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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अल-बुरूज

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जून 2015 सूरा अल-बुरूज (इंग्लिश: Al-Burooj) इस्लाम के पवित्र ग्रन्थ कुरआन का 85 वां सूरा (अध्याय) है। इसमें 22 आयतें हैं। नाम इस सूरा के अरबी भाषा के नाम को क़ुरआन के प्रमुख हिंदी अनुवाद में सूरा अल-बुरूज सूरा अल-बुरूज,(अनुवादक: मौलाना फारूक़ खाँ) भाष्य: मौलाना मौदूदी अनुदित क़ुरआन - संक्षिप्त टीका सहित 961 से https://archive.org/details/TranslationOfTheMeaningsOfTheNobleQuranInTheHindipdfऔर प्रसिद्ध किंग फ़हद प्रेस के अनुवाद में सूरा अल्-बुरूज सूरा अल्-बुरूज का अनुवाद (किंग फ़हद प्रेस) https://quranenc.com/en/browse/hindi_omari/85 https://quranenc.com 16 जुलाई 2020 https://web.archive.org/web/20200622083734/https://quranenc.com/en/browse/hindi_omari/85 22 जून 2020 dead नाम दिया गया है। अल-बुरूज नाम पहली ही आयत के शब्द “अल-बुरूज” (मज़बूत किलों ) को इसका नाम दिया गया है। अवतरणकाल सूरा मक्की सूरा अर्थात् पैग़म्बर मुहम्मद के मदीना के निवास के समय हिजरत से पहले अवतरित हुई। इसकी वार्ता स्वयं यह बता रही है कि यह सूरा मक्का मुअज़्ज़मा के उस कालखण्ड में अवतरीत हुई है जब अत्याचार और अनाचार प्रचण्ड रूप धारण कर चुका था और मक्का के काफ़िर (इन्कार करने वाले) मुसलमानों को कड़ी से कड़ी यातना देकर ईमान से फेर देने की कोशिश कर रहे थे। विषय और वार्ता इस्लाम के विद्वान मौलाना सैयद अबुल आला मौदूदी लिखते हैं कि इसका विषय काफ़िरों को अत्याचार और अनाचार के बुरे परिणाम से सावधान करना है , जो वे ईमानवालों के साथ कर रहे थे और ईमानवालों को यह सान्त्वना देना है कि यदि वे इन अत्याचारों के मुक़ाबले में जमे रहेंगे तो उनको इसका उत्तम प्रतिदान प्राप्त होगा और सर्वोच्च अल्लाह अत्याचारियों से बदला लेगा। इस सिलसिले में सबसे पहले असहाबुल - उख़दूद (गड़हेवालों) का किस्सा सुनाया गया है , जिन्होंने ईमान लानेवालों को आग से भरे गढ़ों में फेंक फेंककर जला दिया था। इस किस्से के रूप में कुछ बातें ईमानवालों और काफ़िरों के मन में बिठाई गईहै। एक, यह कि जिस तरह असहाबुल-उख़दूद (गढ़ेवाले) ईश्वर की फटकार और उसकी मार के भागी हुए, उसी तरह मक्का के सरदार भी उसके भागी बन रहे हैं। दूसरे, यह कि जिस तरह ईमान लाने वालों ने उस समय आग के गढ़ों में गिरकर प्राण दे देना स्वीकार कर लिया था और ईमान से फिरना स्वीकार नहीं किया था, उसी तर अब भी ईमान वालों को चाहिए कि प्रत्येक कठिन से कठिन यातना भुगत लें , किन्तु ईमान की राह से न हटें। तीसरे , यह कि जिस ईश्वर को मानने पर काफ़िर क्रुद्ध होते और ईमानवाले आग्रह करते हैं , वह ईश्वर सबपर प्रभावी है, अपने आप में स्वयं प्रशंसा का अधिकारी है और वह दोनों गिरोहों की दशा को देख रहा है। इसलिए यह बात निश्चित है कि (इसमें से हरेक अपने किए का बदला पाकर रहे।) फिर काफ़िरों को सावधान किया गया है कि ईश्वर की पकड़ बड़ी कड़ी है। अगर तुम अपने जत्थे की शक्ति के दम्भ में पड़े हो, तो तुमसे बड़े जत्थे फ़िरऔन और समूद के पास थे; उनकी सेनाओं का जो परिणाम हुआ है उससे शिक्षा ग्रहण करो। ईश्वरीय शक्ति तुम्हें इस तरह अपने घेरे में लिए हुए है कि उससे तुम निकल नहीं सकते और कुरआन, जिसके झुठलाने पर तुम तुले हुए हो, उसकी हर बात अटल है ; यह उस सुरक्षित पट्टिका (लौहे-महफूज ) में अंकित है , जिसका लिखा किसी के बदलने से नहीं बदल सकता। सुरह "अल-बुरूज'' का अनुवाद बिस्मिल्ला हिर्रह्मा निर्रहीम अल्लाह के नाम से जो दयालु और कृपाशील है। बिस्मिल्लाह क़ुरआन का हिन्दी अनुवाद इस सूरा का प्रमुख अनुवाद: क़ुरआन की मूल भाषा अरबी से उर्दू अनुवाद "मौलाना मुहम्मद फ़ारूक़ खान", उर्दू से हिंदी Al-Burooj सूरा का अनुवाद http://tanzil.net/#trans/hi.farooq/85:1 http://tanzil.net 15 जुलाई 2020 https://web.archive.org/web/20180425183153/http://tanzil.net/#trans/hi.farooq/85:1 25 अप्रैल 2018 dead "मुहम्मद अहमद" ने किया। बाहरी कडियाँ इस सूरह का प्रसिद्ध अनुवादकों द्वारा किया अनुवाद क़ुरआन प्रोजेक्ट पर देखें Al-Burooj 85:1 क़ुरआन के अनुवाद 92 भाषाओं में https://web.archive.org/web/20200730204334/https://www.australianislamiclibrary.org/quran-translations.html 30 जुलाई 2020 Quran Text/ Translation - (92 Languages) https://www.australianislamiclibrary.org/quran-translations.html www.australianislamiclibrary.org 15 March 2016 https://web.archive.org/web/20200730204334/https://www.australianislamiclibrary.org/quran-translations.html 30 जुलाई 2020 dead 85 - अल-बुरूज अल-इनशिक़ाक़ अत-तारिक़ सन्दर्भ इन्हें भी देखें क़ुरआन मुहम्मद क़ुरआन का हिन्दी अनुवाद सूरा आयत (क़ुरआन) इस्लामी शब्दावली अल-बुरूज