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वामन केशव लेले
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डॉ वामन केशव लेले (२९ मई १९३३ - १३ फरवरी २००७) संस्कृत काव्यशास्त्र और पाश्चात्त्य शैलीशास्त्र के विद्वान और समीक्षक थे। वे मराठी, संस्कृत, अंग्रेजी, हिन्दी और गुजराती इन पाँच भाषाओं के ज्ञाता थे। उन्होंने अनेक ग्रन्थों की रचना की जिन्हें देश-विदेश में मान्यता मिली।
डॉ. वामन केशव लेले का जन्म और पालन-पोषण मुंबई में हुआ। मुम्बई विश्वविद्यालय से कला में ऑनर्स के साथ स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद, उन्होंने मराठी में अपनी मास्टर डिग्री पूरी की, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय में पहला स्थान प्राप्त किया और उन्हें एन.सी. केलकर स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
उन्होंने अपने शैक्षणिक जीवन का आरम्भ एसएनडीटी विश्वविद्यालय में एक व्याख्याता के रूप में की और बाद में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय चले गए, जहाँ उन्होंने अपने करियर का अधिकांश समय बिताया। डॉ. लेले ने पुणे विश्वविद्यालय से अपनी पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उनके शोध प्रबंध "भारतीय काव्यशास्त्रची उत्क्रांति" (भारतीय काव्यशास्त्र का विकास) को साहित्यिक आलोचना में एक महान कृति माना जाता है।
डॉ. लेले एक उत्साही शोधकर्ता थे। उनकी शोध रुचि प्राचीन भारतीय साहित्यिक आलोचना, पश्चिमी शैलीविज्ञान, मध्यकालीन मराठी कविता, आधुनिक मराठी गद्य, रचना पद्धति और प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक ग्रंथों की व्याख्या, और रूपांतरणकारी अनुवादात्मक व्याकरण (Transformational Generative Grammar) तक विस्तृत थी। अपने जीवनकाल में, उन्होंने 29 विद्वत्तापूर्ण पुस्तकें और 140 शोधपत्र लिखे। साहित्य में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें महाराष्ट्र राज्य सरकार, विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से कई पुरस्कार मिले।
डॉ. लेले ने अपना सेवानिवृत्त जीवन पुणे में बिताया। वह अपनी अंतिम सांस तक शोध कार्य में सक्रिय रूप से लगे रहे।
कृतियाँ
The doctrine of the tantrayukti-s : methodology of theoretico-scientific treatises in Sanskrit (१९८१)
भामह काव्यालङ्कार : a stylistical and methodological study (१९९९)
क्षेमेन्द्रकृत कविकण्ठाभरण (१९६६)
वामन की काव्यालङ्कारसूत्रवृत्ति का अध्ययन
काव्य, शास्त्र, व संस्कृति : विविध विषयावरील विवेचक लेखांचा सङ्ग्रह (१९७०)
मुक्तेश्वरकृत स्फुटकाव्ये : व्वेचक प्रस्तावना, मूल संकलित, पाठभेद, व विस्तृत टीपा यांसह
गजेन्द्रमोक्ष : संस्कृत व मराठी हस्तलिखितांच्या आधारे अभ्यास
Methodology of ancient Indian sciences
Study of scientific elements in Sanskrit poetics and allied literature
भारतीय काव्यशास्त्राची उत्क्रान्ति : प्रथम युग (१९७०)
गुलाबराव कृत काव्यसूत्रसंहिता
वाग्विलास : कवि मोरया ह्यांच्या विवाडक कवितांचा संग्रह
भाषा : स्वरूप, सामर्थ्य व सौन्दर्य
वाक्यकोश : मराठी इंग्रेजी व्यावहारिक वाक्यकोश
शाकुन्तल शैलीशास्त्रीय अभ्यास (१९९७)
काव्यसूत्रसंहिता : श्रीगुलाबरावमहाराज जन्मशताब्दी प्रकाशन (1981)
Reflections on creative writing (२००३)
क्षेमेन्द्रप्रणीत औचित्य स्द्धान्त आणि औचित्यविचारचर्चा (१९६६)
ज्ञानेश्वरीचा शास्त्रीय अभ्यास (१९८६)
भाषा साहित्य व शास्त्र : कही विचार (१९९१)http://www.profwklele.com/ Prof.Lele 1 मई 2022 5 फ़रवरी 2022 https://web.archive.org/web/20220205180612/http://www.profwklele.com/ dead
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
कविकण्ठाभरण ( क्षेमेन्द्र कृत ; हिन्दी अनुवाद एवं व्याख्या : वामन केशव लेले)
प्रो० वा० के० लेले का जालघर https://web.archive.org/web/20250713004151/https://profwklele.com/ 13 जुलाई 2025
श्रेणी:संस्कृत विद्वान