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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

राजा विष्णुसिंह

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मिर्ज़ा राजा बिशन सिंह / विष्णु सिंह आमेर-जयपुर राजघराने के कच्छवाहा शासक और १७वीं सदी के सिद्ध-तांत्रिक श्रीशिवानन्द गोस्वामी के शिष्य और जयसिंह द्वितीय / सवाई जयसिंह ,कुंवर विजय सिंह और कुंवरी अमर कँवर (बूंदी के महाराव बुध सिंहजी की पटरानी) के पिता थे। जन्म मिर्ज़ा राजा रामसिंह (प्रथम) के एक मात्र पुत्र युवराज किशन सिंह की उनके जीवन काल में मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र और राम सिंह के पौत्र युवराज बिशन सिंह जिनका जन्म वर्ष 1672 में हुआ था को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया गया तथा मिर्ज़ा राजा राम सिंह की मृत्युपरांत इन्हें आमेर को राजा बनाया गया। http://msmsmuseum.com/pages.php?id=4 संग्रहीत प्रति 28 जून 2014 https://web.archive.org/web/20140716190556/http://msmsmuseum.com/pages.php?id=4 16 जुलाई 2014 dead जीवन यदुनाथ सरकार की 'जयपुर का इतिहास' पुस्तक के अनुसार 30 अप्रैल 1688 को इन्हें आमेर के राजा के रूप में औरंगजेब से मान्यता मिली। A History of Jaipur : Jadunath Sarkar: BlackSwan:2010 महाराजा विष्णुसिंह के बारे में जयपुर इतिहास के अनन्य विद्वान और चन्द्रमहल [सिटी पैलेस], जयपुर के 'पोथीखाने' के पुस्तकालय-प्रभारी स्व. गोपाल नारायण बहुरा ने लिखा है- "'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : 'जयपुर अढाईशती समारोह समिति' प्रधान-सम्पादक : डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य वर्ष 1978 " वास्तव में भारमल से विष्णुसिंह तक आमेर के राजा अपने राज्य-विस्तार की ओर अधिक ध्यान दे कर मुग़ल साम्राज्य की सीमाएं बढ़ने और उसकी सुरक्षा में लगे रहते थे।" इस दृष्टि से आमेर के शासक विष्णुसिंह को मुगल साम्राज्य के उन कृपापात्र सूर्यवंशी राजपूत राजाओं में गिना जा सकता है जिन्होंने साम्राज्य-विस्तार के लिए कई सामरिक और कूटनीतिक अभियानों में भाग लिया या उनका नेतृत्व किया। हालांकि जेम्स टॉड जैसे इतिहासकार,'राजस्थान का इतिहास' :ले. कर्नल जेम्स टॉडखंड २ : साहित्यागार: जयपुर मानते हैं कि " [[मिर्ज़ा राजा जयसिंह]] के बाद आमेर राज्य का फिर से पतन आरम्भ हुआ। इन दिनों में वहां का शासन मुग़ल बादशाह की उँगलियों पर चल रहा था।...दिल्ली दरबार में इस राज्य को जो सम्मान प्राप्त हुआ था, वह भी अब पहले जैसा न रह गया था। इसलिए महाराजा बिशन सिंह को तीन हजारी मनसब का पद मिला. देहावसान सन १७०० में (महाराजा बिशन सिंह) बहादुर शाह के साथ काबुल के युद्ध में गया था, जहाँ उसकी मृत्यु हो गयी। राजा विष्णुसिंह की मृत्यु होने पर मार्गशीर्ष सुदी ७ वि॰सं॰ १७५६, जनवरी १७०० ई॰ को सवाई जयसिंह आमेर की गद्दी पर बैठे। स्मारक जयपुर से आमेर रोड पर दीवार से घिरे एक मैदान में 6 बड़ी, 8 मध्यम आकार की और 11 छोटे आकार की छतरियां हैं। ये छतरियां आमेर के राजाओं, उनके परिवार के सदस्यों और वंशजों की समाधियां हैं। इनमें छह बड़ी छतरियां राजा भारमल, राजा भगवंत दास, राजा मान सिंह, राजा जय सिंह, राजा राम सिंह और राजा विष्णु सिंह की हैं। http://www.pinkcity.com/hi/places-to-visit/cenotaphs-of-kachwaha-rulers/ संग्रहीत प्रति 8 अगस्त 2014 https://web.archive.org/web/20140810055734/http://www.pinkcity.com/hi/places-to-visit/cenotaphs-of-kachwaha-rulers/ 10 अगस्त 2014 dead सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ https://web.archive.org/web/20150325193428/https://en.wikipedia.org/wiki/Bishan_Singh https://web.archive.org/web/20140405003448/http://en.wikipedia.org/wiki/Jai_Singh_II https://web.archive.org/web/20140716190556/http://msmsmuseum.com/pages.php?id=4 https://web.archive.org/web/20140218121156/http://www.jaipur.org.uk/history.html https://web.archive.org/web/20140809060959/http://media.vam.ac.uk/media/thira/collection_images/2013GL/2013GL4205_jpg_ds.jpg