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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

होयसल राजवंश

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होयसल राज्य होय्सल राजतंत्र 950 1346 पश्चिमी चालुक्य साम्राज्य विजयनगर साम्राज्य Map of Hoysala Kingdom at its apex.png 270 अपने विस्तार के चरमोत्कर्ष के समय होय्सल राज्य, 1050–1355 ई० शोसेवुर (अंगादि) (1026–1048) बेलुर (1048–1062) हालेबिदु (1062–1300) तिरुवन्नमलै (1300–1343) कन्नडसंस्कृत जैन धर्महिन्दू धर्म राजा अरेकल्ल 950–960 वीर बल्लाल चतुर्थ 1343–1346 होयसल प्राचीन दक्षिण भारत का एक यादव राजवंश था। यह देवगिरी के यादव राजवंश की एक शाखा थी। होयसल राजाओ के शिलालेखों में भी उनको 'यदुकुलतिलक' कहा गया है। इस राजवंश ने १०वीं से १४वीं शताब्दी तक राज किया।शास्त्री (1955), pp. 220–221 उन्होने वर्तमान कर्नाटक के लगभग सम्पूर्ण भाग तथा तमिलनाडु के कावेरी नदी की उपजाऊ घाटी वाले भाग पर अपना अधिकार जमा लिया। इन्होंने ३१७ वर्ष राज किया। इनकी राजधानी पहले बेलूर थी पर बाद में स्थानांतरित होकर हालेबिदु हो गई।Foekema (1996), p. 19. शासक नृप काम द्वितीय (1026 - 1047) होयसल विनयादित्य (1047 - 1098) एरयंग (1098 - 1102) वीर बल्लाल प्रथम (1102 -1108) विष्णुवर्धन (1108 - 1152) नरसिंह प्रथम (1152 – 1173) वीर बल्लाल द्वितीय (1173 – 1220) वीर नरसिंह द्वितीय (1220 – 1235) वीर सोमेश्वर (1235 – 1254) नृसिंह तृतीय (1254 – 1291) वीर बल्लाला तृतीय (1292 – 1343) इसके पश्चात हरिहर राय प्रथम ने विजयनगर साम्राज्य स्थापित किया। कला एवं स्थापत्य right|thumb|300px|सोमनाथपुर का चेन्नाकेशव मंदिर होयसल राजाओं का काल कला एवं स्थापत्य की उन्नति के लिये विख्यात है। होयसल काल में मंदिर निर्माण की एक नई शैली का विकास हुआ। इन मंदिरों का निर्माण भवन के समान ऊँचे ठोस चबूतरे पर किया जाता था। चबूतरों तथा दीवारों पर हाथियों, अश्वारोहियों, हंसों, राक्षसों तथा पौराणिक कथाओं से संबंधित अनेक मूर्तियाँ बनाई गयी हैं। उनके द्वारा बनवाये गये सुन्दर मंदिरों के कई उदाहरण आज भी हलेबिड, बेलूर तथा श्रवणबेलगोला में प्राप्त होते हैं। होयसलों की राजधानी द्वारसमुद्र का आधुनिक नाम हलेबिड है, जो इस समय कर्नाटक राज्य में स्थित है। वहाँ के वर्तमान मंदिरों में होयसलेश्वर का प्राचीन मंदिर सर्वाधिक प्रसिद्ध है, जिसका निर्माण विष्णुवर्धन के शासन काल में हुआ। यह 160 फुट लम्बा तथा 122 फुट चौड़ा है। इसमें शिखर नहीं मिलता। इसकी दीवारों पर अद्भुत मूर्तियाँ बनी हुई हैं, जिनमें देवताओं, मनुष्यों एवं पशु-पक्षियों आदि सबकी मूर्तियाँ हैं। विष्णुवर्द्धन ने 1117 ई. में बेलूर में चेन्नाकेशव मंदिर का भी निर्माण करवाया था। वह 178 फुट लंबा तथा 156 फुट चौड़ा है। मंदिर के चारों ओर वेष्टिनी है, जिसमें तीन तोरण बने हैं। तोरण-द्वारों पर रामायण तथा महाभारत से लिये गये अनेक सुन्दर दृश्यों का अंकन हुआ है। मंदिर के भीतर भी कई मूर्तियाँ बनी हुयी हैं। इनमें सरस्वती देवी का नृत्य मुद्रा में बना मूर्ति-चित्र सर्वाधिक सुन्दर एवं चित्ताकर्षक है। होयसल मंदिर अपनी निर्माण-शैली, आकार-प्रकार एवं सुदृढता के लिये प्रसिद्ध हैं। छबि दीर्घा इन्हें भी देखें होयसलेश्वर मंदिर होयसल वास्तु-शैली बाहरी कड़ियाँ होयसल शिल्पकला के चित्र सन्दर्भ श्रेणी:साम्राज्य श्रेणी:दक्षिण भारत श्रेणी:भारत का इतिहास श्रेणी:भारत के राजवंश