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नियो-तिफिनाग़
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वर्णमाला नियो-तिफिनाग़ Tifinagh Rendered.svg १९७०-वर्त्तमान मानक मोररोकी तमज़िग्त, ताश्लहियत, दूसरी उत्तरी बर्बर भाषाएँ
नियो-तिफिनाग़ (ⵜⵉⴼⵉⵏⴰⵖ) पेरिस स्थित बर्बर अकादमी द्वारा विकसित आधुनिक, पूरी तरह से वर्णमाला-आधारित लिपि है। इसका उपयोग मानक मोररोकी तमज़िग्त, व अन्य उत्तरी बर्बर भाषाओं तक ही सिमित है।
इतिहास
शुरुआत में, अकादमी को बर्बर भाषा को लिखने के लिए एक लिपि चुननी थी। तिफिनाग़ और लैटिन लिपियों में से किसी एक को चुनने को लेकर अकादमी के अंदर और बाहर अत्यन्त बहस छिड़ गई।
अकादमी के संस्थापक सदस्य और तिफिनाग़ के अधिक समर्थक, मोहंद अराव बेसाउड ने बताया कि उन्हें मौलौद मामेरी और रामदान अचाब जैसी जानी-मानी हस्तियों के विरोध का सामना करना पड़ा था। इन लोगों का तर्क था कि तिफिनाग़ पुरानी, अप्रचलित, नॉन-कर्सिव (जिसमें अक्षर आपस में जुड़े नहीं होते) और अव्यावहारिक लिपि है। आलोचनाओं के बावजूद, बेसाउड तिफिनाग़ को बढ़ावा देने में डटे रहे।
"अकाब रमदान ने मेरे कामों का विरोध करते हुए इसे बुझी हुई राख को फिर से सुलगाने जैसा बताया।" मोहंद अराव बेसाउडअरव बेसाउड, मोहंद। एक महान मकसद के लिए आम लोग। पृष्ठ ८९-९१।
१९७० में, लेखन प्रणाली निर्धारित करने हेतु एक बैठक आयोजित की गई थी। महदजूबी अहार्दाने के प्रभाव में आकर, बेसाउड ने तिफिनाग़ को अपनाया। अहार्दाने का कहना था कि तिफिनाग़ केवल एक लिपि नहीं है, अपितु बर्बर इतिहास और अस्मिता का प्रतीक है। इसके पश्चात लिपि के मानकीकरण की दिशा में अन्य कदम उठाए गए।
अंगूठाकार|मोररोकी छात्रा की पुस्तिका।
जब मोहंद बेसाउद अरव को जेल हुई, तो बर्बर अकादमी की आधिकारिक गतिविधियाँ बंद हो गईं।
१९८० तक, नेगादी ने अपनी अलग संस्था UPA (अमाज़िग़ पीपल्स यूनियन) की स्थापना की, जिसने लैटिन और तिफिनाग़ दोनों लिपियों में 'अज़ाघेन/लिंक' (Azaghen/Link) नाम का एक बुलेटिन प्रकाशित किया। उनका मानना था कि बर्बर भाषा और संस्कृति को व्यक्त करने के लिए तिफिनाग़ सबसे अच्छा माध्यम है; वे इसे सांस्कृतिक विरासत और पहचान का हिस्सा मानते थे जिसकी रक्षा की जानी चाहिए।https://www.lematindz.net/13013-ammar-negadi-ce-symbole-amazigh-de-laures-authentique/ Ammar Negadi, ce symbole amazigh de l’Aurès authentique Rédaction 2013-12-02 Le Matin d'Algérie fr-FR 2026-09-11
नियो-तिफिनाग़ में तब से और सुधार हुए हैं और उत्तरी अफ़्रीका में इसका विभिन्न संदर्भों में उपयोग होता है। अमज़िग़ संस्कृति का शाही संस्थान ने मोरक्को की आधिकारिक भाषा मानक मोरक्की अमज़िग़ की आधिकारिक लिपि के रूप में नियो-तिफिनाग़ को मानकीकृत किया है।https://search.worldcat.org/title/892969053 African Literacies: Ideologies WorldCat.org search.worldcat.org en 2026-09-11Soulaimani Dris 2016-01-02 Writing and rewriting Amazigh/Berber identity: Orthographies and language ideologies https://doi.org/10.1080/17586801.2015.1023176 Writing Systems Research Routledge 8 1 1–16 10.1080/17586801.2015.1023176 1758-6801
सन्दर्भ