकता है। हेनरी एच.एच.रेमाक ने तुलनात्मक साहित्य की परिभाषा इस प्रकार की है- तुलनात्मक साहित्य एकक राष्ट्र के साहित्य की परिधि के परे दूसरे राष्ट्रों के साहित्य के साथ तुलनात्मक अध्ययन है तथा यह अध्ययन कला, इतिहास, समाज विज्ञान, धर्मशास्त्र आदि ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों के आपसी सम्बन्धों का भी अध्ययन है।इंद्रनाथ चौधुरी तुलनात्मक साहित्य:भारतीय परिप्रेक्ष्य 2006 वाणी प्रकाशन नई दिल्ली 17 परिचय तुलनात्मक साहित्य अंग्रेजी के ‘कम्पैरेटिव लिटरेचर’ का हिन्दी अनुवाद है। यह एक स्वतन्त्र विद्याशाखा के रूप में विकसित है तथा विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में इसके अध्ययन-अध्यापन के कार्य को आजकल विशेष महत्व दिया जा रहा है। अंग्रेजी के कवि ‘मैथ्यू आर्नल्ड’ ने सन् 1848 में अपने एक पत्र में सबसे पहले ‘कम्पैरेटिव लिटरेचर’ पद का प्रयोग किया था। भारत में सन् 1907 में रवीन्द्र नाथ ठाकुर ने विश्व साहित्य का उल्लेख करते हुए साहित्य के अध्ययन में तुलनात्मक दृष्टि की आवश्यकता पर जोर दिया था।इंद्रनाथ चौधुरी तुलनात्मक साहित्य:भारतीय परिप्रेक्ष्य 2006 वाणी प्रकाशन नई दिल्ली 7 मानव के सांस्कृतिक इतिहास की सहज धारा के आश्रय में ही ‘रवि बाबू’ ने तुलनात्मक साहित्य के अध्ययन पर बल दिया था। तुलनात्मक साहित्य के विषय में एक स्वतंत्र अध्ययन को मान्यता देना आज भी विवादग्रस्त विषय है। तुलनात्मक साहित्य का भी एक दृष्टिकोण है, एक प्रविधि है और एक तकनीकी है। तुलनात्मक साहित्य की प्रवृत्तियॉं अभी भी पूरी तरह से स्थिर नहीं हो पायी हैं। इसके अध्ययन का आरम्भ हम इतिहास बोध से करते हैं, किन्तु उसकी परिसमाप्ति एक प्रकार के सार्वभौम साहित्येतिहास में होती हैं। तुलनात्मक साहित्य, एकक साहित्य (single literature) अध्ययन से भिन्न है। एकक साहित्य का अध्ययन जहाँ साहित्य के सीमित अध्ययन की दिशा की ओर संकेत करता है, वहीं तुलनात्मक साहित्य हमें साहित्य के व्यापक अध्ययन की दिशा में ले जाता है। यहाँ तुलना इस बात की नहीं होती कि कौन-सा साहित्यकार श्रेष्ठ है बल्कि तुलना इस बात की होती है कि दोनों साहित्यकारों में समानता और भिन्नता के बिन्दु कौन-से हैं। कहाँ भाव-संवेदनाएं-विचार-कला एक दूसरे के साथ मिलते हैं कहाँ अलग हैं। यह दूसरे को पहचानने तथा स्वीकार करने की दिशा में पाठक को ले जाता है। वर्तमान समय में इसकी विशेष आवश्यकता है। साहित्य के इस क्षेत्र में छात्र और अध्यापक, जिन्हें सामान्यतः “तुलनात्मक साहित्य के विद्वान” (comparatists) कहा जाता है, परंपरागत रूप से कई भाषाओं में दक्ष होते हैं और उन भाषाओं की साहित्यिक परंपराओं, साहित्यिक आलोचना तथा प्रमुख साहित्यिक ग्रंथों से परिचित रहते हैं। हालांकि, इस क्षेत्र की कुछ नई उप-शाखाएँ आलोचनात्मक सिद्धांत (critical theory) और साहित्यिक सिद्धांत (literary theory) से अधिक प्रभावित हैं। इनमें कई भाषाओं में दक्षता से अधिक सैद्धांतिक समझ और विभिन्न प्रकार की कलाओं को एक साथ देखने की क्षमता पर जोर दिया जाता है।इस क्षेत्र की अंतःविषय (interdisciplinary) प्रकृति के कारण तुलनात्मक साहित्य के विद्वानों को सामान्यतः समाजशास्त्र, इतिहास, मानवविज्ञान, अनुवाद अध्ययन, आलोचनात्मक सिद्धांत, सांस्कृतिक अध्ययन और धार्मिक अध्ययन जैसे विषयों का भी ज्ञान होता है। इसी कारण विश्वविद्यालयों में तुलनात्मक साहित्य के कार्यक्रम अक्सर विभिन्न विभागों के विद्वानों द्वारा मिलकर बनाए जाते हैं। इस विविधता के कारण कुछ आलोचकों (भीतर और बाहर दोनों) ने यह आरोप लगाया है कि तुलनात्मक साहित्य पर्याप्त रूप से स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है, या इसके विद्वान बहुत आसानी से सतही ज्ञान (dilettantism) की ओर चले जाते हैं क्योंकि उनके कार्य का दायरा स्वाभाविक रूप से बहुत व्यापक होता है। कुछ लोग यह भी प्रश्न उठाते हैं कि क्या यह व्यापकता पीएचडी धारकों की अकादमिक और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में रोजगार पाने की क्षमता को प्रभावित करती है। हालांकि, उपलब्ध आँकड़े बताते हैं कि तुलनात्मक साहित्य के स्नातकों को अंग्रेज़ी साहित्य के स्नातकों के समान या उनसे अधिक दर पर नौकरी मिलती है।http://www.mla.org/jil_phd_survey_t2 Placement of 1996-97 http://www.mla.org/jil_phd_survey_t2 “तुलनात्मक साहित्य” (Comparative Literature) और “विश्व साहित्य” (World Literature) शब्द अक्सर समान प्रकार के अध्ययन और शोध को दर्शाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में “तुलनात्मक साहित्य” शब्द अधिक प्रचलित है, और वहाँ कई विश्वविद्यालयों में तुलनात्मक साहित्य के विभाग या कार्यक्रम मौजूद हैं।http://muse.jhu.edu/journals/comparative_critical_studies/v003/3.1lernout.html Comparative literature in the Low countries http://muse.jhu.edu/journals/comparative_critical_studies/v003/3.1lernout.htmlतुलनात्मक साहित्य एक अंतःविषय क्षेत्र है, जिसमें शोधकर्ता राष्ट्रीय सीमाओं, समय अवधियों, भाषाओं और साहित्यिक विधाओं के पार जाकर साहित्य का अध्ययन करते हैं। इसमें साहित्य और अन्य कलाओं (जैसे संगीत, चित्रकला, नृत्य, फिल्म आदि) के बीच संबंधों तथा साहित्य और अन्य विषयों (जैसे मनोविज्ञान, दर्शन, विज्ञान, इतिहास, वास्तुकला, समाजशास्त्र और राजनीति) के बीच संबंधों का भी अध्ययन किया जाता है। व्यापक अर्थ में तुलनात्मक साहित्य को “सीमाओं से परे साहित्य का अध्ययन” कहा जा सकता है।तुलनात्मक साहित्य में शोध के अंतर्गत, उदाहरण के लिए, अमेरिका में साक्षरता और सामाजिक स्थिति का अध्ययन, मध्यकालीन महाकाव्य और रोमांस का अध्ययन, साहित्य और लोककथाओं या मिथकों के संबंध, दुनिया के विभिन्न भागों में औपनिवेशिक और उत्तर-औपनिवेशिक लेखन का अध्ययन, तथा साहित्य की परिभाषा से जुड़े मूलभूत प्रश्नों की खोज शामिल हो सकती है। तुलनात्मक साहित्य के विद्वानों में एक समान बात यह होती है कि वे राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर साहित्य का अध्ययन करना चाहते हैं और विदेशी ग्रंथों को उनकी मूल भाषा में पढ़ने के लिए भाषाओं में रुचि रखते हैं। कई विद्वान साहित्यिक अनुभव को ऐतिहासिक परिवर्तनों, दार्शनिक विचारों और सामाजिक आंदोलनों जैसे अन्य सांस्कृतिक पहलुओं के साथ जोड़ने की इच्छा भी रखते हैं। तुलनात्मक साहित्य के क्षेत्र में कई विद्वत संस्थाएँ हैं, जैसे इंटरनेशनल कम्पेरेटिव लिटरेचर एसोसिएशन (ICLA) तथा विभिन्न देशों में तुलनात्मक साहित्य की अन्य संस्थाएँ। http://www.bcla.org/index.htm BCLA: British comparative literature Association Bowie Malcolm https://web.archive.org/web/20070206071440/http://www.bcla.org/index.htm 14 जून 2020 6 फ़रवरी 2007 https://web.archive.org/web/20070206071440/http://www.bcla.org/index.htm deadइस क्षेत्र में शोध प्रकाशित करने वाली कई विद्वत पत्रिकाएँ भी हैं।Selected Comparative literature and Comparative Humanities Journal Zepetnek Steven Totosy de 01/01/1999 तुलनात्मक साहित्य की पुस्तकों की सूची के लिए “तुलनात्मक साहित्य की पुस्तकों की ग्रंथसूची” देखी जा सकती है। फ्रेंच स्कूल बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक दौर से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध तक इस क्षेत्र की विशेषता एक स्पष्ट अनुभववादी और प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण था, जिसे “फ्रेंच स्कूल” कहा जाता है। इस पद्धति में Paul Van Tieghem जैसे विद्वान विभिन्न देशों की कृतियों का सूक्ष्म विश्लेषण करते थे और यह खोजने का प्रयास करते थे कि अलग-अलग राष्ट्रों की रचनाओं के बीच “उत्पत्ति” और “प्रभाव” के क्या प्रमाण मिलते हैं, जिसे अक्सर “rapport des faits” कहा जाता था। इस प्रकार कोई विद्वान यह पता लगाने की कोशिश कर सकता था कि कोई विशेष साहित्यिक विचार या रूपक समय के साथ एक देश से दूसरे देश तक कैसे पहुँचा। तुलनात्मक साहित्य के फ्रेंच स्कूल में प्रभावों और मानसिक प्रवृत्तियों के अध्ययन को प्रमुखता दी जाती थी। आज भी फ्रेंच स्कूल इस अनुशासन के राष्ट्र-राज्य आधारित दृष्टिकोण का पालन करता है, साथ ही “यूरोपीय तुलनात्मक साहित्य” के दृष्टिकोण को भी बढ़ावा देता है। इस स्कूल से संबंधित प्रमुख प्रकाशनों में La Littérature Comparée (1967) – C. Pichois और A. M. Rousseau, La Critique Littéraire (1969) – J.-C. Carloni और Jean Filloux, तथा La Littérature Comparée (1989) – Yves Cheverel शामिल हैं, जिसका अंग्रेज़ी अनुवाद Comparative Literature Today: Methods & Perspectives (1995) के नाम से प्रकाशित हुआ। जर्मन स्कूल फ्रेंच स्कूल की तरह ही जर्मन तुलनात्मक साहित्य की उत्पत्ति भी उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इस अनुशासन का विकास मुख्य रूप से एक विद्वान Peter Szondi (1929–1971) के कारण हुआ, जो Free University of Berlin में अध्यापन करते थे। ज़ोंडी का कार्य Allgemeine und Vergleichende Literaturwissenschaft (जिसका अर्थ है “सामान्य और तुलनात्मक साहित्य अध्ययन”) के क्षेत्र में था, जिसमें नाटक, गीतात्मक कविता (विशेषकर hermetic कविता) और व्याख्याशास्त्र (hermeneutics) शामिल थे। Allgemeine und Vergleichende Literaturwissenschaft के बारे में ज़ोंडी की दृष्टि उनकी उस नीति से स्पष्ट होती है जिसमें उन्होंने बर्लिन में अंतरराष्ट्रीय अतिथि वक्ताओं को आमंत्रित किया और उनके व्याख्यानों का परिचय दिया। उन्होंने जिन विद्वानों को आमंत्रित किया उनमें Jacques Derrida (जब वे विश्व-प्रसिद्ध नहीं हुए थे), Pierre Bourdieu और Lucien Goldmann फ्रांस से, Paul de Man ज़्यूरिख से, Gershom Scholem यरूशलेम से, Theodor W. Adorno फ्रैंकफर्ट से, Hans Robert Jauss उस समय के नवस्थापित यूनिवर्सिटी ऑफ कॉन्स्टान्ज़ से, और अमेरिका से René Wellek, Geoffrey Hartman और Peter Demetz (सभी येल विश्वविद्यालय से), साथ ही उदारवादी लेखक Lionel Trilling शामिल थे। इन अतिथि विद्वानों के नाम एक ऐसे बौद्धिक नेटवर्क और पद्धतिगत परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं जो ज़ोंडी की तुलनात्मक साहित्य की अवधारणा को स्पष्ट करते हैं। हालांकि पूर्वी जर्मनी में कार्यरत जर्मन तुलनात्मक साहित्य के विद्वानों को आमंत्रित नहीं किया गया था और फ्रांस या नीदरलैंड्स के कुछ मान्यता प्राप्त विद्वानों को भी नहीं बुलाया गया। फिर भी यद्यपि उनका झुकाव पश्चिम की ओर था और उन्होंने पूर्वी यूरोप के तुलनात्मक साहित्य के विद्वानों पर कम ध्यान दिया, उनकी अंतरराष्ट्रीय (और अटलांटिक-पार) तुलनात्मक साहित्य की अवधारणा पर रूसी और प्राग संरचनावादी विद्यालयों के पूर्वी यूरोपीय साहित्यिक सिद्धांतकारों का गहरा प्रभाव था, जिनके कार्यों से René Wellek ने भी अपने कई विचार विकसित किए। ये अवधारणाएँ आज भी तुलनात्मक साहित्य सिद्धांत पर गहरा प्रभाव डालती हैं। Ludwig Maximilian University of Munich के तुलनात्मक साहित्य विभाग द्वारा प्रकाशित एक मार्गदर्शिका के अनुसार जर्मनी में 31 विभाग ऐसे हैं जो तुलनात्मक साहित्य में डिप्लोमा प्रदान करते हैं, हालांकि कुछ में यह केवल ‘माइनर’ विषय के रूप में उपलब्ध है। http://www.komparatistik.uni-muenchen.de/index.html Lehrstuhl fiir komparatistik -LMUMunchen http://www.komparatistik.uni-muenchen.de/index.htmlइनमें ऑग्सबर्ग, बायरॉयथ, फ्री यूनिवर्सिटी बर्लिन, टेक्निशे यूनिवर्सिटी बर्लिन, बोखुम, बॉन, केमनिट्ज़-ज़्विकाउ, एरफुर्ट, एर्लांगेन-न्यूर्नबर्ग, एसेन, फ्रैंकफर्ट एम माइन, फ्रैंकफर्ट आन देर ओडर, गीसन, गोटिंगेन, जेना, कार्ल्सरूए, कासेल, कॉन्स्टान्ज़, लाइपज़िग, माइंज, म्यूनिख, म्यूनस्टर, ओस्नाब्रुक, पाडरबोर्न, पोट्सडाम, रोस्टॉक, सारब्रुकन, सीगेन, स्टुटगार्ट, ट्यूबिंगन और वुपर्टाल शामिल हैं (Der kleine Komparatist, 2003)। हालांकि यह स्थिति तेजी से बदल रही है क्योंकि कई विश्वविद्यालय हाल ही में शुरू किए गए बैचलर और मास्टर ऑफ आर्ट्स कार्यक्रमों की नई आवश्यकताओं के अनुसार अपने पाठ्यक्रमों को अनुकूलित कर रहे हैं। जर्मन तुलनात्मक साहित्य एक ओर पारंपरिक फिलोलॉजी के दबाव में है और दूसरी ओर अधिक व्यावसायिक अध्ययन कार्यक्रमों के कारण, जिनका उद्देश्य छात्रों को कार्यक्षेत्र के लिए आवश्यक व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना है (जैसे ‘Applied Literature’)। क्योंकि जर्मन विश्वविद्यालय अब अपने छात्रों को मुख्यतः केवल अकादमिक बाजार के लिए तैयार नहीं कर रहे हैं, इसलिए अधिक व्यावसायिक दृष्टिकोण की आवश्यकता और भी स्पष्ट होती जा रही है।https://www.komparatistik.uni-muenchen.de/index.html Rebirth of a Discipline: The Global Origins of Comparative Studies https://www.komparatistik.uni-muenchen.de/index.html अंग्रेजी और महाद्वीपीय यूरोपीय साहित्य संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य स्थानों में तुलनात्मक साहित्य के विद्वानों के बीच एक आंदोलन चल रहा है, जिसका उद्देश्य इस अनुशासन को उस राष्ट्र-आधारित दृष्टिकोण से हटाकर एक अंतर-सांस्कृतिक दृष्टिकोण की ओर ले जाना है, जो राष्ट्रीय सीमाओं की परवाह नहीं करता। इस प्रकार के कार्यों में Alamgir Hashmi की पुस्तक The Commonwealth, Comparative Literature and the World, Gayatri Chakravorty Spivak की Death of a Discipline, David Damrosch की What Is World Literature?, Steven Tötösy de Zepetnek की “comparative cultural studies” की अवधारणा, और Pascale Casanova की The World Republic of Letters शामिल हैं। अभी यह देखना बाकी है कि यह दृष्टिकोण कितना सफल होगा, क्योंकि तुलनात्मक साहित्य की जड़ें राष्ट्र-आधारित सोच में रही हैं और अध्ययन की जाने वाली अधिकांश साहित्यिक कृतियाँ अब भी राष्ट्र-राज्य से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित हैं। वैश्वीकरण और अंतर-सांस्कृतिक अध्ययन के विकास को देखते हुए, तुलनात्मक साहित्य—जो पहले से ही एकल-भाषा राष्ट्र-राज्य दृष्टिकोण से अधिक व्यापक अध्ययन का प्रतिनिधित्व करता है—राष्ट्र-राज्य के प्रतिमान से आगे बढ़ने के लिए उपयुक्त हो सकता है। Joseph Hankinson द्वारा तुलना की ‘संबद्ध’ (affiliative) क्षमता पर दिया गया ज़ोर इस दिशा में हाल का एक प्रयास है। जबकि पश्चिम में तुलनात्मक साहित्य संस्थागत रूप से कुछ सीमाओं का सामना कर रहा है, वहीं दुनिया के कई हिस्सों—विशेषकर एशिया, लैटिन अमेरिका, कैरेबियन और भूमध्यसागरीय क्षेत्र—में यह अनुशासन फल-फूल रहा है। वर्तमान में ट्रांसनेशनल अध्ययन की प्रवृत्तियाँ उत्तर-औपनिवेशिक साहित्यकारों के बढ़ते महत्व को भी दर्शाती हैं, जैसे J. M. Coetzee, Maryse Condé, Earl Lovelace, V. S. Naipaul, Michael Ondaatje, Wole Soyinka, Derek Walcott और Lasana M. Sekou। उत्तर अमेरिका में हाल के उत्तर-औपनिवेशिक अध्ययनों के लिए George Elliott Clarke की पुस्तक Directions Home: Approaches to African-Canadian Literature, Joseph Pivato की Echo: Essays in Other Literatures और “The Sherbrooke School of Comparative Canadian Literature” (Inquire, 2011) को देखा जा सकता है। साहित्य और अन्य कलाओं के तुलनात्मक अध्ययन के क्षेत्र में Linda Hutcheon का ओपेरा पर कार्य और उनकी पुस्तक A Theory of Adaptation महत्वपूर्ण है। कनाडाई विद्वान Joseph Pivato अपनी पुस्तक Comparative Literature for the New Century के माध्यम से तुलनात्मक अध्ययन को पुनर्जीवित करने का अभियान चला रहे हैं। इसके प्रत्युत्तर में कनाडाई तुलनात्मक साहित्य के विद्वानों Susan Ingram और Irene Sywenky ने मिलकर Comparative Literature in Canada: Contemporary Scholarship, Pedagogy, and Publishing in Review का संपादन किया, जो Canadian Comparative Literature Association की एक पहल थी।https://doi.org/10.1007%2F978-3-031-18776-6 Kojo Laing, Robert Browning and Affiliative Literature https://doi.org/10.1007%2F978-3-031-18776-6 तुलनात्मक साहित्य और भारत भारत एक बहुभाषी देश है। यहाँ न केवल 1652 मातृभाषाएँ है, अपितु अनेक समुन्नत साहित्यिक भाषाएं भी हैं। जिस प्रकार अनेक वर्षों के आपसी सम्पर्क और सामाजिक द्विभाषिकता के कारण भारतीय भाषाएं अपनी रूप रचना से भिन्न होते हुए भी अपनी आर्थिक संरचना में समरूप हैं, इसी प्रकार यह भी कहा जा सकता है कि अपने जातीय इतिहास, सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्य एवं साहित्यिक संवेदना के संदर्भ में भारतीय साहित्य एक है। ‘भारतीय साहित्य और संस्कृति’ की संकल्पना के मूल्य में भारतीय संस्कृति की आधारभूत एकता और वैशिष्ट्य की पहचान की छटपटाहट है। किन्तु इस ‘पहचान’ के लिए जो प्रयास होना चाहिए था उसके लिए साहित्यिक अध्ययन का जो तुलनात्मक आधार मिलना चाहिए था और तुलनात्मक साहित्य के अध्ययन के जो संदर्भ, प्रणाली और तकनीक का विकास होना चाहिए था, वह दिखलाई नहीं पड़ता। भारत में बहुत कम विश्वविद्यालय हैं जहां ‘तुलनात्मक साहित्य’ की संकल्पना एक विधा के रूप में हो। इन्हें भी देखें तुलनात्मक भाषाशास्त्र तुलनात्मक शिक्षा तुलनात्मक भूगोल तुलनात्मक राजनीति बाहरी कड़ियाँ अनुवाद के सिद्धांत और अनुवादों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन तुलनात्मक साहित्य : भारतीय परिप्रेक्ष्य (गूगल पुस्तक ; लेखक - इन्द्रनाथ चौधुरी) भारतीय परिप्रेक्ष्य में तुलनात्मक साहित्य https://web.archive.org/web/20240707091343/https://www.academia.edu/9912523/rqyukRed_lkfgR_dk_Hkkjrh_ifjizs_esa_mn_Hko_vkSj_fodkl 7 जुलाई 2024 तुलनात्मक साहित्य की प्रासंगिकता Shortlist of Comparative Literature (Text)Books A list of comparative literature departments and programs in the US, Canada, and UK ACLA: American Comparative Literature Association BCLA: British Comparative Literature Association (with lists of national comparative literature associations world wide) CCLA/ACLC: Canadian Comparative Literature Association / Association Canadienne de Littérature Comparée ICLA: International Comparative Literature Association REELC/ENCLS: Réseau européen d'études littéraires comparées/European Network for Comparative Literary Studies CLCWeb: Comparative Literature and Culture (see the journal's Library with lists of comparative humanities journals and bibliographies of work in Comparative Literature) CLAI: Comparative Literature Association of India संदर्भ श्रेणी:तुलनात्मक साहित्य