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संभववाद (भूगोल)
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संभववाद
manav is me parkarti ka das nahi hota balki parkarti manav ki das hoti h मानव भूगोल में संभववादPoornima Shekhar Singh Bhaugolik Chintan Ki Navin Pravratiyan https://books.google.com/books?id=u2OcgfpmP9EC&pg=PA34 September 2007 Rajkamal Prakashan Pvt Ltd 978-81-267-1335-6 34– (Possibilism) एक ऐसे संप्रदाय (स्कूल) के रूप में स्थापित हुआ जिसकी विचारधारा और दर्शन इस बात का समर्थन करते थे कि मनुष्य एक चिंतनशील प्राणी के रूप में, अपने प्राकृतिक पर्यावरण द्वारा उपस्थित की जाने वाली दशाओं में चुनने की स्वतंत्रता रखता हैGerald Rudolph Pitzl Jerry Pitzl Encyclopedia of Human Geography https://books.google.com/books?id=m_z1M20Tr3EC&pg=PA189 2004 Greenwood Publishing Group 978-0-313-32010-1 189– और इस प्रकार किसी क्षेत्र अथवा प्रदेश में अपने चयन के अनुसार चीजों को संभव बनाता है। यह भूगोल में नियतिवादी विचारधारा के विरुद्ध खड़ा होने वाला संप्रदाय था क्योंकि नियतिवादियों का मानना यह था कि प्रकृति द्वारा प्रस्तुत दशाएँ ही किसी क्षेत्र के मानव जीवन और संस्कृति को पूरी तरह नियंत्रित करती हैं।
इस भावना को सर्वप्रथम फ्रांसीसी भूगोलवेत्ताओं द्वारा पुरःस्थापित किया गया और विडाल डी ला ब्लाश के लेखन से इसका आरंभ हुआ।Derek Gregory Ron Johnston Geraldine Pratt, Michael Watts, Sarah Whatmore The Dictionary of Human Geography https://books.google.com/books?id=5gCHckKszz0C&pg=RA1-PT822 23 सितम्बर 2011 John Wiley & Sons 978-1-4443-5995-4 1– फ्रांसीसी विद्वान फेव्रे ने इसे "संभववाद" का नाम दिया। इस विचारधारा के विद्वानों का मत है कि मानव प्रकृति के तत्व को चुनने के लिए स्वतंत्र होता है। सर्वत्र संभावनाएं हैं और मनुष्य इन संभावनाओं का स्वामी है। फेव्रे का विचार है, "कहीं अनिवार्यता नहीं है, सब जगह संभावनाएं हैं। मानव उसके स्वामी के रूप में उनका निर्णायक है। संभावनाओं के उपयोग से स्थिति में जो परिवर्तन होता है, उससे मानव को, मात्र मानव को ही प्रथम स्थान प्राप्त होता है। पृथ्वी, जलवायु या विभिन्न स्थानों की नियतीवादी परिस्थितियों को वह स्थान कदापि नहीं मिला सकता। ब्लाश का मानना है कि मानव को अपने वातावरण में रहकर कार्य करना पड़ता है, इसका अर्थ यह नहीं है कि वह वातावरण का दास है। मानव एक क्रियाशील प्राणी है जिसमें वातावरण में परिवर्तन लाने की असीम क्षमता है अर्थात वह अकर्मण्य तभी होता है जब भौतिक विश्व उसे निष्प्राणित कर देता है।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
भौगोलिक संभाव्वाद के प्रमुख विचारक, ज्याग्रफी एंड यू, en
श्रेणी:मानव भूगोल
श्रेणी:सांस्कृतिक भूगोल
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