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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

आघात (स्वनविज्ञान)

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बोलते समय किसी शब्द के किसी अक्षर (syllable) को या किसी शब्दसमूह (phrase) के किसी शब्द के उच्चारण को जो विशेष बल दिया जाता है, उसे आघात, बलाघात या स्वराघात (Accent) कहते हैं। शब्दों के उच्चारण में अक्षरों पर जो जोर (धक्का) लगता है, उसे आघात या बल कहते हैं। ध्वनि, कंपन की लहरों से बनती है। यह बल अथवा आघात (झटका) उन ध्वनिलहरों के छोटी-बड़ी होने पर निर्भर होता है। ‘मात्रा’ का उच्चारण काल के परिमाण से संबंधित रहता है और ‘आघात’ का स्वर-कंपन की छुटाई-बड़ाई के परिमाण से। इसी से फेफड़ों में से निःश्वास जितने बल से निकलता है, उसके अनुसार बल में अंतर पड़ता है। इस बल के उच्च-मध्य और नीच होने के अनुसार ही ध्वनि के तीन भेद किए जाते हैं सबल, समबल, निर्बल। जैसे, ‘कालिमा’ में मा तो सबल है, इसी पर धक्का लगता है और ‘का’ पर उससे कम और लि पर सबसे कम बल पड़ता है, अतः समबल और ‘लि’ निर्बल है। इसी प्रकार पत्थर में ‘पत्’, अंतःकरण में ‘अः’, चंदा में ‘चन्’ सबल अक्षर हैं। बलाघात के भेद ध्वनि बलाघात, अक्षर बलाघात, शब्द बलाघात, वाक्य बलाघात इन्हें भी देखें स्वनविज्ञान (phonetics) श्रेणी:भाषा-विज्ञान