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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कोच राजवंश

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जनवरी 2017 कोच राजवंश का मुख्य भूभाग वर्तमान पश्चिम बंगाल, बांगलादेश का उत्तरी भाग, असम का पश्चिमी भाग व नेपाल के काेसी नदी से पूरव का भाग है। इसका इतिहास महाभारत काल तक का बताया जाता है। पहले और दूसरे शताब्दी ई. के आसपास हिमालय क्षेत्र के कंचनजंगा क्षेत्र के पहाड़ियों में और इसके निचले हिस्से में किरात/कोच जनजातियों का बसोबास था। उस समय इस क्षेत्र को किरहाडिया कहा जाता था। महाभारत, रामायण तथा तुलामय के भूगोल में इस तथ्य का उल्लेख है। ईशा के ४ थे शताब्दी से १२ वें शताब्दी तक पूर्वी भारत के प्राचीन कामरुप राज्य में मुख्य तीन राजवंश का उल्लेख मिलता है :- वर्मन, म्लेच्छ, पाल। पाल/पला राजवंश के बाद १३ वें शताब्दी के आसपास प्राचीन कामरुप राज्य दो हिस्से में बट् गई - कामरुप के पश्चिमी हिस्से में कोच राज्य और पूर्वी भाग में अहोम राज्य। उसके बाद ईशा के १३वें शताब्दी से लगभग १५ वीं शताब्दी तक कोच कामता राज्य में सेन/खेन वंश का राज्य शासन कायम था। इस दौरान सेन साम्राज्य नेपाल के गण्डक नदी से पूरब असम के ब्रह्मपुत्र से पश्चिम, वर्तमान त्रिपुरा मिजोरम तक विस्तार हुआ था। सन् १४९८/९९ में बंगाल के सुल्तान अलाउद्दीन हुसैन शाह के आक्रमण के बाद सेन/खेन वंश की शासन सिमट गई और वे पिछे हट्ते गए। करिब अंग्रेजों के आगमन तक सेन वंश का राज वर्तमान नेपाल में विजयपुर, चौदण्डी, उदयपुर, चिसापानी और पाल्पा तक रहा था। कोच कामता राज का राजधानी कूचबिहार था। इस की दूसरी बढ़ी नगर व प्रशासकीय केन्द्र गोग्राहा (विराटनगर, नेपाल) में था। जहाँ विराट राजवंशी अत्यधिक संख्या मेें अभि भि बसाेबस हे। जाे विराट राजा वंश में गर्व करते हे। कामता राज्य में अलाउद्दीन हुसैन शाह का शासन ज्यादा टिक नहीं पाया। स्थानीय कोच व मेच जनजातियाें के प्रभाव से सन् १५१५ में कोच कामता राज्य में कोच राजवंश का उदय हुआ। प्राचीन कामरुप- कोच कामता राज्य के छोटे छोटे गाँव में अलग अलग जात के प्रमुख के माध्यम से राज्य शासन संचालन हाेता था। इन्हीं गाँवो में से एक था चिकनाबारी (असम के ग्वालपारा जिले का एक गाँव)। वहाँ के मुखिया थे - हरिदास मेच "हरिया मण्डल" (दम्बाम्बु मेच के पुत्र)। उनकी दो पत्नी थी - हीरा व जीरा। जिरा के तरफ से दो बेटे पैदा हुए - चन्दन और मदन एवं हिरा के पुत्र हुए - शिशु और विशु। कोच राजवंश के प्रथम राजा थे चन्दन सिंह। उनका छोटा भाइ मदन युद्ध में मारा गया। शिशु स्वेच्छा से राजपाट से अलग रहा और राजा चन्दन सिंह के शासन में मुख्य सहयोगी रहा उसका सौतेला भाइ विशु। चन्दन सिंह के बाद विशु ऊर्फ विश्व सिंह कोच साम्म्राज्य का दूसरा राजा बना। इस तरह कोच राज (सन् १५१५-१९४९) का विशाल भारत में विलय होने तक इस वंश के २४ राजा हुए। काेच राजाओं का नामावली इस वंश के राजा थे - १ - महाराजा चन्दन २- महाराजा विश्वसिंह ३- महाराजा नर नारायण ४- महाराजा लक्ष्मी नारायण ५- महाराजा वीर नारायण ६- महाराजा प्रन नारायाण ७- महाराजा मदन नारायण ८- महाराजा वासुदेव नारायाण ९- महाराजा महेन्द्र नारायाण १०- महाराजा रूप नारायण ११- महाराजा उपेन्द्र नारायण १२- महाराजा देवेन्द्र नारायण १३- महाराजा धाइजेन्द्र नारायण (प्रथम) १४- महाराजा राजेन्द्र नारायण १५- महाराजा धरेन्द्र नारायण १६- महाराजा विजेन्द्र नारायण १७- महाराजा धाइजेन्द्र नारायण (द्वितीय) १८- महाराजा हरेन्द्र नारायण १९- महाराजा शिवेन्द्र नारायण २०- महाराजा नरेन्द्र नारायण २१- महाराजा नृपेन्द्र नारायण २२- महाराजा राजराजेन्द्र नारायण २३- महाराजा जितेन्द्र नारायण और २४- महाराजा जगद्दिपेन्द्र नारायण