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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

शैलाश्रय,सिंघनपुर,रायगढ़

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thumb|right|200px|छत्तीसगढ़ राज्य के संरक्षित स्मारक छत्तीसगढ़ राज्य के रायगढ़ जिले में सिंघनपुर नामक स्थान पर एक चित्रित शैलाश्रयhttp://www.cgculture.in/hindi/archaelogy/shailashya.htm चित्रित शैलाश्रय सिंघनपुर, रायगढ़ २४ सितंबर २००९ एचटीएम छत्तीसगढ़ शासनजनवरी 2021 InternetArchiveBot स्थित है। यह शैलाश्रय दक्षिणाभिमुखी है और रायगढ़ से २० किलोमीटर पश्चिम में एक पहाड़ी पर वर्षों पूर्व प्रकृति द्वारा निर्मित है। मध्य दक्षिण पूर्वी रेलमार्ग के बिलासपुर झारसगुड़ा सेक्शन पर स्थित भूपदेवपुर नामक स्टेशन से यह स्थल दक्षिण में एक किलो मीटर की दूरी पर है। यह छत्तीसगढ़ में प्राप्त प्राचीन शैलचित्र युक्त शैलाश्रयों में से एक है, जिसकी तिथि लगभग ईसापूर्व ३० हज़ार वर्ष निर्धारित की गई है। इनकी खोज एंडरसन द्वारा १९१० के आसपास की गई थी। इंडिया पेंटिग्स १९१८ में तथा इन्साइक्लोपिडिया ब्रिटेनिका के १३वें अंक में रायगढ़ जिले के सिंघनपुर के शैलचित्रों का प्रकाशन पहली बार हुआ था।http://www.cgnews.in/permanent/Chhattisgarh/TOURISM/new_page_1.htm राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल २४ सितंबर २००९ एचटीएम छत्तीगढ न्यूज़जनवरी 2021 InternetArchiveBot तत्पश्चात श्री अमरनाथ दत्त ने 1923 से 1927 के मध्य रायगढ़ तथा समीपस्थ क्षेत्रों में शैल चित्रो का सर्वेक्षण किया। डॉ एन. घोष, डी. एच. गार्डन द्वारा इस सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। तत्पश्चात स्व. पंडित श्री लोचनप्रसाद पांडेय द्वारा भी शैलचित्रो के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करायी गई।http://cgavp.wordpress.com/2007/12/08/%E0%A4%9B%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A4%97%E0%A5%9D-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81/ छत्तीसगढ़ में करोड़ो वर्ष पुराने शैलचित्र २४ सितंबर २००९ एचटीएम जोहार इस शैलाश्रय के चित्र अधिक समय बीत जाने एवं प्राकृतिक दुष्प्रभावों के कारण धूमिल हो गए हैं। अंकित चित्रों में सीढ़ीनुमा पुरुष, मत्स्यांगना, शिकार दृश्य, पंक्तिबद्ध नर्तक टोली एवं मानवाकृतियाँ सम्मिलित हैं। मत्स्यांगना, कंगारू सदृश पशु, गोह एवं सर्पाकृति के अंकन अद्वितीय हैं। इस शैलाश्रय में पहले २३ कलाकृतियाँ देखी गयी थीं जिनमें से अब केवल १३ ही बची हैं। यहाँ की सीढ़ीनुमा लम्बी मानवाकृति की तुलना आस्ट्रेलिया में प्राप्त सीढ़ीनुमा पुरुष से की जाती है। विविध पशु आकृतियाँ, वन भैंसा, बंदर, छिपकली तथा अन्य चित्रों के अंकन में आदिमानवों की कला-संस्कृति आज भी जीवित है। चित्रित शैलाश्रयों के चित्रों के अध्ययन से वहाँ रहने वाले निवासियों के उस काल के जीवन और पर्यावरण तथा प्रकृति की जानकारी प्राप्त होती है। मध्याश्वीय काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक के चित्र रायगढ़, बस्तर, कांकेर, दुर्ग कोरिया आदि जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित शैलाश्रयों में पाए गए हैं। यह स्मारक छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा संरक्षित है।संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग छत्तीसगढ़ शासन धरोहर:राज्य के संरक्षित स्मारक जनवरी २००६ छत्तीसगढ़ शासन रायपुर 33 24 सितंबर 2009 सन्दर्भ श्रेणी:पर्यटन श्रेणी:छत्तीसगढ़