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411 समाचार
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दोस्ती (1964 फ़िल्म)

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दोस चित्र:दोस्ती (1964 फ़िल्म).jpg दोस्ती का पोस्टर ताराचंद बड़जात्या सत्येन बोस लक्ष्मीकांत प्यारेलाल (संगीतकार)मजरुह सुल्तानपुरी (गीतकार) बाण भट्ट (कहानी)गोविन्द मूनिस (पटकथा एवं संवाद) संजय ख़ान, लीला मिश्रा, नाना पालसिकर, लीला चिटनिस, अभि भट्टाचार्य, मूलचन्द मार्शल ब्रगेन्ज़ा जी.जी. मयेकर राजश्री पिक्चर्स 1964 १६३ मिनट भारत हिन्दी दोस्ती १९६४ में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है जिसके निर्देशक सत्येन बोस और निर्माता अपने राजश्री प्रोडक्शन्स के तले ताराचंद बड़जात्या हैं। जैसा फ़िल्म का नाम है, यह फ़िल्म एक अपाहिज लड़के और एक अन्धे लड़के के बीच दोस्ती को दर्शाती है। इस फ़िल्म को १९६४ के फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों में छ: पुरस्कारों से नवाज़ा गया जिसमें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार भी शामिल है। यह फ़िल्म उस वर्ष की १० सबसे ज़्यादा चलने वाली फ़िल्मों में एक थी और बॉक्स ऑफ़िस में "सुपर हिट" मानी गयी। * यह फ़िल्म संजय ख़ान की पहली फ़िल्म है। संक्षेप रामनाथ गुप्ता उर्फ़ रामू (सुशील कुमार) के पिता एक फ़ैक्टरी हादसे में चल बसते हैं। जब फ़ैक्टरी उनकी मौत का हर्ज़ाना देने से इन्कार कर देती है तो उसकी माँ (लीला चिटनिस) यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाती है और वह भी दम तोड़ देती है। सड़क दुर्घटना में रामू अपनी एक टांग गंवा बैठता है। बेघर, बिन पैसे के और अपाहिज रामू जब मुंबई की सड़कों की ख़ाक छान रहा होता है तो उसकी मुलाकात मोहन (सुधीर कुमार) नाम के एक अन्धे लड़के से होती है जिसकी कहानी भी रामू के जैसी ही है। मोहन गांव का रहने वाला है और बचपन में ही अपनी आँखें खो बैठा है। मोहन की बहन मीना गांव से शहर नर्स बनने के लिए आई थी ताकि मोहन की आँखों का इलाज करा सके। अब मोहन अपनी बहन को ढूंढता हुआ शहर आया है। रामू और मोहन गलियों में गाकर अपना पेट भरने लगते हैं और सड़क के किनारे ही सो जाते हैं। एक दिन उनकी मुलाकात मंजुला उर्फ़ मंजु नामक एक छोटी लड़की से होती है जो एक अमीर परिवार की होती है और जो बहुत बीमार है। वह रामू और मोहन को पैसे देना चाहती है लेकिन दोनों यह कह कर मना कर देते हैं कि छोटी बहन से पैसे नहीं लिए जाते हैं। मंजु की देखभाल के लिए नर्स की ज़रूरत होती है और डॉक्टर मीना को उसके घर ले आते हैं। रामू को आगे पढ़ाई करने की चाह होती है लेकिन स्कूल में दाख़िले के लिए साठ रुपयों की ज़रुरत होती है। दोनों यह पैसा मंजुला से मांगने जाते हैं लेकिन मंजुला का भाई अशोक (संजय ख़ान) उन्हें पांच रुपये देकर कहता है कि आइंदा वहाँ न आयें। अपना इस तरह अपमान होना मोहन को गंवारा नहीं होता है और वह गाकर बाकी की रक़म जमा कर लेता है। अब वे सड़क के किनारे न सोकर एक झोपड़पट्टी में खोली ले लेते हैं जहाँ उनकी पड़ोसन मौसी (लीला मिश्रा) उन्हें अपने बच्चों जैसा ही प्यार देती है। रामू जब स्कूल में दाख़िले के लिए जाता है तो स्कूल के हेडमास्टर (अभि भट्टाचार्य) उससे कहते हैं कि उसका कोई तो होना चाहिए जो उसकी ज़िम्मेदारी ले सके वर्ना स्कूल के क़ानून के मुताबिक उसका दाख़िला नहीं हो सकता है। तभी स्कूल के एक शिक्षक शर्मा जी (नाना पालसिकर) आगे आते हैं और रामू को अपनी छत्रछाया में ले लेते हैं। वह रामू से कहते हैं कि रामू झोपड़पट्टी को छोड़ उन्हीं के घर आकर रहे और पढ़ाई करे। लेकिन रामू अपने दोस्त मोहन को छोड़ने के लिए राज़ी नहीं होता है। एक दिन मोहन सुनता है कि कोई (अशोक) मीना को पुकार रहा है तो वह उत्सुक्तता से अपनी बहन से मिलने आगे बढ़ता है लेकिन उसके भिखारी होने की वजह से मीना उसको पहचानने से इन्कार कर देती है। बाद में मीना अशोक को सब सच बता देती है। इस बीच मंजु का भी देहान्त हो जाता है। एक दिन गली की लड़ाई में पुलिस रामू को हिरासत में ले लेती है। शर्मा जी उसकी ज़मानत देते हैं और कहते हैं कि अब वह उसे झोपड़पट्टी में नहीं रहने देंगे। रामू मान जाता है और उनके साथ रहने चला जाता है। मोहन का दिल टूट जाता है। तभी शर्मा जी का देहान्त हो जाता है और रामू के पास इम्तिहान की फ़ीस भरने के पैसे नहीं होते हैं। मोहन को जब यह बात पता चलती है तो बीमारी में भी वह गाकर पैसे जुटा लेता है और चुपके से रामू के स्कूल में जमा कर देता है। मोहन इतना बीमार पड़ जाता है कि उसे अस्पताल दाख़िल कराना पड़ता है जहाँ मीना बिना बताए उसकी देखभाल करने लगती है। रामू इम्तिहान में अव्वल आता है और जब उसे सच्चाई का पता चलता है तो वह अपने दोस्त से मिलने अस्पताल जाता है। मोहन मीना और रामू को माफ़ कर देता है और फिर तीनों गले मिलते हैं। चरित्र सुशील कुमार - रामनाथ गुप्ता उर्फ़ रामू सुधीर कुमार - मोहन बेबी फ़रीदा - मंजुला उर्फ़ मंजु उमा राजू - मीना संजय ख़ान - अशोक लीला मिश्रा - मौसी नाना पालसिकर - शर्मा जी (स्कूल में अध्यापक) लीला चिटनिस - रामू की माँ अभि भट्टाचार्य - स्कूल का हेडमास्टर मुख्य कलाकार संजय ख़ान लीला मिश्रा नाना पालसिकर लीला चिटनिस अभि भट्टाचार्य मूलचन्द जॉनी व्हिस्की संगीत गीत गायक मजरुह सुल्तानपुरी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल मेरा तो जो भी कदम है मोहम्मद रफ़ी 3:47 चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे मोहम्मद रफ़ी 4:54 कोईजजबराहनपाय जब राह न पाये मोहम्मद रफ़ी 4:19 गुड़िया कब तक ना हँसोगी लता मंगेशकर 3:29 जानेवालों ज़रा मुड़ के मोहम्मद रफ़ी 5:16 राही मनवा दु:ख की चिन्ता मोहम्मद रफ़ी 4:05 नामांकन और पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार - ताराचंद बड़जात्या फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ कथा पुरस्कार - बाण भट्ट फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखन पुरस्कार - गोविन्द मूनिस फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संगीतकार पुरस्कार - लक्ष्मीकांत प्यारेलाल फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक पुरस्कार - मोहम्मद रफ़ी (चाहूंगा मैं तुझे गीत के लिए) फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ गीतकार पुरस्कार - मजरुह सुल्तानपुरी (चाहूंगा मैं तुझे गीत के लिए) नामांकित फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार - सत्येन बोस सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ 0146645 दोस्ती श्रेणी:1964 में बनी हिन्दी फ़िल्म श्रेणी:फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार विजेता श्रेणी:राजश्री प्रोडक्शन्स श्रेणी:लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल द्वारा संगीतबद्ध फिल्में