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411 समाचार
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कादेश का युद्ध

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34.555487 N 36.498028 E title कादेश का युद्ध 300px रामेसेस द्वितीय अपने रथ पर कादेशके युद्ध में (अबू सिम्बल मंदिर का चित्र .) रामेसेस के सीरिया के दूसरे अभियान १२७४ ईसापूर्व कादेश नगर कोई भी पक्ष नहीं जीता मिस्र साम्राज्य हित्तिते साम्राज्य रामेसेस द्वितीय Grand Vizier Paser Prince Amunherkhepeshef Prince Ramesses Prince Khaemweset Prince Pareherwenemef मुवाताल्ली द्वितीय Hattusili III Mittanamuwash of Pitassa Masturish of Seha River Land Piyama-Inarash of Wilusa Sahurunuwash of Carchemish मित्तानी का सत्वर Niqmepa of Ugarit Talmi-Sarruma of Aleppo Niqmaddu of Kadesh 20,000 योद्धा 16,000 पद सैनिक 2,000 रथM. Healy, Qadesh 1300 BC: Clash of the warrior kings, 39 4,000 योद्धा करीब 23,000–50,000 योद्धा करीब 15,000Richard Holmes, [[Battlefield "Decisive Conflicts in History" ]], 2006–40,000 पद सैनिकM. Healy, Qadesh 1300 BC: Clash of the warrior kings, 22 (not engaged) करीब 2,500–3,700 रथ करीब 9,000–11,100 योद्धाM. Healy, Qadesh 1300 BC: Clash of the warrior kings, 21 ज्ञात नहीं ज्ञात नहीं कादेश का युद्ध (Battel of Kadesh) रामेसेस द्वितीय के नेतृत्व में मिस्र साम्राज्य और मुवाताल्ली द्वितीय के नेतृत्व में हित्तिते साम्राज्य के बीच कादेश नाम के नगर में हुआ था। यह युद्ध १२७४ ईसापूर्व में हुआ था और यह इतिहास का पहला युद्ध है जिसका लिखित प्रमाण है साथ ही युद्ध में रणनीति का भी उल्लेख है।Kitchen, K. A., "Ramesside Inscriptions", volume 2, Blackwell Publishing Limited, 1996, pp. 16–17. यह इतिहास का एेसा युद्ध है जिसमे कई रथों का उपयोग हुआ था, लगभग ५००० से ६००० रथ। यह युद्ध दोनों देशों के बीच शांति समझौते के साथ ख़त्म हुआ।http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130627_extradition_dp.shtml संग्रहीत प्रति 3 जून 2014 https://web.archive.org/web/20130630153453/http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130627_extradition_dp.shtml 30 जून 2013 live युद्ध का कारण प्राचीन मिस्र में कई वर्षॆं तक विदेशी हिक्सोस लोगों ने राज किया पर धीरे धीरे मिस्र के मूल राजाओं की शक्ति बढ़ी और उन्होंने ह्य्क्सोस के राज को हटा दिया और साम्राज्यवाद की नीति अपनाकर अपने पडौसी राज्यों को जीतना शुरू कर दिया। मिस्र के १८ वें वंश के राजाओं ने सबसे पहले इस नीति को अपनाया और सबसे पहला मिस्र साम्राज्य खड़ा किया, १८ वें वंश के राजा थुतमोस तृतीय अपनी दिग्विजिय के कारण काफी प्रसिद्ध हुए। पर बाद में १८ वें वंश के राजा अखेनातेन के काल में मिस्र साम्राज्य डगमगाने लगा और उसने अपने कई प्रान्त खो दिए, अखेनातेन ने प्राचीन मिस्र के पारंपरिक धर्म को त्याग कर अतेन नाम के ईश्वर की पूजा करने लगा और इसे राष्ट्रीय धर्म घोषित कर दिया था जिस कारण मिस्र में अराजकता फ़ैल गई थी। अखेनातेन के बाद उसके पुत्र तुथंखमुन ने और उसके उत्तराधिकारियों ने मिस्र के खोये हुए गौरव को वापस लाने का काफी प्रयास किया पर वे नाकाम रहे। होरेम्हेब जो १८ वें वंश का आखिरी राजा था उसकी कोई संतान नहीं थी इसीलिए उसने अपने अमात्य रामेसेस प्रथम को अपना उत्तराधिकारी बनाया और रामेसेस प्रथम ने १९ वें वंश की नीव रखी। रामेसेस प्रथम और उसके पुत्र सेती प्रथम ने भी १८ वें वंश की तरह साम्राज्यवाद की नीति अपनाई और मिस्र के खोये गौरव को लाने का प्रयास किया। कर्नाक मंदिर के लेखोंं के अनुसार सेती प्रथम ने कन्नन और सीरिया पर विजय पाई थी। वही मिस्र के उत्तर में इराक से लेकर तुर्क तक फैला हित्तिते साम्राज्य भी साम्राज्य विस्तार कर रहा था। सिरिया तब १८ वें वंश के अधीन था पर वो हित्तिते साम्राज्य के अधीन चला गया था। मिस्र साम्राज्य के खोये हुए प्रांत को जितने के लिए रामेसेस ने कादेश पर हमला किया जो कि सिरिया का एक नगर था।Bryce, Trevor, The Kingdom of the Hittites, Oxford University Press, new edition 2005, ISBN 0-19-927908-Xm p.233 रामेसेस के पिता सेती प्रथम ने अपने काल में कादेश पर विजय पाई थी, पर सेती प्रथम के शासन काल के अंतिम समय में कादेश दुबारा हित्तिते साम्राज्य के अधीन हो गया। यह भी युद्ध का कारण था। कादेश अभियान thumb|350px|१२७९ ईसा पूर्व में अपने चरम पर मिस्र साम्राज्य (हरा) रामेसेस के अधीन, हित्तिते साम्राज्य (हर) की सीमा तक रामेसेस ने अपने शासन काल के ५वें वर्ष में दक्षिण से कादेशपर हमला किया। वहीं हित्तिते राजा मुवाताल्ली ने अपने पडौसी राज्य के साथ मिलकर मिस्र की सेना के विरुद्ध एक संघ बना लिया था। मुवाताल्ली ने अपनी सेना कादेश में जमा कर ली और अपने गुप्तचर रामेसेस के पास भेजे, उन गुप्तचरों ने रामेसेस को झूठ कहा की वे कदेश्से दूर है। सेना सन १२७४ ईसापूर्व में रामेसेस अपनी सेना के साथ अपनी राजधानी पी रामेसेस से कादेश की तरफ बड़ा, उसकी सेना अमुन, रा, सेत और पिताह नाम की चार टुकडियो में विभाजित थी, एक और छोटी टुकड़ी थी नारिन नाम की जिसका अधिक उल्लेख नहीं है। मिस्र वासियों के अलावा रामेसेस की सेना में कानन, सीरिया, नूबिया आदि देशों के लोग भी थे। रामेसेस कई रथो का निर्माण कराया, इतना की इतिहासकार सिर्फ अंदाज़ा लगा सकते हैं।Goedicke, Hans (December 1966). "Considerations on the Battle of Kadesh". The Journal of Egyptian Archaeology 52: 71–80 [78]. doi:10.2307/3855821 मुवाताल्ली की सेना के बारे में रामेसेस लिखवाता है कि मुवाताल्ली अपने १९ पड़ोसी राज्यों की सेना बुलवाई थी रामेसेस के विरुद्ध। युद्ध thumb|left|350px|मिस्र सैनिक द्वारा हत्ती गुप्तचरों की पिटाई रामेसेस अपने लेख में लिखवाता है कि वह अपनी सेना के साथ कादेश की तरफ बड़ा, रामेसेस अमुन टुकड़ी में था। वह सबसे पहले कादेश की पहाडियों पर पहोचा, फिर ओरोंतेस नदी पार कर वह कादेश नगर पहोचा। अमुन टुकड़ी रामेसेस के पीछे थी, रा टुकड़ी पास ही के कज्बे में थी, पिताह टुकड़ी दक्षिण के एक कज्बे में थी और सेत टुकड़ी सड़क रास्ते आ रही थी। जब रामेसेस कादेश से ११ किलोमीटर दूर था तब उसे कुछ बंजारे मिले जो असल में मुवाताल्ली के गुप्तचर थे, उन्होंने रामेसेस को झूठ बताया की मुवाताल्ली फैरो (रामेसेस) से डर गया है और हत्ती सेना यहाँ आने से डर रही है, हत्ती सेना अलेप्पो की भूमि में है जो यहाँ से २०० किलोमीटर दूर है। पर बाद में जब उन बंजारों की पिटाई की गयी तो उन्होंने सच कबूला और बताया की मुवाताल्ली की सेना पास ही में है।Joyce Tyldesley, Ramesses II: Egypt's Greatest Pharaoh, Penguin Books, 2000. pp.70–71 पूरी हत्ती सेना ने एक साथ मिस्र की सेना पर हमला बोल दिया। रामेसेस ने अपनी सेना को टुकडियो में बाट दिया था और वे एक दुसरे से काफी दूर थी, हत्ती सेना ने सबसे पहले रा टुकड़ी पर हमला किया और उसे लघभग नष्ट कर दिया, बचे हुए योद्धा किसी कदर अमुन टुकड़ी तक पहोचे। रामेसेस ने पिताह और सेत टुकड़ी को सन्देश भेजा पर तब तक हत्ती सेना अमुन टुकड़ी तक पहोच चुकी थी। हत्ती रथो ने अमुन टुकड़ी की सुरक्षा दीवार तोड़ डाली और उन्हें मारना शुरू कर दिया। रामेसेस अपने लेख में लिखवाता है कि उसे हत्ती सेना ने घेर लिया था, उसके पास कोई अंगरक्षक या कोई योद्धा न था। फिर रामेसेस ने मोर्चा संभाला और कई सेसैनिक को मार गिराया, फिर कई अमुन और रा टुकड़ी के बचे हुए योद्धा अपने राजा को बचाने आ गए। हत्ती सेना के कई योद्धा मिस्र के शिविरों को लुटने के लिए चले गए, और जो बचे थे उनसे रामेसेस और बचे हुए मिस्र के योद्धा लड़ रहे थे। रथ और धनुष के सहारे मिस्र सैनिक ने काफी हत्ती सेसैनिक को हरा दिया। रामेसेस को अच्छा अवसर मिला और उसने बेफिक्र हत्ती सेना पर हमला कर दिया जो लूटपाट कर रही थी, रामेसेस ने हत्ती सैनिक को ओरोंतेस नदी के पार खदेड़ दिया। हत्ती सेना के खदेड़े जाने के बाद भी मुवाताल्ली ने दुबारा एक बड़ी सेना भेजी, उस सेना में कई रथ, पैदल सैनिक थे जो नगर की दीवार के भीतर थे। हत्ती सेना दुबारा मिस्र के शिविर तक पहोची पर अचानक से नारिन टुकड़ी ने हमला बोल दिया, हत्ती सेना चकित हो गई थी। तब तक रामेसेस ने अपनी पूरी सेना जमा कर ली और हत्ती सेना पर हमला बोल दिया।http://www.hittites.info/history.aspx?text=history%2fMiddle+Late+Empire.htm संग्रहीत प्रति 14 जून 2014 https://web.archive.org/web/20131014163832/http://www.hittites.info/history.aspx?text=history%2FMiddle+Late+Empire.htm 14 अक्तूबर 2013 live अब हत्ती सेना घिर चुकी थी और लगभग तबाह हो चुकी थी, बचे हुए हत्ती सैनिक कादेश तक किसी तरह पहोच गए।Ancient Discoveries: Egyptian Warfare. History Channel Program: Ancient Discoveries: Egyptian Warfare with panel of three experts. Event occurs at 12:00 EDST, 2008-05-14. Archived from the original on April 16, 2008. Retrieved 2008-05-15. "Egyptian monuments and great works of art still astound us today. We will reveal another surprising aspect of Egyptian life--their weapons of war, and their great might on the battlefield. A common perception of the Egyptians is of a cultured civilization, yet there is fascinating evidence which reveals they were also a war faring people, who developed advanced weapon making techniques. Some of these techniques would be used for the very first time in history and some of the battles they fought were on a truly massive scale." अगले दिन दुबारा युद्ध शुरू हुआ, रामेसेस लिखवाता है कि मुवाताल्ली ने उसे युद्धविराम संधि के लिए बुलवाया था, पर हित्तिते लेख में इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता। मिस्र सैनिक कादेश की दीवारों को गिराने में नाकाम रहे और मुवाताल्ली भी मिस्र सैनिको को खदेड़ने में नाकाम रहा जबकि लग रहा था की जीत उसके पक्ष में है। दोनों पक्षों को काफी हानी हुई और आखिर युद्ध बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गया। इन्हेँ भी देखेँ अबू सिम्बल मन्दिर सन्दर्भ 2 श्रेणी:मिस्र का इतिहास श्रेणी:विश्व के युद्ध श्रेणी:हत्ती श्रेणी:प्राचीन आनातोली लोग श्रेणी:तुर्की का इतिहास