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अनसूया साराभाई
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अनसूया साराभाई जैन (११ नवंबर १८८५ - १ नवंबर १९७२) भारत में स्त्री श्रम आन्दोलन की अग्रदूत थीं। उन्होने १९२० http://www.atmaahd.com/roles2.htm Role and Activities Ahmedabad Textile Mills' Association 20 June 2014 https://web.archive.org/web/20131216003529/http://www.atmaahd.com/roles2.htm 16 दिसंबर 2013 dead में अहमदाबाद में मजदूर महाजन संघ की स्थापना की जो भारत के टेक्सटाइल श्रमिकों के सबसे पुराना संघ है। गूगल डूगल में आज अनसूया साराभाई, जानें कौन थीं https://navbharattimes.indiatimes.com/education/gk-/know-who-was-anasuya-sarabhai/articleshow/61602265.cms 11 नवम्बर 2017 navbharattimes.indiatimes.com https://web.archive.org/web/20171111151830/https://navbharattimes.indiatimes.com/education/gk-/know-who-was-anasuya-sarabhai/articleshow/61602265.cms 11 नवंबर 2017 live
प्रारंभिक जीवन
अनसूया साराभाई का जन्म ११ नवम्बर १८८५ को अहमदाबाद में साराभाई परिवार में हुआ था, जो कि एक उद्योगपति और व्यापारिक लोगों के एक धनी परिवार में से था। जब वे नौ साल की उम्र की थीं, तभी उनके माता-पिता दोनों की मृत्यु हो गईं थीं। इसलिए उनको और उनके छोटे भाई अंबलाल साराभाई और एक छोटी बहन को चाचा के साथ रहने के लिए भेजा गया।http://www.tribuneindia.com/2013/20130804/spectrum/main8.htm A recent exhibition on Anasuya Sarabhai, popularly known as Motaben, paid a tribute to the courageous woman, who worked selflessly for the uplift of the less fortunate The Tribune 20 June 2014 B.N. Goswamy 4 August 2013 https://web.archive.org/web/20131212171344/http://www.tribuneindia.com/2013/20130804/spectrum/main8.htm 12 दिसंबर 2013 live उनकी शादी १३ साल की उम्र में ही हो गई थी। उनका वैवाहिक जीवन अल्पकालिक और दुःखद था।
शिक्षा
अपने भाई की सहायता से वे १९१२ई. में एक मेडिकल डिग्री लेने के लिए इंग्लैंड गईं। लेकिन जब उन्हें एहसास हुआ कि एक मेडिकल डिग्री प्राप्त करने के क्रम में उन्हें पशु विच्छेदन जैसे क्रिया-कलापों से गुजरना पड़ेगा जो उनके जैन विश्वासों के भी विपरीत थे, तो उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में प्रवेश ले लिया। इंग्लैंड प्रवास के दौरान वे फेबियन सोसाइटी से प्रभावित हुईं और सहृगेट आंदोलन में शामिल हो गईं थीं।
राजनीतिक जीवन
वे १९१३ ई. में भारत लौटीं और महिलाओं और गरीबों की भलाई के लिए काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने एक स्कूल भी खोला। उन्होंने ३६ घंटे की पारी के बाद घर लौटने वाले महिला मिल कामगारों की दयनीय स्थिति देखने के बाद श्रम आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया। उन्होंने अहमदाबाद में १९१४ ई. की हड़ताल में कपड़ा कामगारों को संगठित करने में मदद की। वे १९१८ ई. में एक महीने की लंबी हड़ताल में भी शामिल थीं, जहां बुनकर मजदूरी में ५० प्रतिशत की बढ़ोतरी मांग रहे थे और २० प्रतिशत की पेशकश की जा रही थी। परिवार के एक दोस्त के रूप में गांधीजी, तब तक साराभाई के गुरु के रूप में अभिनय कर रहे थे। गांधी जी ने श्रमिकों की ओर से भूख हड़ताल शुरू की और श्रमिकों ने अंततः 35 प्रतिशत वृद्धि हासिल की। इसके बाद, १९२०ई. में अहमदाबाद टेक्सटाइल श्रम संघ (मगर महाजन संघ) का गठन किया गया।
विरासत
साराभाई को मोटाबेन ("बड़ी बहन" के लिए गुजराती शब्द ) कहकर भी पुकारा जाता था। वे भारतीय स्वयं-रोजगार महिला संगठन के संस्थापक एला भट्ट के परामर्शदाता की भूमिका में भी रहीं। ११ नवंबर २०१७ ई. को गूगल ने भारतीयों के लिए दृश्यमान गूगल-डूडल प्रस्तुत कर साराभाई का १३२ वां जन्मदिन मनाया।
निधन
साराभाई का निधन १ नवंबर १९७२ ई.http://www.dnaindia.com/ahmedabad/report-sewa-founder-ela-bhatt-pays-tribute-to-anasuya-sarabhai-1866391 Sewa founder Ela Bhatt pays tribute to Anasuya Sarabhai Daily News and Analysis 28 July 2013 20 June 2014 Gargi Gupta https://web.archive.org/web/20131213043322/http://www.dnaindia.com/ahmedabad/report-sewa-founder-ela-bhatt-pays-tribute-to-anasuya-sarabhai-1866391 13 दिसंबर 2013 live को हुआ।
सन्दर्भ
श्रेणी:श्रमिक संघ
श्रेणी:१९७२ में निधन
श्रेणी:1885 में जन्मे लोग
श्रेणी:गुजराती लोग