411 REFERENCE · Wikipedia
ग्वालियर घराना
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
हस्सू, हद्दू खाँ के दादा नत्थन पीरबख्श को इस घराने का जन्मदाता कहा जाता है। दिल्लीके राजा ने इनको अपने पास बुला लिया था। इनके दो पुत्र थे--ः?कादिर बख्श"' और ः?पीर बख्श"' इनमें कादिर बख्श को ग्वालियर के महाराज दौलत राव जी ने अपने राज्य में नौकर रख लिया था। कादिर बख्श के तीन पुत्र थे जिनके नाम इस प्रकार हैं--हद्दू खाँ, हस्सू खाँ और नत्थू खाँ। ये तीनों भाई मशहूर ख्याल गाने वाले और ग्वालियर राज्य के दरबारी उस्ताद थे। इसी परम्परा के शिष्य बालकृष्ण बुआ इचलकरजीकर थे। इनके शिष्य पं॰ विष्णु दिगम्बर पलुस्कर थे। पलुस्कर जी के प्रसिद्ध शिष्य ओंकारनाथ ठाकुर, विनायक राव पटवर्धन, नारायण राव व्यास तथा वी.ऐ. क्शालकर हुए जिन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत का खूब प्रचार किया। नत्थू खाँ ग्वालियर महाराज जियाजी राव शिंदे के गुरु थे। इनके
दत्तक पुत्र निसार हुसेन खाँ थे। इन्होंने नत्थू खाँ से ही शिक्षा प्राप्त की थी। नत्थू खाँ के बाद ग्वालियर महाराज ने ः?निसार हुसेन"' को अपने दरबार में रखा। इनकी शिष्य-परम्परा इस प्रकार है--शंकर राव पंडित, भाऊ राव जोशी, राम कृष्ण बझे इत्यादि। शंकर राव पंडित के पुत्र कृष्ण राव शंकर पंडित तथा शिष्य राजा भैया पूंछवाले, रामपुर के प्रसिद्ध मुस्ताक हुसेन भी इसी घरानेके गायक थे। ग्वालियर घराने की शैली की
विशेषतायें
1) खुली आवाज़ का गायन, (
2) ध्रुपद अंग का गायन, (
3) अलापों का निराला ढंग,
4) सीधी सपाट तानों का प्रयोग,
5) गमक का प्रयोग,
(6) बोल तानों का विशेष प्रयोग।
सन्दर्भ
संगीत श्री- एन.सी.इ.आर.टी.
श्रेणी:संगीत
श्रेणी:ग्वालियर
श्रेणी:ग्वालियर घराना
ग्वालियर घराना
ग्वालियर घराने के जन्मदाता हद्दूखाँ व हस्सू खाँ के दादा नत्थन पीर बख्श माने जाते हैं। इनकी
परं
परा में हद्दूखाँ व हस्सू खाँ के अतिरिक्त मेंहदी हु
सैन खाँ, रहमत खाँ मोहम्मद खाँ एवं निसार
हु
सैन खाँ के नाम प्रमखु हैं। ग्वालियर घराने की गायकी के प्रचार का विशेष श्रेय जिन कलाकारों
को जाता है उनमें बालकृष्ण बआइ ु चल करं
जीकर, वासदुवे जोशी व बाबा दीक्षित मख्यु हैं।
बालकृष्ण बआइ ु चल करं
जीकर के शिष्य पडंित विष्णु दिगम्बर पलस्
ुकर ने ग्वालियर घराने
की गायकी को विशेष रूप से प्रचलित किया। जिसके फलस्वरूप उनके पं
डित ओकार ना ं थ
ठाकुर, पं
. विनायक राव पटवर्धन तथा पं
. नारायण राव व्यास, निसार हु
सैन खाँ की परं
परा में शकर ं
पडंित, राजा भैया पछू वाले आदि इस घराने के अग्रण्ाी गायक बने।
ग्वालियर घराने की रचनाएँ ख्याल अधिकतर विलं
बित लय में तिलवाड़ा तथा एकताल में
और मध्य लय की रचनाएँ तीनताल में हुआ करती हैं। इस घराने में अन्य तालों का भी व्यवहार
होता है परं
त पहले
ु बताई हुई तालें ही प्रमखु रहती हैं। साधारणत: विलं
बित ख्याल में शब्दों के
बीच में आकार का अधिक प्रयोग होता है। छोटी-छोटी मर्कि
ु यों और तानों का भी प्रयोग किया
जाता है। ग्वालियर घराने की गायकी की विशेषताएँ—
1. ज़ोरदार तथा खली आु वाज़ का गायन
4. सीधी व सपाट तानें
5. बोल तानों में लयकारी
6. गमकों का प्रयोग
1. इस घराने के किसी गायक/गायिका से सं
पर्क कीजिए। एक परियोजना बनाइए उनके /द्वारा गाए
जाने वाले विभिन्न रागों में 5 बं
दिशों का विश्लेषण कीजिए।
आगरा घराना
आगरा घराने के प्रवर्तक हाजी सजान
ु खाँ माने जाते हैं। आगे चलकर घग्घेखदुाबख्श द्वारा इस
घराने का प्रचार हुआ। घग्घेखदुाबख्श ने ग्वालियर के नत्थन पीर बख्श से ख्याल की शिक्षा पाई
थी। इसी कारण आगरा घराने की बहु
त-सी गायन विशेषताएँ ग्वालियर घराने से साम्यता रखती
हैं। आगरा घराने में उस्ताद फै याज़ खाँ का नाम विशेष उल्लेखनीय है। इन्होंने इस घराने को बहु
त
प्रसिद्धि दिलायी। विलायत हु
सैन खाँ, नत्थन खाँ, गलाम अ ु ब्बास खाँ, भास्कर राव, श्रीकृष्ण
नारायण रातं
जनकर, दिलीप चन्द्र बेदी तथा विलायत हु
सैन खाँ के पत्रु यनूस ह ु ु
सैन खाँ आदि इस
घराने के प्रमखु गायक हु
ए। आगरा घराने की गायकी की विशेषताएँ—
1. नोमतोम का आलाप
2. बं
दिश का लयकारी यक्ुत गायन
3. खली त ु था ज़ोरदार आवाज़
4. ख्याल गायकी के अतिरिक्त ध्परुद-धमार में प्रवीणता
5. बोल तानों में कुशलता
M Singh