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411 समाचार
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नीम

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नीम Neem (Azadirachta indica) in Hyderabad W IMG_6976.jpg 250px Azadirachta indica, flowers & leaves प्लांटाए सपुष्पक पौधा Sapindales Meliaceae Azadirachta A. indica Azadirachta indica Antelaea azadirachta (L.) Adelb. thumb|नीम का वृक्ष thumb|नीम की निबौली नीम भारतीय मूल का एक पर्ण- पाती वृक्ष है। यह सदियों से समीपवर्ती देशों- पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, म्यानमार (बर्मा), थाईलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका आदि देशों में पाया जाता रहा है। लेकिन विगत लगभग डेढ़ सौ वर्षों में यह वृक्ष भारतीय उपमहाद्वीप की भौगोलिक सीमा को लांघ कर अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, दक्षिण पूर्व एशिया, दक्षिण एवं मध्य अमरीका तथा दक्षिणी प्रशान्त द्वीपसमूह के अनेक उष्ण और उप-उष्ण कटिबन्धीय देशों में भी पहुँच चुका है। इसका वानस्पतिक नाम Azadirachta indica है। नीम का वानस्पतिक नाम इसके संस्कृत भाषा के निंब से व्युत्पन्न है। वर्णन left|thumb| फूल व पत्तियाँ कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत. नीम एक तेजी से बढ़ने वाला पर्णपाती पेड़ है, जो 15-20 मी (लगभग 50-65 फुट) की ऊंचाई तक पहुंच सकता है और कभी-कभी 35-40 मी (115-131 फुट) तक भी ऊंचा हो सकता है। नीम गंभीर सूखे में इसकी अधिकतर या लगभग सभी पत्तियां झड़ जाती हैं। इसकी शाखाओं का प्रसार व्यापक होता है। तना अपेक्षाकृत सीधा और छोटा होता है और व्यास में 1.2 मीटर तक पहुँच सकता है। इसकी छाल कठोर, विदरित (दरारयुक्त) या शल्कीय होती है और इसका रंग सफेद-धूसर या लाल, भूरा भी हो सकता है। रसदारु भूरा-सफेद और अंत:काष्ठ लाल रंग का होता है जो वायु के संपर्क में आने से लाल-भूरे रंग में परिवर्तित हो जाता है। जड़ प्रणाली में एक मजबूत मुख्य मूसला जड़ और अच्छी तरह से विकसित पार्श्व जड़ें शामिल होती हैं। 20-40 सेमी (8 से 16 इंच) तक लंबी प्रत्यावर्ती पिच्छाकार पत्तियां जिनमें, 20 से लेकर 31 तक गहरे हरे रंग के पत्रक होते हैं जिनकी लंबाई 3-8 सेमी (1 से 3 इंच) तक होती है। अग्रस्त (टर्मिनल) पत्रक प्राय: उनुपस्थित होता है। पर्णवृंत छोटा होता है। कोंपलों (नयी पत्तियाँ) का रंग थोड़ा बैंगनी या लालामी लिये होता है। परिपक्व पत्रकों का आकार आमतौर पर असममितीय होता है और इनके किनारे दंतीय होते हैं। फूल सफेद और सुगन्धित होते हैं और एक लटकते हुये पुष्पगुच्छ जो लगभग 25 सेमी (10 इंच) तक लंबा होता है में सजे रहते हैं। इसका फल चिकना (अरोमिल) गोलाकार से अंडाकार होता है और इसे निंबोली कहते हैं। फल का छिलका पतला तथा गूदा रेशेदार, सफेद पीले रंग का और स्वाद में कड़वा-मीठा होता है। गूदे की मोटाई 0.3 से 0.5 सेमी तक होती है। गुठली सफेद और कठोर होती है जिसमें एक या कभी-कभी दो से तीन बीज होते हैं जिनका आवरण भूरे रंग का होता है। नीम के पेड़ों की व्यवसायिक खेती को लाभदायक नहीं माना जाता। मक्का के निकट तीर्थयात्रियों के लिए आश्रय प्रदान करने के लिए लगभग 50000 नीम के पेड़ लगाए गए हैं। नीम का पेड़ बहुत हद तक चीनीबेरी के पेड़ के समान दिखता है, जो एक बेहद जहरीला वृक्ष है। thumb|हरेली पर्व के अवसर पर नीम के साथ छत्तीसगढ़ का एक ग्रामीण पारिस्थितिकी नीम का पेड़ सूखे के प्रतिरोध के लिए विख्यात है। सामान्य रूप से यह उप-शुष्क और कम नमी वाले क्षेत्रों में फलता है जहाँ वार्षिक वर्षा 400 से 1200 मिमी के बीच होती है। यह उन क्षेत्रों में भी फल सकता है जहाँ वार्षिक वर्षा 400 मिमी से कम होती है पर उस स्थिति में इसका अस्तित्व भूमिगत जल के स्तर पर निर्भर रहता है। नीम कई अलग-अलग प्रकार की मिट्टी में विकसित हो सकता है, लेकिन इसके लिये गहरी और रेतीली मिट्टी जहाँ पानी का निकास अच्छा हो, सबसे अच्छी रहती है। यह उष्णकटिबंधीय और उपउष्णकटिबंधीय जलवायु में फलने वाला वृक्ष है और यह 22-32° सेंटीग्रेड के बीच का औसत वार्षिक तापमान सहन कर सकता है। यह बहुत उच्च तापमान को तो बर्दाश्त कर सकता है, पर 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान में मुरझा जाता है। नीम एक जीवनदायी वृक्ष है विशेषकर तटीय, दक्षिणी जिलों के लिए। यह सूखे से प्रभावित (शुष्क प्रवण) क्षेत्रों के कुछ छाया देने वाले (छायादार) वृक्षों में से एक है। यह एक नाजुक पेड़ नहीं हैं और किसी भी प्रकार के पानी मीठा या खारा में भी जीवित रहता है। तमिलनाडु में यह वृक्ष बहुत आम है और इसको सड़कों के किनारे एक छायादार पेड़ के रूप में उगाया जाता है, इसके अलावा लोग अपने आँगन में भी यह पेड़ उगाते हैं। शिवकाशी (सिवकासी) जैसे बहुत शुष्क क्षेत्रों में, इन पेड़ों को भूमि के बड़े हिस्से में लगाया गया है और इनकी छाया में आतिशबाजी बनाने के कारखाने का काम करते हैं। उपयोग सितंबर 2015 नीम एक बहुत ही अच्छी वनस्पति है जो की भारतीय पर्यावरण के अनुकूल है और भारत में बहुतायत में पाया जाता है। आयुर्वेद में नीम को बहुत ही उपयोगी पेड़ माना गया है। इसका स्वाद तो कड़वा होता है लेकिन इसके फायदे अनेक और बहुत प्रभावशाली है। http://zeenews.india.com/hindi/news/%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%A4/%E0%A4%95%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%B5%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A2%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD/164850 कड़वे नीम के ढेरों लाभ en Zeenews.india.com 2013-03-28 2020-01-26 https://web.archive.org/web/20150221080805/http://zeenews.india.com/hindi/news/%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%A4/%E0%A4%95%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%B5%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A2%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD/164850 21 फ़रवरी 2015 live http://www.amarujala.com/feature/lifestyle/health-fitness/home-remedies/health-benefits-of-neem/ Health Benefits Of Neem - नीम के ये 5 फायदे नहीं जानते होंगे आप - Amar Ujala Hindi News Live Amarujala.com 2020-01-26 https://web.archive.org/web/20150221091136/http://www.amarujala.com/feature/lifestyle/health-fitness/home-remedies/health-benefits-of-neem/ 21 फ़रवरी 2015 live http://religion.bhaskar.com/news/yoga-heres-how-to-use-half-the-white-hair-will-be-black-2755205.html Religion News in Hindi, Dharam, Spirituality News, Today Rashifal & Panchang - Dainik Bhaskar Religion.bhaskar.com 1970-01-01 2020-01-26 https://web.archive.org/web/20150222092322/http://religion.bhaskar.com/news/yoga-heres-how-to-use-half-the-white-hair-will-be-black-2755205.html 22 फ़रवरी 2015 dead १- नीम की छाल का लेप सभी प्रकार के चर्म रोगों और घावों के निवारण में सहायक है। २- नीम की दातुन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं। ३- नीम की पत्तियां चबाने से रक्त शोधन होता है और त्वचा विकार रहित और कांतिवान होती है। हां पत्तियां अवश्य कड़वी होती हैं, लेकिन कुछ पाने के लिये कुछ तो खोना पड़ता है मसलन स्वाद। ४- नीम की पत्तियों को पानी में उबाल उस पानी से नहाने से चर्म विकार दूर होते हैं और ये खासतौर से चेचक के उपचार में सहायक है और उसके विषाणु को फैलने न देने में सहायक है। ५- नींबोली (नीम का छोटा सा फल) और उसकी पत्तियों से निकाले गये तेल से मालिश की जाये तो शरीर के लिये अच्छा रहता है। ६- नीम के द्वारा बनाया गया लेप बालो में लगाने से बाल स्वस्थ रहते हैं और कम झड़ते हैं। ७- नीम की पत्तियों के रस को आंखों में डालने से आंख आने की बीमारी में लाभ मिलता है(नेत्रशोथ या कंजेक्टिवाइटिस) ८- नीम की पत्तियों के रस और शहद को २:१ के अनुपात में पीने से पीलिया में फायदा होता है और इसको कान में डालने से कान के विकारों में भी फायदा होता है। ९- नीम के तेल की ५-१० बूंदों को सोते समय दूध में डालकर पीने से ज़्यादा पसीना आने और जलन होने सम्बन्धी विकारों में बहुत फायदा होता है। १०- नीम के बीजों के चूर्ण को खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लेने से बवासीर में काफ़ी फ़ायदा होता है। औषधि नीम घनवटी नामक आयुर्वेद में औषधि है जो की इसके पेड़ से निकाली जाती है। इसका मुख्य घटक नीमघन सत् होता है। यह मधुमेह में अत्यधिक लाभकारी है इसका प्रयोग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह आयुर्वेद में एक प्रकार की औषधि है जी की नीम (Azadirachta indica) के पेड़ से निकली जाती है। नीम के पत्ते खाने से मुंह की दुर्गन्ध , दांत दर्द, दांत कुलना, शरीर के अंदर के हनिकारिक बैक्टीरिया, कैंसर की बीमारी, खून साफ करना, जीभ से स्वाद, चरम रोग, आँख न आना, आलस न आना, शरीर में ऊर्जा का बना रहना, कफ-कोल्ड न होना, शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना जैसे,सेकड़ो-हज़ारो फायदे हमें नीम की पाती खाने से मिलता हैं। मुख्य लाभ यह मधुमेह में अत्यधिक लाभकारी है।Anupama https://www.bimbim.in/medicine/neem-ghan-vati/814 नीम घन वटी के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस | Neem Ghan Vati Detail and Uses in Hindi Bimbim.in 2016-02-01 2020-01-26 https://web.archive.org/web/20171201031502/https://www.bimbim.in/medicine/neem-ghan-vati/814 1 दिसंबर 2017 live इसका प्रयोग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह जीवाणु नाशक, रक्त्शोधक एवं त्वचा विकारों में गुणकारी हैpatanjali https://www.patanjaliayurved.net/product/ayurvedic-medicine/vati/neem-ghan-vati/625 Patanjali Neem Ghan Vati 40 gm - Buy Online Patanjaliayurved.net 2020-01-26 https://web.archive.org/web/20171201035123/https://www.patanjaliayurved.net/product/ayurvedic-medicine/vati/neem-ghan-vati/625 1 दिसंबर 2017 dead पतंजलि नीम घन वटी https://www.ayurtimes.in/neem-ghan-vati-hindi/ पतंजलि नीम घनवटी (Neem Ghan Vati) घटक द्रव्य, प्रयोग एवं लाभ, मात्रा, दुष्प्रभाव Ayurtimes.in 2020-01-26 https://web.archive.org/web/20171226031050/https://www.ayurtimes.in/neem-ghan-vati-hindi/ 26 दिसंबर 2017 dead । यह बुखार में भी लाभकारी है। नीम त्वचा के औषधीय कार्यों में उपयोग की जाती है। नीम के उपयोग से त्वचा की चेचक जैसी भयंकर बीमारियाँ नहीं होती तथा इससे रक्त शुद्ध होता है। नीम स्वास्थ्यवर्धक एवं आरोग्यता प्रदान करने वाला है। ये सभी प्रकार की व्याधियों को हरने वाला है, इसे मृत्यु लोक का कुल्पवृक्ष कहा जाता है। चरम रोग में इसका विशेष महत्व है। भारत में नीम का उपयोग एक औषधि के रूप में किया जाता है, आज के समय में बहुत-सी एलोपैथिक दवाइयाँ नीम की पत्ती व उसकी छल से बनती है। नीम के पेड़ की हर अंग फायदेमंद होता है, बहुत बीमारियों का उपचार इससे किया जाता है। भारत में नीम का पेड़ घर में लगाना शुभ माना जाता है। नीम स्वाद में कड़वा होता है, लेकिन नीम जितनी कड़वी होती है, उतनी ही फायदे वाली होती है। भारत में नीम का उपयोग एक औषधि के रूप में किया जाता है, आज के समय में बहुत सी एलोपैथिक दवाइयां नीम की पत्ती व उसकी छल से बनती है। नीम के पेड़ की हर अंग फायदेमंद होता है, बहुत बीमारियों का उपचार इससे किया जाता है। भारत में नीम का पेड़ घर में लगाना शुभ माना जाता है। नीम स्वाद में कड़वा होता है, लेकिन नीम जितनी कड़वी होती है, उतनी ही फायदे वाली होती है। यहां हम आपको नीम के गुण और उसके लाभ के बारे में बता रहे हैं । जिसे आप घर में ही उपयोग कर बहुत बीमारियों का उपचार कर सकते हैं। सन्दर्भ श्रेणी:मेलिआसीए श्रेणी:वृक्ष