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बलराम
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Balarama Mural.jpg बलराम एक मंदिर में टंगा हुआ १७वीं शताब्दी का बलराम का भित्ति-चित्र बलराम संकर्षण: शेषनाग का अवतार श्रीकृष्ण के बड़े भाई हल, गदा वसुदेव रोहिणी कृष्ण और सुभद्रा निष्स्थ , उल्मुख और वत्सला रेवती
महाकाव्यों और पुराणों के अनुसार बलराम एक हिंदू देवता हैं, और कृष्ण के बड़े भाई हैं। वह त्रय देवताओं में से एक के रूप में, जगन्नाथ परंपरा में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्हें हलधर , हलायुध , बलदेव, बलभद्र और संकर्षण के नाम से भी जाना जाता है।https://www.timesnowhindi.com/spirituality/article/kaun-they-balarama-balarama-jayanti-story-facts-vrat-katha-kiska-avtar-they-balarama-ke-naam/306921 Balarama Facts: किसका अवतार थे कान्हा के दाऊ बलराम, क्यों कहते हैं उनको किसानों का देवता 2020-08-09 www.timesnowhindi.com hi 2021-07-23
बलराम या संकर्षण का पूजन बहुत पहले से चला आ रहा था, पर इनकी सर्वप्राचीन मूर्तियाँ मथुरा और ग्वालियर के क्षेत्र से प्राप्त हुई हैं। ये शुंगकालीन हैं। कुषाणकालीन बलराम की मूर्तियों में कुछ व्यूह मूर्तियाँ विष्णु के समान चतुर्भुज प्रतिमाए हैं और कुछ उनके शेष से संबंधित होने की पृष्ठभूमि पर बनाई गई हैं। ऐसी मूर्तियों में वे द्विभुज हैं और उनका मस्तक मंगलचिह्नों से शोभित सर्पफणों से अलंकृत है। बलराम का दाहिना हाथ अभयमुद्रा में उठा हुआ है और बाएँ में मदिरा का चषक है। बहुधा मूर्तियों के पीछे की ओर सर्प का आभोग दिखलाया गया है। कुषाण काल के मध्य में ही व्यूहमूर्तियों का और अवतारमूर्तियों का भेद समाप्तप्राय हो गया था, परिणामतः बलराम की ऐसी मूर्तियाँ भी बनने लगीं जिनमें नागफणाओं के साथ ही उन्हें हल-मूसल से युक्त दिखलाया जाने लगा। गुप्तकाल में बलराम की मूर्तियों में विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। उनके द्विभुज और चतुर्भुज दोनों रूप चलते थे। कभी-कभी उनका एक ही कुंडल पहने रहना "बृहत्संहिता" से अनुमोदित था। स्वतंत्र रूप के अतिरिक्त बलराम तीर्थंकर नेमिनाथ के साथ, देवी एकानंशा के साथ, कभी दशावतारों की पंक्ति में दिखलाई पड़ते हैं।
कुषाण और गुप्तकाल की कुछ मूर्तियों में बलराम को सिंहशीर्ष से युक्त हल पकड़े हुए अथवा सिंहकुंडल पहिने हुए दिखलाया गया है। इनका सिंह से सम्बन्ध कदाचित् जैन परंपरा पर आधारित है।
मध्यकाल में पहुँचते-पहुँचते ब्रज क्षेत्र, जहाँ कुषाणकालीन मदिरा पीने वाले द्विभुज बलराम मूर्तियों की परंपरा ही चलती रही, के अतिरिक्त बलराम की प्रतिमा का स्वरूप बहुत कुछ स्थिर हो गया। हल, मूसल तथा मद्यपात्र धारण करनेवाले सर्पफणाओं से सुशोभित बलदेव बहुधा समपद स्थिति में अथवा कभी एक घुटने को किंचित झुकाकर खड़े दिखलाई पड़ते हैं। कभी-कभी रेवती भी साथ में रहती हैं।
भगवान बलभद्र के वंशज मुख्य रूप से ब्याहुत कलवार हैं।ब्याहुत कलवार भगवान बलभद्र की पूजा हमेशा अपने पूर्वज और अराध्य के रूप में करते है।किसी भी आयोजन शादी,ब्याह आदि में वे भगवान बलभद्र की पूजा अवश्य करते है।
जन्म
बलराम वसुदेव के पुत्र थे । मथुरा के अत्याचारी दुष्ट राजा कंस अपनी चचेरी बहन देवकी के बच्चों को मारने पर आमादा था , क्योंकि उसे भविष्यवाणी थी कि वह उसकी आठवीं संतान के हाथों मरेगा। हरिवंश में कहा गया है कि कंस ने कैद में बंद देवकी के पहले छह बच्चों को पत्थर के फर्श पर पटक कर मार डाला। जब बलराम का गर्भधारण हुआ, तो विष्णु ने हस्तक्षेप किया, हिंदू किंवदंतियों के अनुसार; उनके भ्रूण को देवकी के गर्भ से वसुदेव की पहली पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित किया गया था। कुछ ग्रंथों में, इस स्थानांतरण से बलराम को संकर्षण (जिसे घसीटा गया हो) की उपाधि मिलती है। बलराम अपने छोटे भाई कृष्ण के साथ अपने पालक-माता-पिता के साथ, नंद और उनकी पत्नी यशोदा के घर में बड़े हुए । भागवत पुराण के अध्याय 10 में इसका वर्णन इस प्रकार किया गया है:भगवान सब कुछ के आत्मा के रूप में अपनी एकीकृत चेतना (योगमाया) की रचनात्मक शक्ति को बलराम और कृष्ण के रूप में अपने जन्म के लिए अपनी योजना के बारे में बताते हैं। वह बलराम से शुरू करते हैं। शेष का पूरा भाग, जो मेरा निवास है, देवकी के गर्भ में एक भ्रूण बन जाएगा जिसे आप रोहिणी के गर्भ में प्रत्यारोपित करेंगे।उनका नाम राम रखा गया था, लेकिन उनकी महान शक्ति के कारण उन्हें बलराम, बलदेव या बलभद्र कहा जाता था, जिसका अर्थ है शक्तिशाली राम । उनका जन्म श्रावण पूर्णिमा को हुआ था, जो रक्षा बंधन के अवसर के साथ मेल खाता है ।
परिचय
बलभद्र या बलराम श्री कृष्ण के बड़े भाई थे जो रोहिणी के गर्भ से उत्पन्न हुए थे। बलराम, हलधर, हलायुध, संकर्षण आदि इनके अनेक नाम हैं। बलभद्र के सगे सात भाई और एक बहन सुभद्रा थी जिन्हें चित्रा भी कहते हैं। इनका ब्याह रेवत की कन्या रेवती से हुआ था। कहते हैं, रेवती 21 हाथ लंबी थीं और बलभद्र जी ने अपने हल से खींचकर इन्हें छोटी किया था। बलराम के दो पुत्र निष्स्थ और उल्मुख का जिक्र हरिवंश पुराण में किया गया है और साथ ही बलराम की एक पुत्री भी थीं जिनका नाम था वत्सला जिसका विवाह उन्हीं की बहन सुभद्रा के पुत्र अभिमन्यु से हुआ था।
इन्हें नागराज अनंत (शेषनाग) का अवतार कहा जाता है और इनके पराक्रम की अनेक कथाएँ पुराणों में वर्णित हैं। ये गदायुद्ध में विशेष प्रवीण थे। दुर्योधन इनका ही शिष्य था। इसी से कई बार इन्होंने जरासंध को पराजित किया था। श्रीकृष्ण के पुत्र शांब जब दुर्योधन की कन्या लक्ष्मणा का हरण करते समय कौरव सेना द्वारा बंदी कर लिए गए तो बलभद्र ने ही उन्हें दुड़ाया था। स्यमंतक मणि लाने के समय भी ये श्रीकृष्ण के साथ गए थे। मृत्यु के समय इनके मुँह से एक बड़ा साँप निकला और प्रभास के समुद्र में प्रवेश कर गया था।
सन्दर्भ
श्रेणी:महाभारत के पात्र
श्रेणी:विष्णु अवतार