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भूचर मोरी की लड़ाई
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भूचर मोरी की लड़ाई यदुवंशप्रकाश में प्रकाशित मावदनजी रतनु द्वारा रचित चित्र, १९३४ जुलाई 1591 भूचर मोरी, ध्रोल रियासत, गुजरात 22.582 70.400 type:event_region:IN inline,title India Gujarat#India गुजरात में युद्ध भूमि की अवस्थिति भूचर मोरी काठियावाड़, मुग़ल अधिपत्यता के अधीन आयागुजरात सल्तनत की समाप्ति निर्णायक मुग़ल जीत मुग़ल साम्राज्य मुग़ल साम्राज्य नवनागर राज्यजूनागढ़ रियासतकुण्डला रियासतकच्छ रियासत नवानगर रियासतकच्छ रियासतओखामुली राज्य मिर्ज़ा अज़ीज़ कोका जाम सताजी
जाम अजाजी
जसा वज़ीर
दौलत खान घोड़ी
संघिया लूणपाल चारण"
लोम कुमान
राव भारमलजी प्र०
चारण गोपालदास बारहठ
संगंजी वढेर
वसाजी परमार
मुज़फ़्फ़र शाह तृतीय 8900-9000 17000-21000
84 गज 100-200 योद्धा
500 injured 2000 योद्धा
700 अश्व असमर्थ The numbers are derived from agreement of various sources. ध्रोल की लड़ाई
thumb|right|250px|नवानगर रियासत के राजकीय कवी, मावदनजी भीमजी रतनु द्वारा रचित, यदुवंशप्रकाश में अंकित भूचर मोरी की लड़ाई का चित्र
भूचर मोरी की लड़ाई, जिसे ध्रोल युद्ध भी कहा जाता है, जुलाई १५९१(विक्रम संवत १६४८) में, मुगल साम्राज्य की सेना, और नवानगर रियासत के नेतृत्व में, काठियावाड़ी राज्यों की संयुक्त सेना के बीच लगा गया एक युद्ध था। यह लड़ाई ध्रोल राज्य में भूचर मोरी नामक स्थान पर लड़ी गई थी। इसमें नवानगर और काठियावाड़ी सेना की हार हुई थी और मुग़ल सेना की निर्णायक जीत हुई थी, जसके कारणवश, काठियावाड़, मुग़ल साम्राज्य के अधीन आ गया था।આશરા ધર્મને ઉજાગર કરતી સૌરાષ્ટ્રની સૌથી મોટી ભૂચર મોરીની લડાઇ - લોકજીવનનાં મોતી ગુજરાત સમાચાર ૨૯ એપ્રિલ ૨૦૧૨ http://www.gujaratsamachar.com/gujaratsamachar.com/20120429/purti/ravipurti/lokjivan.html gu ૧૦ મે ૨૦૧૬ https://web.archive.org/web/20160510180850/http://www.gujaratsamachar.com/gujaratsamachar.com/20120429/purti/ravipurti/lokjivan.html ૧૦ મે ૨૦૧૬ Jadav JoravarsinhGeorg Pfeffer Deepak Kumar Behera Contemporary Society: Concept of tribal society http://books.google.com/books?id=R--XMUsk7sIC&pg=PA198 ૧૯૮૭ Concept Publishing Company 978-81-7022-983-4 ૧૯૮
इतिहास
इस युद्ध का मूल उद्देश्य गुजरात के आखरी सुल्तान मुजफ्फर शाह (तृतीय) को बचाने का था, जो मुगल बादशाह अकबर की क़ैद से फ़रार होकर नवानगर के जाम सताजी जडेजा की शरण में थे। जब अहमदाबाद के मुग़ल सेनापति ने मुज़फ़्फ़र शाह को लौटाने को कहा तब सताजी ने क्षत्रिय धर्म का हवाला देते हुए शरणागत को लौटाने से इनकार कर दिया। जुलाई 1591 (विक्रम संवत 1648) में मुग़ल और काठियावाड़ी रियासतों(जिनमें, नवानगर, ध्रोल, मोरवी, जूनागढ़, कुण्डला, आदि शामिल थे) की संयुक्त सेनाएँ, ध्रोल राज्य में भूचर मोरी नामक स्थान पर मिली। काठियावाड़ की सेना में जूनागढ़ और कुण्डला राज्य की सेनाएँ भी शामिल थीं, जिन्होंने आखिरी समय में नवानगर का साथ छोड़ दिया था । इस युद्ध के परिणामस्वरूप, दोनों पक्षों ने बड़ी संख्या में घटनाओं का सामना किया और अंत में मुगल सेना की जीत हुई।(कई जगह पर देखा गया है की लोमा खुमान ने धोखा किया पर यह सच नहीं यधवंश प्रकाशन के सिवा किसी २ संदर्भ में भी यह नहीं बताया गया है)
भूचर मोरी की जीत, मुग़लों के लिए गुजरात के मैदान में निर्णायक जीत थी, जिसके कारण मुग़ल सल्तनत को गुजरात सल्तनत के तरफ़ से आ रही चुनौतियाँ सदा के लिए समाप्त हो गई।
इन्हें भी देखें
नवानगर
काठियावाड़
गुजरात सल्तनत
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
श्रेणी:मुग़ल साम्राज्य के युद्ध
श्रेणी:नवानगर रियासत