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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

पैदल गुरुमूर्ति शास्त्री

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गुरुमूर्ति शास्त्री एक कर्नाटक संगीतकार थे जो १८वीं शताब्दी में तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के कायतार गांव में रहते थे।https://books.google.com/books?id=pwMk4FIcpuUC&dq=Paidala+Gurumurti+Sastri&pg=PA430 The Madras Tercentenary Commemoration Volume Committee Madras Tercentenary Celebration 1994 Asian Educational Services 978-81-206-0537-4 430 en वे संगीत और साहित्य दोनों में पारंगत थे। उनका परिवारिक नाम 'पैदल' था। उन्होंने वेंकटसुब्बय्या से संगीत सीखा। गीत गुरुमूर्ति शास्त्री ने जनक जन्य रागों में कई गीतों (गीतम्) की रचना की। गीतम छोट-छोटे गीत होते हैं। उन्होंने लगभग 1000 गीतों की रचना की, जिससे उन्हें 'वेयी गीतला गुरुमूर्ति शास्त्री' नाम मिला। वे रागों के विज्ञान को समझते थे। उनकी मुद्रा, गुरुमूर्ति थी। संस्कृत में उनके द्वारा रचित गीतम् समय के साथ लुप्त हो गए। उनके कुछ लुप्त होने से बच गये गीतम् निम्नलिखित हैं- धन्यसि में नीरजनयन मोहनम् में सदापतिम् सहन में कंसासुर अरबि में 'रे रे श्री रामचंद्र' कम्बोजी में मन्दार धरे आनन्द भैरवी में 'पहि श्री रामचंद्र' श्री में मीनाक्षी जया कामाक्षी नट्टै में गण विद्या धुरन्धर (अपने गुरु सोंटि वेंकटसुब्बय्या की स्तुति करते हुए) सन्दर्भ श्रेणी:तेलुगू लोग श्रेणी:Pages with unreviewed translations